नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन, पीएम ओली के घर तक पहुंची आग
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी ओली के पैतृक घर पर पथराव करने पहुंचे। यह आंदोलन काठमांडू से 400 किलोमीटर दूर, उनके गृहनगर तक फैल गया, जो अब विरोध का केंद्र बन गया है।

नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के विरोध में काठमांडू और अन्य इलाकों में सोमवार को युवाओं ने हिंसक प्रदर्शन किए। इस दौरान कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई, और कई अन्य घायल हुए। अब खबर है कि विरोध की आग प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के गृहनगर तक पहुंच गई है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी ओली के पैतृक घर पर पथराव करने पहुंचे। यह आंदोलन काठमांडू से 400 किलोमीटर दूर, उनके गृहनगर तक फैल गया, जो अब विरोध का केंद्र बन गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पूर्वी नेपाल के कोशी प्रांत के दमक इलाके में ओली के पैतृक घर पर पत्थर फेंके। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को चेतावनी के तौर पर गोलियां चलानी पड़ीं। इलाके में तनाव बना हुआ है, और चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है। काठमांडू में हालात काबू करने के लिए सेना को उतारा गया।
'जेन जी' आंदोलन और हिंसा
काठमांडू में 'जेन जी' बैनर के तहत स्कूली छात्रों समेत हजारों युवा संसद भवन के सामने जमा हुए और सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाने की मांग के साथ सरकार विरोधी नारे लगाए। नेपाली मीडिया के अनुसार, इस हिंसक प्रदर्शन में 14 लोगों की मौत हुई, हालांकि आधिकारिक पुष्टि बाकी है। प्रदर्शन तब हिंसक हो गया, जब कुछ प्रदर्शनकारी संसद परिसर में घुस गए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और रबर की गोलियां चलाईं।
अभी तक 14 लोगों की मौत
'हिमालयन टाइम्स' ने अस्पतालों के हवाले से बताया कि काठमांडू में 14 लोगों की मौत हुई, जिनमें छह ट्रॉमा सेंटर, तीन सिविल अस्पताल, तीन एवरेस्ट अस्पताल, एक काठमांडू मेडिकल कॉलेज और एक त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग अस्पताल में थे। न्यूज पोर्टल खबरहब ने स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से पुष्टि की कि 'जेन जी' आंदोलन में 14 लोगों की मौत हुई।
42 लोग घायल
नेपाल पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि दो सुरक्षाकर्मियों समेत 42 लोग घायल हुए, जिनका इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा है। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि स्थिति नियंत्रित करने के लिए सेना तैनात की गई। हिंसा के बाद राजधानी के कई हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया गया, और यह प्रदर्शन अन्य शहरों में भी फैल गया।
कर्फ्यू और प्रतिबंध
काठमांडू जिला प्रशासन ने संसद भवन के आसपास अशांति रोकने के लिए दोपहर 12:30 से रात 10 बजे तक निषेधाज्ञा लागू की। मुख्य जिला अधिकारी छवि लाल रिजाल ने नोटिस में कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में आवागमन, प्रदर्शन, सभा या धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी। बाद में यह प्रतिबंध राष्ट्रपति भवन, उपराष्ट्रपति आवास और प्रधानमंत्री कार्यालय के आसपास भी लागू किया गया।
सोशल मीडिया प्रतिबंध का विवाद
नेपाल सरकार ने 4 सितंबर को अनिवार्य पंजीकरण नियम का पालन न करने पर फेसबुक, व्हाट्सएप और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार का कहना है कि यह प्रतिबंध नियमन के लिए है, लेकिन जनता इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला और सेंसरशिप मान रही है। रविवार को पीएम केपी शर्मा ओली ने कहा कि राष्ट्र को कमजोर करने के प्रयास बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
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