इस देश में आतंकियों ने रक्षा मंत्री को मार डाला, भड़का भारत; रूस का खुला समर्थन
पश्चिम अफ्रीकी देश माली में बड़े आतंकी हमले में रक्षा मंत्री सादियो कैमारा की मौत। इसे तख्तापलट की कोशिश माना जा रहा है। रूसी सेना को लगा झटका और भारत ने जारी की एडवाइजरी। पूरी खबर पढ़ें।

पश्चिम अफ्रीकी देश माली में जिहादियों और विद्रोहियों के एक बड़े और सुनियोजित हमले में देश के रक्षा मंत्री जनरल सादियो कमारा की मौत हो गई। माली में हुआ आतंकी हमला केवल एक घटना नहीं है, बल्कि देश की सत्ता को उखाड़ फेंकने की एक सोची-समझी और खौफनाक साजिश है। इस भीषण हमले ने माली की सैन्य सरकार की जड़ों को हिला कर रख दिया है। विद्रोहियों ने कई शहरों और सैन्य अड्डों पर कब्जा भी कर लिया है। सैन्य शासन वाले देश में हिंसा की यह ताजा घटना है। माली लंबे समय से अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकवादियों के साथ-साथ उत्तरी हिस्से में अलगाववादी विद्रोह से जूझ रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
भारत ने मंगलवार को माली में हुए आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा की है। भारत ने इस घटना पर दुख जताते हुए माली की सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस घटना पर अपना रुख स्पष्ट किया। मंत्रालय ने कहा, 'भारत माली में कई स्थानों को निशाना बनाकर किए गए आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा करता है। हम पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और इस कठिन समय में माली की सरकार और लोगों के साथ खड़े हैं।'
भारत के बयान में विशेष रूप से रक्षा मंत्री के मारे जाने पर दुख जताते हुए कहा गया- हम आतंकी हमले में माली के रक्षा और पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री जनरल सादियो कैमारा के निधन पर अपनी सच्ची संवेदना व्यक्त करते हैं। भारत ने वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए कहा कि भारत "सभी रूपों और प्रकार के आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराता है" और क्षेत्र में शांति व स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रयासों का समर्थन करता है।
क्या है पूरी घटना? (रक्षा मंत्री की हत्या)
हमलावरों ने माली की राजधानी बामाको से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित काटी सैन्य बेस को अपना मुख्य निशाना बनाया। यह बेस माली की सत्ता का सबसे सुरक्षित और अहम केंद्र माना जाता है। आतंकियों ने एक आत्मघाती कार बम के जरिए रक्षा मंत्री सादियो कैमारा के आधिकारिक आवास को उड़ा दिया।
इस खौफनाक हमले में रक्षा मंत्री सादियो कैमारा की मौत हो गई। उनके साथ-साथ उनकी दूसरी पत्नी और दो पोते-पोतियों की भी इस धमाके में जान चली गई। यह हमला सिर्फ काटी तक सीमित नहीं था। आतंकियों ने बामाको के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, गाओ, किदाल और सेवरे सहित देशभर के कई अहम ठिकानों पर एक साथ धावा बोला।
हमलों की जिम्मेदारी किसने ली?
इस बड़े हमले के पीछे मुख्य रूप से दो गुटों का हाथ है, जिन्होंने माली की सरकार के खिलाफ हाथ मिला लिया है।
JNIM (जमात नुसरत अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमीन): यह अल-कायदा से जुड़ा एक कुख्यात आतंकी संगठन है। इसने काटी (बमाको के पास), शहर के हवाई अड्डे और उत्तरी व मध्य क्षेत्रों जैसे मोप्ती, सेवारे और गाओ में हुए हमलों की जिम्मेदारी ली है।
तुआरेग विद्रोही: रिपोर्टों के अनुसार, इन विद्रोही समूहों ने भी इन समन्वित हमलों में शामिल होने का दावा किया है।
क्या यह तख्तापलट की कोशिश है?
माली में 2020-21 से ही सेना का शासन है। रक्षा मंत्री सादियो कैमारा इस सैन्य सरकार के सबसे ताकतवर स्तंभों और रणनीतिकारों में से एक थे। जिस 'काटी सैन्य बेस' पर हमला हुआ, वहीं देश के अंतरिम राष्ट्रपति जनरल असिमी गोइता भी रहते हैं। हमले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति गोइता को तुरंत एक अज्ञात और सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। सीधे सत्ता के केंद्र (सैन्य मुख्यालय) पर हमला करने और रक्षा मंत्री को रास्ते से हटाने का सीधा मतलब यही निकाला जा रहा है कि विद्रोही मौजूदा सरकार का तख्तापलट कर सत्ता हथियाना चाहते हैं।
घातक आतंकी हमले के बाद सैन्य शासक ने रूसी राजदूत से की मुलाकात
माली के सैन्य शासक असिमी गोइता ने मंगलवार को पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आकर रूसी राजदूत से मुलाकात की। इस हमले को इस्लामी चरमपंथियों और अलगाववादियों ने अंजाम दिया था। माली के प्रमुख सहयोगी रूस ने इस हमले को 'तख्तापलट की कोशिश' करार दिया है। सैन्य नेता असिमी गोइता के कार्यालय ने कुछ तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें वे राजधानी बमाको के राष्ट्रपति भवन में इगोर ग्रोमिको के नेतृत्व वाले रूसी प्रतिनिधिमंडल से मिलते दिख रहे हैं। इस मुलाकात के बाद मंगलवार शाम को गोइता ने टेलीविजन पर देश को संबोधित किया। इन हमलों के बाद यह उनका पहला लाइव बयान था। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा: जब तक इन हथियारबंद गुटों को पूरी तरह से खत्म नहीं कर दिया जाता और देश भर में स्थायी सुरक्षा बहाल नहीं हो जाती, तब तक हमारे सैन्य अभियान जारी रहेंगे।
रूस का दावा: 'तख्तापलट की कोशिश नाकाम'
रूस के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले को 'तख्तापलट की कोशिश' बताया और दावा किया कि माली में मौजूद रूसी सेना (अफ्रीका कॉर्प्स) ने माली के सुरक्षा बलों के साथ मिलकर इसे नाकाम कर दिया। रूसी मंत्रालय ने कहा कि करीब 12,000 हमलावरों ने अत्याधुनिक हथियारों के साथ यह हमला किया था। जवाबी कार्रवाई में रूसी और माली की सेना ने लड़ाकू विमानों और सभी प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल किया। किडल से सेना की वापसी माली सरकार का फैसला था। वहां तैनात सैनिकों ने 24 घंटे से अधिक समय तक खुद से कहीं बड़ी दुश्मन सेना से घिरे होने के बावजूद कड़ा मुकाबला किया और चार बड़े हमलों को विफल किया।
माली का मौजूदा राजनीतिक संकट
यह भीषण हमला ऐसे समय में हुआ है जब माली एक गहरे राजनीतिक और सुरक्षा संकट से गुजर रहा है। वर्तमान में देश की सत्ता सैन्य शासक असिमी गोइता के हाथों में है, जिन्होंने 2021 में तख्तापलट करके सत्ता हथिया ली थी। गोइता ने सत्ता में आते समय इस संघर्षग्रस्त देश में सुरक्षा व्यवस्था सुधारने का वादा किया था, लेकिन ताजा हमलों ने देश की लगातार बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और अस्थिरता को उजागर कर दिया है।
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