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बिना भनक लगे 20 मिनट में कमा लिए 840 करोड़! ट्रंप के ऐलान से पहले किसने खेला रहस्यमयी खेल?

ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले टालने की घोषणा से महज 15 मिनट पहले शेयर और तेल बाजार में 14,000 करोड़ रुपये का रहस्यमयी दांव लगा। जानिए कैसे एक अज्ञात ट्रेडर ने 20 मिनट में 840 करोड़ का मुनाफा कमाया और क्यों उठ रहे हैं इनसाइडर ट्रेडिंग के सवाल।

Tue, 24 March 2026 12:42 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
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बिना भनक लगे 20 मिनट में कमा लिए 840 करोड़! ट्रंप के ऐलान से पहले किसने खेला रहस्यमयी खेल?

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित हमलों को 5 दिनों के लिए टालने की घोषणा की थी। इस घोषणा से ठीक पहले, वैश्विक बाजारों में रहस्यमयी और भारी मात्रा में ट्रेडिंग देखने को मिली। विश्लेषकों का मानना है कि इस सटीक समय पर किए गए दांव से किसी अज्ञात ट्रेडर ने महज 20 मिनट के भीतर लगभग 100 मिलियन डॉलर (करीब 840 करोड़ रुपये) का मुनाफा कमा लिया।

ट्रेडिंग का घटनाक्रम और सटीक समय

सोमवार को न्यूयॉर्क के समयानुसार सुबह 6:50 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 4:20 बजे), सीएमई पर S&P 500 ई-मिनी फ्यूचर्स में अचानक भारी ट्रेडिंग दर्ज की गई और इसी के साथ कच्चे तेल के बाजार में भी हलचल हुई। यह समय काफी असामान्य था क्योंकि प्री-मार्केट घंटों यानी बाजार खुलने से पहले का समय में आमतौर पर इतनी बड़ी लिक्विडिटी या लेन-देन नहीं होता है।

इसके ठीक 15 मिनट बाद, सुबह 7:05 बजे ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया कि अमेरिका की ईरान के साथ बातचीत हुई है और वह ईरानी बिजली संयंत्रों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर अपने हमले रोक देगा। लेकिन ट्रंप की इस घोषणा से पहले ही, बाजार में अरबों के दांव लगाए जा चुके थे।

कैसे लगाए गए अरबों के दांव?

ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म 'अनयूजुअल व्हेल्स' के अनुसार, इस रहस्यमयी ट्रेडर ने बाजार में दो दिशाओं में एक साथ दांव लगाए।

S&P 500 फ्यूचर्स की खरीदारी: तनाव कम होने पर शेयर बाजार में तेजी आने की उम्मीद के साथ लगभग 1.5 बिलियन डॉलर (करीब 12,600 करोड़ रुपये) के फ्यूचर्स खरीदे गए।

तेल फ्यूचर्स की बिक्री: युद्ध की आशंकाएं खत्म होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद में 192 मिलियन डॉलर (करीब 1,615 करोड़ रुपये) के फ्यूचर्स बेचे गए (शॉर्ट किए गए)।

महज एक मिनट के छोटे से अंतराल में, ब्रेंट और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) के लगभग 6,200 फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स का लेन-देन हुआ। इनकी कीमत 580 मिलियन डॉलर (करीब 4,870 करोड़ रुपये) थी, जो उस समय के सामान्य ट्रेड से चार से छह गुना ज्यादा थी।

बाजार की प्रतिक्रिया और भारी मुनाफा

ट्रंप की पोस्ट के तुरंत बाद बाजार ने ठीक वैसा ही बर्ताव किया जैसी ट्रेडिंग की गई थी।

  • ओपनिंग बेल से पहले S&P 500 फ्यूचर्स में 2.5 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया।
  • ब्रेंट क्रूड 109 डॉलर से लुढ़क कर 92 डॉलर पर आ गया।
  • WTI क्रूड लगभग 6 प्रतिशत गिरकर कुछ समय के लिए 88.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

अनुमान है कि अकेले तेल की कीमतों में आए इस उतार-चढ़ाव से 20 मिनट के भीतर लगभग 840 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया गया। अगर शेयर बाजार (इक्विटी) के मुनाफे को भी जोड़ दिया जाए, तो कुल कमाई काफी अधिक होगी।

इनसाइडर ट्रेडिंग का गहराता संदेह

इस पूरे प्रकरण को जो बात सबसे ज्यादा संदिग्ध बनाती है, वह है किसी भी 'सार्वजनिक जानकारी' का न होना। शाम 4:20 बजे (IST) तक ट्रंप की इस घोषणा को लेकर कोई भी न्यूज अलर्ट या पूर्व-निर्धारित प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं थी। फिर भी किसी ने दोनों बाजारों में 14,000 करोड़ रुपये से अधिक का बेहद सटीक निवेश कर दिया।

हेज फंड मैनेजर मैट विलियम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे अपने 25 साल के करियर का एक अत्यधिक असामान्य पैटर्न बताया। एक अमेरिकी ब्रोकरेज रणनीतिकार ने भी चिंता जताते हुए कहा कि यह सवाल उठना लाजिमी है कि ट्रंप की पोस्ट से ठीक 15 मिनट पहले इतना बड़ा जोखिम उठाने की जानकारी और प्रेरणा किसके पास थी।

'फाइनेंशियल टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, वाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस तरह के किसी भी गैरकानूनी मुनाफे को बर्दाश्त नहीं करता है और बिना सबूत के ऐसे आरोप लगाना गैर-जिम्मेदाराना है।

अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) ने अभी तक इस संदिग्ध ट्रेडिंग पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। इससे पहले भी कुछ मामलों (जैसे वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी से पहले पॉलीमार्केट पर लगाए गए दांव) में ऐसे ही सवाल उठ चुके हैं।

ईरान का खंडन और बाजार का यू-टर्न

इस पूरी घटना में एक नया मोड़ तब आया जब ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबफ ने X पर एक पोस्ट में वाशिंगटन और तेहरान के बीच किसी भी तरह की बातचीत होने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने इसे वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करने के लिए फैलाई गई फर्जी खबर करार दिया। उनके इस खंडन के तुरंत बाद ग्लोबल स्टॉक्स में गिरावट दर्ज की गई और ऊर्जा बाजारों में फिर से खरीदारी शुरू हो गई।

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