Trump who claimed to stop wars where did he get stuck in the ninth America prestige is at stake 8 युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले ट्रंप 9वें में कहां फंस गए? दांव पर अमेरिका की इज्जत, International Hindi News - Hindustan
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8 युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले ट्रंप 9वें में कहां फंस गए? दांव पर अमेरिका की इज्जत

मोटे तौर पर ईरान की मांग है कि अमेरिका यह माने कि उसने आक्रमण किया और यह भी आश्वासन दे कि दोबारा कभी हमला नहीं करेगा। किसी भी बातचीत या युद्ध-विराम की दिशा में बढ़ने के लिए ईरान की ये मांगें गलत नहीं हैं।

Thu, 26 March 2026 06:28 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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8 युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले ट्रंप 9वें में कहां फंस गए? दांव पर अमेरिका की इज्जत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध-विराम के इच्छुक दिख रहे हैं, लेकिन ईरान ने किसी समझौते या बातचीत को ‘अभी नहीं और कभी नहीं’ बताया है। ऐसा लगता है, राष्ट्रपति ट्रंप पाकिस्तानी फील्ड मार्शल मुनीर की मदद से युद्ध-विराम की कोई सूरत खोज रहे हैं, लेकिन ईरान के प्रवक्ता ने ऐसी किसी भी बातचीत या कोशिश से इनकार किया है। आज ईरान तल्खी और नाराजगी से भरा हुआ है। उसके प्रवक्ता ने तो यहां तक इशारा कर दिया है कि ट्रंप जैसे व्यक्ति से कोई बातचीत या समझौता नहीं किया जाएगा।

मोटे तौर पर ईरान की मांग है कि अमेरिका यह माने कि उसने आक्रमण किया और यह भी आश्वासन दे कि दोबारा कभी हमला नहीं करेगा। किसी भी बातचीत या युद्ध-विराम की दिशा में बढ़ने के लिए ईरान की ये मांगें गलत नहीं हैं। कोई भी देश अपनी सुरक्षा का आश्वासन चाहेगा, तभी किसी समझौते या युद्ध-विराम के लिए तैयार होगा। अमेरिका का जो रवैया या इतिहास रहा है, उसे कोई भी पश्चिम एशियाई देश कैसे भूल सकता है? अमेरिकी नीति या रणनीति अपने हित को एकतरफा सुरक्षित करने की रही है।

क्या वाकई युद्ध विराम चाहता है अमेरिका?

यहां सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या अमेरिका वाकई युद्ध-विराम चाहता है? अगर वह समझौता चाहता है, तो फिर पश्चिम एशिया में 1,000 विशेष सैनिकों की तैनाती क्यों कर रहा है? ये सैनिक पैराशूट से उतरकर जमीनी लड़ाई में माहिर हैं, तो क्या ईरान में जमीनी लड़ाई शुरू होने वाली है? ईरान के पड़ोसी अफगानिस्तान में जमीनी लड़ाई का जैसा त्रासद इतिहास अमेरिका पहले लिख चुका है, उसे लोग भूले नहीं हैं। अंतत: निराश और परेशान होकर उसे अफगानिस्तान से लौटना पड़ा था। जमीनी लड़ाई की ओर बढ़ने का मतलब यही है कि हवाई जंग में अमेरिका और इजरायल को मनचाही कामयाबी नहीं मिल रही है। जो युद्ध सप्ताह भर के लिए सोचकर शुरू किया गया था, वह 26 दिन से जारी है और इसके दुष्परिणाम पूरी दुनिया भुगत रही है।

रोज कर रहे एकतरफ दावे

ट्रंप अपने स्वभाव के अनुरूप ही लगभग रोज एकतरफा दावे कर रहे हैं। एक दावा यह भी है कि ईरान समझौता करना चाहता है। इसके जवाब में ईरान ने जो कहा है, उस पर गौर करने की जरूरत है। ईरान ने कहा है, ‘अपनी हार को समझौते का नाम न दीजिए। आपके खोखले वादों का युग समाप्त हो चुका है। क्या आपके आंतरिक संघर्ष इस हद तक पहुंच गए हैं कि आप आपस में ही बातचीत कर रहे हैं?’ साफ है, ईरान अब ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा, जिससे उसकी पराजय का कोई संदेश दुनिया में जाए। आज सबसे जरूरी बात यह है कि अमेरिका युद्ध-विराम के लिए हालात तैयार करे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 सूत्रीय युद्ध-विराम योजना की पेशकश की है। दूसरी ओर, ईरान की पांच प्रमुख मांगें हैं। जैसे, युद्ध की तत्काल समाप्ति, भविष्य में ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं, क्षति के लिए ईरान को मुआवजा, होर्मुज जलडमरूमध्य पर औपचारिक नियंत्रण, मिसाइल कार्यक्रम पर कोई प्रतिबंध नहीं।

क्या अमेरिका या इजरायल इन शर्तों को मानेंगे?

अमेरिकी विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि कथित रूप से आठ युद्ध रोकने का दावा करने वाले ट्रंप अपने नौवें युद्ध में फंस गए हैं, जिससे निकलने के लिए उन्हें सबसे पहले अपनी नाक से समझौता करना पड़ेगा। समय की मांग है कि अमेरिका अब इजरायल के साथ मिलकर हालात की ईमानदार समीक्षा करे और दुनिया में अमन-चैन की राह निकाले।

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