अमेरिका पर भरोसा नहीं; US में नाटो को सजा देने वाले ईमेल लीक के बीच मैक्रों के तीखे बोल
फ्रेंच राष्ट्रपति मैक्रों ने एक बार फिर से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक भरोसेमंद सहयोगी नहीं है। यह बहुत देशों का सहयोगी है लेकिन उतना भरोसेमंद नहीं है। अमेरिका में नाटो के सजा देने की तैयारी।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप और अमेरिका के बीच बनी सैन्य साझेदारी और भरोसा अब कमजोर पड़ता जा रहा है। फ्रेंच राष्ट्रपति मैक्रों ने गुरुवार को ट्रंप प्रशासन को लेकर तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि अब अमेरिका के एक भरोसेमंद सहयोगी नहीं माना जा सकता। मैक्रों का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ दिन पहले ही पेंटागन की तरफ से एक ईमेल लीक हुआ है। इस ईमेल में ईरान युद्ध में साथ न देने वाले नाटो देशों को सजा देने की उपाय सुझाए गए थे।
एथेंस में एक कार्यक्रम के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने वैश्विक राजनीति को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज के समय पारंपरिक सैन्य गठबंधन में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। ऐसे में अब यूरोप को सैन्य क्षेत्र में अपने पैरों पर मजबूती के साथ खड़े होने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "हर कोई देख रहा है कि नंबर एक ताकत, अमेरिका कैसा दिखाई दे रहा है। वह कुछ देशों का सहयोगी हो सकता है, लेकिन यह उतना भरोसेमंद नहीं है। कोई भी पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है कि अमेरिका भरोसेमंद सहयोगी है।"
वैश्विक आपदा यूरोप के लिए एक अवसर: मैक्रों
शुरुआत से ही यूरोपीय देशों को सैन्य स्तर पर आत्मनिर्भर बनाने की बात करने वाले मैक्रों ने वर्तमान वैश्विक स्थिति को यूरोप के लिए विश्व स्तर पर दोबारा स्थापित होने वाला बताया। मैक्रों ने कहा कि मौजूदा वैश्विक राजनीति ने दुनिया के सुरक्षा संबंधों की कमियों को उजागर कर दिया है। ऐसे हालात यूरोपीय संघ के लिए वैश्विक रूप से एक बार फिर से खुद को स्थापित करने का अवसर है।
ट्रंप ने खोल दी नाटो की पोल
मैक्रों का यह बयान अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर आया है। अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने नाटो देशों को रक्षा क्षेत्र पर ज्यादा खर्च करने के लिए कहा था। कुछ देशों ने इस फैसले पर थोड़े सवाल उठाए लेकिन बाद में मान गए।
अब दूसरे कार्यकाल में आए ट्रंप ने शुरुआत से ही यूरोपी देशों को आड़े हाथों लिया। सबसे पहले तो उन्होंने खर्च को लेकर नाटो देशों को जमकर सुनाया। उसके बाद यूक्रेन की मदद करने से भी साफ इनकार कर दिया। एक समय तो ऐसा आया कि ट्रंप खुलकर रूस की वकालत करते हुए नजर आए थे।
जेलेंस्की जब मदद मांगने के लिए वाइट हाउस आए, तो पूरी दुनिया के सामने ट्रंप ने उनको जलील करने की कोशिश की। यह यूरोपीय देशों के लिए एक बड़ा धक्का था। इसके बाद ट्रंप ने यूक्रेन को दिए जाने वाले हथियारों का खर्चा नाटो के बाकी देशों को उठाने के लिए कहा। इसके लिए भी यह देश तैयार हो गए। पर ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने यूरोप के तमाम राष्ट्राध्यक्षों को बुलाकर एक तस्वीर निकलवाई। इसमें वह सहयोगी के तौर पर नहीं बल्कि नेता के तौर पर नजर आए।
ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोप और अमेरिका आमने-सामने खड़े दिखाई दिए। फ्रेंच राष्ट्रपति मैक्रों ने जब ट्रंप को निजी मैसेज किए, तो उन्होंने इसे सार्वजनिक कर दिया। ईरान युद्ध ने परिस्थिति को पूरी तरह से बदल दिया। ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए यूरोपीय देशों को आने के लिए कहा कि लेकिन फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी समेत तमाम देशों ने इससे साफ इनकार कर दिया। इसके बाद गुस्साए ट्रंप ने इन नेताओं के ऊपर निजी हमले किए और यूरोपीय देशो को कायर तक कह दिया।
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