Pakistan joins Donald trump gaza board of peace but Pakistani leaders reacts to this फंस गए रे शहबाज! ट्रंप के 'गाजा चक्रव्यूह' में घिरा पाकिस्तान, शरीफ को ले न डूबे अमेरिका की जी-हजूरी?, International Hindi News - Hindustan
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फंस गए रे शहबाज! ट्रंप के 'गाजा चक्रव्यूह' में घिरा पाकिस्तान, शरीफ को ले न डूबे अमेरिका की जी-हजूरी?

Trump Pakistan: अर्जेंटीना, आर्मीनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, कजाखस्तान, कोसोवो, मोरक्को, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम ने ट्रंप का न्योता स्वीकार कर लिया है। इनमें पाकिस्तान का नाम भी शामिल है।

Thu, 22 Jan 2026 01:47 PMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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फंस गए रे शहबाज! ट्रंप के 'गाजा चक्रव्यूह' में घिरा पाकिस्तान, शरीफ को ले न डूबे अमेरिका की जी-हजूरी?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने का खामियाजा पाकिस्तान को घर में ही भुगतना पड़ सकता है। खबर है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार के इस फैसले से कई बड़े नेता नाराज नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान की तरफ से न्योता स्वीकार किए जाने को नैतिक रूप से गलत करार दिया जा रहा है। हालांकि, रक्षा मंत्री आसिफ ख्वाजा ने फैसले का बचाव किया है।

सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने पीस बोर्ड को शुरुआत से ही गलत बताया है। उन्होंने कहा, 'ऐसे इंतजाम सिर्फ कामकाज संभालने तक ही सीमित नहीं रहते।'

उन्होंने कहा, 'यह पहल शुरू से ही गलत थी। इसे जंग के बाद गाजा को बाहरी लोगों द्वारा चलाने के लिए बनाया गया था, जो असल में फिलिस्तीनी लोगों से उनका खुद का राज चलाने का अधिकार छीन लेता है। जब गाजा को फिर से बनाने, उसकी सुरक्षा और राजनीति की जिम्मेदारी बाहरी लोगों को दे दी जाती है, तो यह नए जमाने की गुलामी जैसा लगता है।

तहरीक ए तहफ्फुज ए आईन ए पाकिस्तान के नेता मुस्तफा नवाज खोकर भी इस फैसले से नाराज नजर आ रहे हैं। उन्होंने सरकार पर बगैर चर्चा के फैसला लेने के आरोप लगाए।

उन्होंने कहा, 'यह तथाकथित 'बोर्ड ऑफ पीस' गाजा पर राज करने और UN के मुकाबले एक दूसरा सिस्टम खड़ा करने की एक कोशिश है, जो पुराने दौर की गुलामी जैसा लगता है। यह बोर्ड उन पुराने तरीकों और संस्थाओं को छोड़ने की हिम्मत दिखाएगा जो अक्सर नाकाम रही हैं। इसकी अपनी भाषा में कहें तो, यह शांति बनाने वाली एक ज्यादा फुर्तीली और असरदार अंतरराष्ट्रीय संस्था होगी।'

उन्होंने आगे कहा, 'इस बोर्ड के नियम ट्रंप को असीमित ताकत देते हैं, ताकि वे बिना किसी रोक-टोक के अपना और अमेरिका का एजेंडा लागू कर सकें। इसमें इस एकतरफा नतीजे को रोकने का कोई रास्ता नहीं रखा गया है।'

इनके अलावा अमेरिका में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी, पत्रकार जाहिद हुसैन जैसे कई नामों ने पाकिस्तान सरकार के कदम पर सवाल उठाए हैं।

सरकार ने किया बचाव

एक इंटरव्यू के दौरान आसिफ ने कहा था कि बोर्ड में बड़े देशों और न्योता भेजा गया था और पाकिस्तान को ऐसे किसी भी समूह का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा था, 'अगर हम इस चर्चा या मंच से दूर रहते हैं, तो जो भी फैसले लिए जाएंगे उनमें हमारी कोई अहमियत नहीं रह जाएगी। अगर हम वहां मौजूद रहेंगे, तो हम अपने फिलिस्तीनी भाइयों के लिए और भी बेहतर तरीके से आवा उठा सकेंगे।' उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान को इस फोरम का पूरा इस्तेमाल करना चाहिए।

Donald Trump

इन देशों ने स्वीकारा न्योता

अर्जेंटीना, आर्मीनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, कजाखस्तान, कोसोवो, मोरक्को, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम ने ट्रंप का न्योता स्वीकार कर लिया है। इनमें पाकिस्तान का नाम भी शामिल है। वाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि 30 देश बोर्ड में शामिल हो सकते हैं, जबकि 50 देशों को निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।

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