Major Action in Nepal as Soon as Balen Shah Becomes PM Former Prime Minister KP Sharma Oli Arrested बालेन शाह के PM बनते ही नेपाल में बड़ा ऐक्शन, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली गिरफ्तार, International Hindi News - Hindustan
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बालेन शाह के PM बनते ही नेपाल में बड़ा ऐक्शन, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली गिरफ्तार

आपको बता दें कि इसी आंदोलन ने उनके नेपाल की सत्ता से बेदखल कर दिया था। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले ही रैपर से नेता बने बालेन शाह ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी।

Sat, 28 March 2026 08:10 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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बालेन शाह के PM बनते ही नेपाल में बड़ा ऐक्शन, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली गिरफ्तार

नेपाल की राजनीति में एक बड़ा और नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को शनिवार तड़के गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी सितंबर 2025 में हुए ‘Gen Z’ विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और कथित अत्यधिक बल प्रयोग से जुड़े आपराधिक मामले में की गई है। आपको बता दें कि इसी आंदोलन ने उनके नेपाल की सत्ता से बेदखल कर दिया था। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब एक ही दिन पहले रैपर से नेता बने बालेन शाह ने नेपाल के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है।

इस मामले में नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है। दोनों नेताओं को भक्तपुर स्थित उनके आवासों से गिरफ्तार किया गया और उन पर ऐसे प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किए जाने की संभावना है, जिनमें अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है।

जेन-जी क्रांति से बदली नेपाल की राजनीति

सितंबर 2025 में नेपाल में बड़े पैमाने पर युवाओं के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें ‘Gen Z क्रांति’ कहा गया। इन प्रदर्शनों की शुरुआत डिजिटल स्वतंत्रता की मांग से हुई थी, लेकिन जल्द ही यह भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, खराब शासन और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गया। उस समय देश की बागडोर केपी शर्मा ओली के हाथ में थी।

76 लोगों की हुई थी मौत

सरकार द्वारा इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए की गई सख्त कार्रवाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। हिंसा में कम से कम 76 लोगों की मौत हो गई और 2,000 से अधिक लोग घायल हुए। पहले ही दिन हुई गोलीबारी में कम से कम 19 प्रदर्शनकारियों की जान गई थी, जिससे जनाक्रोश और बढ़ गया और अंततः ओली को इस्तीफा देना पड़ा।

ओली के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश

इस पूरे मामले की जांच के लिए गठित एक उच्चस्तरीय आयोग ने अपनी रिपोर्ट में केपी शर्मा ओली के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी। आयोग ने कहा कि देश के कार्यकारी प्रमुख होने के नाते ओली को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि वे गोलीबारी को रोकने में विफल रहे।

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कार्यकारी प्रमुख के रूप में ओली को हर अच्छे और बुरे के लिए जिम्मेदार माना जाना चाहिए। आयोग ने केवल ओली ही नहीं, बल्कि तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग और कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है।

ओली ने इन आरोपों और आयोग की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे लापरवाहीपूर्ण, चरित्र हनन करने वाला और नफरत की राजनीति से प्रेरित बताया है। उनके अनुसार, यह रिपोर्ट राजनीतिक दुर्भावना से तैयार की गई है।

10 साल तक ही हो सकती है सजा

यदि आयोग की सिफारिशों के आधार पर मुकदमा चलता है और अदालत उन्हें दोषी ठहराती है, तो ओली, रमेश लेखक और अन्य संबंधित अधिकारियों को 10 साल तक की जेल हो सकती है।

राजनीतिक रूप से भी ओली के लिए यह समय कठिन रहा है। 5 मार्च को हुए आम चुनाव में उन्हें राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता बालेन शाह के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।

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