रूस अब खुद बनाने लगा शाहेद-136 ड्रोन, क्यों ईरान की उड़ गई नींद; खासियत कर देगी हैरान
फैक्ट्री के सीईओ तिमुर शागिवालेव ने बताया, 'एल्यूमिनियम बार आते हैं, उनसे इंजन बनाए जाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक चिप्स से माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स तैयार होती है। कार्बन फाइबर और फाइबरग्लास से फ्यूजलेज बनते हैं।'

रूस की अलाबुगा फैक्ट्री में अब स्वतंत्र रूप से शाहेद-136 ड्रोनों का उत्पादन शुरू हो गया है। इसे लेकर ईरान की चिंता बढ़ गई है। यह रूस का सबसे बड़ा ड्रोन निर्माण केंद्र है, जो ईरानी डिजाइन वाले शाहेद-136 हमलावर ड्रोनों को स्थानीय स्तर पर बना रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति मॉस्को और तेहरान के बीच संबंधों में तनाव पैदा कर रही है। अलाबुगा फैक्ट्री मॉस्को से 965 किमी दूर तातारस्तान क्षेत्र में है, जहां ड्रोनों के लगभग सभी हिस्सों को स्थानीय स्तर पर बनाया जा रहा है।
फैक्ट्री के सीईओ तिमुर शागिवालेव ने कहा, 'एल्यूमिनियम बार आते हैं, उनसे इंजन बनाए जाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक चिप्स से माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स तैयार होती है। कार्बन फाइबर और फाइबरग्लास से फ्यूजलेज बनते हैं।' शाहेद-136 को रूस में गेरान कहा जाता है। यूक्रेन में रूस के लंबी दूरी के हमलों का यह मुख्य हथियार रहा है। फरवरी 2022 के आक्रमण के बाद शुरू में ये ड्रोन ईरान से मंगवाए गए थे, लेकिन अब इन्हें लगभग पूरी तरह से रूस में बनाया जा रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि फैक्ट्री का विस्तार हो रहा है।
ईरान को किस बात का डर
यूक्रेन की रक्षा खुफिया जानकारी के अनुसार, यह फैक्ट्री हर महीने 5500 से अधिक ड्रोन बना रही है। यह आंकड़ा पहले की तुलना में कहीं ज्यादा है और लागत भी कम हो गई है। 2022 में एक ड्रोन बनाने की लागत करीब 2 लाख डॉलर (1.75 करोड़ रुपये) थी, जो 2025 में घटकर 70 हजार डॉलर (61.36 लाख रुपये) हो गई है। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूस ने इन ड्रोनों में बेहतर संचार उपकरण, विस्फोटक वारहेड और लंबी दूरी की बैटरी लगाई है, जिससे इन्हें मार गिराना मुश्किल हो गया है। खुफिया अधिकारी ने बताया कि ईरान शुरू में रूस के स्थानीय उत्पादन से खुश था, लेकिन अब उसे डर है कि वह शाहेद के डिजाइन और उत्पादन पर नियंत्रण खो सकता है।
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