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यूक्रेन को एक और झटका, NATO गठबंधन ने अपना ही फैसला पलटा; क्यों लिया बड़ा यू-टर्न

रॉयटर्स के अनुसार, यूरोपीय नेता बदली भू-राजनीतिक परिस्थितियों में अब ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा प्रस्तावित सैनिकों को भेजने की चुनौतियों पर विचार कर रहे हैं, और उसे पलटने की योजना पर काम कर रहे हैं।

Thu, 27 March 2025 02:54 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान
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यूक्रेन को एक और झटका, NATO गठबंधन ने अपना ही फैसला पलटा; क्यों लिया बड़ा यू-टर्न

यूरोपीय देशों समेत NATO गठबंधन के सदस्य देश कथित तौर पर अपनी उस योजना से पीछे हट रहे हैं, जिसके तहत यूक्रेन को सैन्य मदद दी जाने की योजना बनाई गई थी। इससे पहले ऐसी खबरें थीं कि यूरोपीय देश शांति समझौता होने के स्थिति में यूक्रेन को भविष्य में रूसी आक्रमण से बचाने के लिए वहां सैनिकों की तैनाती करेंगे और सैन्य सहायता उपलब्ध कराएंगे लेकिन अब ये योजना खटाई में पड़ती दिख रही है। नाटो देशों के इस कदम से यूक्रेन को बड़ा झटका लगा है।

रॉयटर्स के अनुसार, यूरोपीय नेता बदली भू-राजनीतिक परिस्थितियों में अब ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा प्रस्तावित सैनिकों को भेजने की चुनौतियों पर विचार कर रहे हैं, और उसे पलटने की योजना पर काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यूरोपीय देश अब अपने प्रस्ताव से पीछे हट रहे हैं क्योंकि हाल के दिनों में ट्रम्प प्रशासन के तहत अमेरिका-रूस संबंधों में सुधार हुआ है और मॉस्को धीरे-धीरे वॉशिंगटन के करीब आ रहा है। दूसरी तरफ यूक्रेन युद्ध के मैदान में अब पीछे हटने लगा है और रूस आगे बढ़ता दिख रहा है।

यूरोपीय देशों का यू-टर्न क्यों?

रॉयटर्स से एक अनाम यूरोपीय राजनयिक ने कहा गया है कि यूरोपीय देश अपने कदम पीछे खींच रहे हैं और जो कुछ वे कर रहे थे या करने की कोशिशों में थे, उसे अब बदलने की कोशिश कर रहे हैं और यही फिलहाल समझदारी भरा कदम हो सकता है। एक अन्य राजनयिक ने न्यूज वीक को बताया, "जब यूक्रेन बेहतर स्थिति में था, तो सैनिकों को भेजने का विचार आकर्षक लग रहा था लेकिन अब, जमीनी स्तर पर और अमेरिकी प्रशासन के साथ यूक्रेन कमजोर हुआ है, इसलिए यूरोपीय देशों का प्लान अब बहुत आकर्षक नहीं रह गया है।

अधर में लटकी पेरिस योजना

बता दें कि इसी महीने 11 मार्च को फ्रांस की राजधानी पेरिस में 30 से अधिक देशों के सैन्य अधिकारियों की एक मीटिंग हुई थी। इसे पेरिस योजना कहा गया था, जिसमें एक अंतरराष्ट्रीय सेना बनाने पर चर्चा हुई थी। इस तरह की सेना का उद्देश्य यूक्रेन में युद्ध विराम लागू होने के बाद रूस को दूसरा आक्रमण करने से रोकना और हमले की स्थिति में बचाना था। इस बैठक में नाटो गठबंधन के लगभग सभी देशों के चीप ऑफ स्टाफ या उनके प्रतिनिधियों ने शिरकत की थी। हालांकि, अमेरिका को इसमें न्योता नहीं दिया गया था।

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अमेरिका-रूस में बेहतर हो रहे रिश्ते

दूसरी तरफ अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम लागू कराने की कोशिशों में जुटा था। बाद में यूक्रेन ने 30 दिनों के युद्धविराम पर सहमति जताई थी। हालांकि, रूसी राष्ट्रपति व्लोदिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले दिनों हुई टेलिफोनिक बातचीत में रूस ने आंशिक युद्धविराम पर सहमति जताई थी और यूक्रेन के ऊर्जा और अन्य बड़े ठिकानों पर हमले नहीं करने का वादा किया था। इसी हफ्ते यूक्रेन और रूस ने काला सागर में भी युद्धविराम पर सहमति जताई है। इस तरह पुतिन धीरे-धीरे अब अमेरिका संग रिश्ते सुधार रहे हैं। पुतिन ने कई तरह के प्रतिबंध हटाने की मांग अमेरिका से की है। इस पर ट्रंप ने भी सकारात्मक आश्वासन दिया है। यूरोपीय देशों को यही गठजोड़ खतरनाक लग रहा है, इसलिए अपने प्लान से पीछे हट रहे हैं।

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