रमजान में मचा कोहराम, ईरान के अलावा इन मुस्लिम देशों में भी खूनखराबा
ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों ने ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को हिला कर रख दिया है।

Iran-Israel War: पवित्र रमजान का महीना, जो शांति और इबादत का प्रतीक माना जाता है, इस साल कई मुस्लिम देशों के लिए भारी अशांति और हिंसा लेकर आया है। पश्चिम एशिया से लेकर दक्षिण एशिया तक युद्ध और आंतरिक संघर्षों ने त्यौहार की रौनक को मातम में बदल दिया है। ईरान में जहां सत्ता के शीर्ष पर उथल-पुथल मची है, वहीं पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव खुली जंग में तब्दील हो चुका है।
ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों ने ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को हिला कर रख दिया है। सबसे चौंकाने वाली खबर देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के निधन की पुष्टि है, जिसके बाद ईरान में 40 दिनों के शोक की घोषणा की गई है। हमलों के बाद तेहरान सहित कई शहरों में अफरा-तफरी का माहौल है।
एक तरफ बाहरी दुश्मन के मिसाइल गिर रहे हैं, तो दूसरी तरफ देश के भीतर आर्थिक बदहाली और शासन के खिलाफ उठते विरोध के सुरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने बढ़ती मौतों पर गहरी चिंता जताई है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर खुली जंग का ऐलान
दक्षिण एशिया में भी स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद अब एक पूर्ण युद्ध का रूप ले चुका है। पाकिस्तान ने हाल ही में अफगानिस्तान के काबुल और कंधार जैसे प्रमुख शहरों पर हवाई हमले किए हैं। इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगान तालिबान अपनी जमीन पर टीटीपी (TTP) आतंकियों को पनाह दे रहा है, जो पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। तालिबान सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। खबरों के अनुसार, जलालाबाद में एक पाकिस्तानी लड़ाकू विमान को मार गिराया गया है और उसके पायलट को हिरासत में ले लिया गया है।
डूरंड लाइन पर जारी इस गोलाबारी में दर्जनों नागरिक और सैनिक मारे जा चुके हैं, जिससे रमजान के दौरान सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लाखों लोग विस्थापित होने को मजबूर हैं।
सिर्फ ईरान और पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि गाजा, सूडान और यमन में भी स्थिति भयावह है। गाजा में एक कमजोर संघर्ष विराम के बावजूद, इजरायली हमलों में रमजान के शुरुआती दिनों में ही कई फिलिस्तीनी मारे गए हैं। वहीं, सूडान में गृहयुद्ध ने दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट पैदा कर दिया है, जहां लोग भूख और गोलियों के बीच रोजा रखने को मजबूर हैं। यमन में हूतियों और सरकारी बलों के बीच जारी खींचतान ने शांति की उम्मीदों को धुंधला कर दिया है।
पवित्र महीने में जारी यह हिंसा न केवल इन देशों की स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि पूरे वैश्विक भाईचारे के लिए एक दुखद संदेश है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन संघर्षों को थामने के लिए कूटनीतिक प्रयास तो कर रहा है, लेकिन फिलहाल जमीन पर बारूद की गंध इबादत की खुशबू पर भारी पड़ती दिख रही है।
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