सुपरपावर की फजीहत! ईरान के खौफ से ट्रंप ने सैटेलाइट कंपनियों के आगे जोड़े हाथ
क्या ट्रंप प्रशासन ने ईरान के हमले में तबाह हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों की तस्वीरें दुनिया से छिपाई थीं? जानिए पेंटागन के डर और इस खौफनाक सच की पूरी इनसाइड स्टोरी।

हाल ही में एक बड़ा और सनसनीखेज दावा सामने आया है। इस दावे के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के हाथों हुए अपने एक बड़े नुकसान और फजीहत को दुनिया की नजरों से छिपाने की पूरी कोशिश की थी।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि जब ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े हमले किए थे, तब ट्रंप प्रशासन ने प्राइवेट सैटेलाइट कंपनियों से खास गुजारिश की थी। प्रशासन ने कथित तौर पर इन कंपनियों से 'मिन्नतें' की थीं कि वे तबाह हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैटेलाइट तस्वीरें मीडिया या इंटरनेट पर बिल्कुल जारी न करें।
पेंटागन को किस बात का डर था?
अमेरिकी रक्षा विभाग यानी 'पेंटागन' इस पूरी घटना को लेकर भारी खौफ में था। पेंटागन को डर था कि अगर तबाह हुए ठिकानों की असली तस्वीरें दुनिया के सामने आ गईं, तो अमेरिका की ताकतवर छवि को गहरा धक्का लगेगा।
प्रशासन को इस बात की घबराहट थी कि अगर दुनिया ने अमेरिका का वह नुकसान देख लिया, तो यह साबित हो जाएगा कि ईरान ने अमेरिकी सेना को पूरी तरह से लाचार कर दिया था। अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस सार्वजनिक अपमान से किसी भी कीमत पर बचना चाहता था।
तस्वीरें छिपाने का मकसद क्या था?
आज के समय में 'मैक्सर' और 'प्लैनेट लैब्स' जैसी प्राइवेट सैटेलाइट कंपनियां अंतरिक्ष से किसी भी हमले के नुकसान की सटीक तस्वीरें खींचकर दुनिया के सामने रख देती हैं। ट्रंप प्रशासन नहीं चाहता था कि इन कंपनियों के जरिए ईरान के हमले की असली ताकत और अमेरिकी सेना के असल नुकसान का पर्दाफाश हो। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि अमेरिकी जनता और दुनिया के बीच अमेरिकी सेना की कमजोरी का कोई भी संदेश न जाए।
अमेरिकी कंपनी 'प्लैनेट लैब्स' का बड़ा फैसला
हाल ही में अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के युद्ध के बीच एक बेहद अहम खबर सामने आई थी। अमेरिका की दिग्गज सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी 'प्लैनेट लैब्स' ने ईरान और मिडिल ईस्ट के संघर्ष वाले क्षेत्रों की तस्वीरें जारी करने पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी। कंपनी ने यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा किए गए एक अनुरोध के बाद उठाया था।
प्लैनेट लैब्स ने पिछले महीने अपने ग्राहकों को एक ईमेल भेजकर इस बड़े फैसले से अवगत कराया। न्यूज एजेंसियों के मुताबिक, कंपनी ने बताया है कि अमेरिकी सरकार ने सैटेलाइट तस्वीरें मुहैया कराने वाले प्रदाताओं से तस्वीरों पर अनिश्चितकालीन रोक लगाने को कहा था। इससे पहले भी प्लैनेट लैब्स ने मिडिल ईस्ट की तस्वीरों पर 14 दिन की देरी का प्रतिबंध लागू किया था, जिसे शुरुआती 96 घंटे की देरी के नियम को बढ़ाकर किया गया था। कंपनी के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य दुश्मनों को अमेरिका और उसके सहयोगियों पर हमले के लिए इन तस्वीरों का इस्तेमाल करने से रोकना था। आसान शब्दों में कहें तो, यह पूरी कवायद इसलिए की गई ताकि अमेरिका अपनी महाशक्ति वाली छवि को बचा सके और तबाही के उन असली सबूतों को छिपा सके जो उसकी फजीहत करा सकते थे।
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