होर्मुज नाकेबंदी पर डोनाल्ड ट्रंप के दावे फुस्स, स्ट्रेट से गुजरते दिखे ईरान से जुड़े जहाज
शिप ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म केप्लर के अनुसार, कल से कम से कम 9 वाणिज्यिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं। इनमें रिच स्टारी नामक ऑयल टैंकर शामिल है, जिस पर अमेरिका ने 2023 से ईरान से संबंधों के कारण प्रतिबंध लगा रखा है।
अमेरिका की ओर से ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट से कई जहाज गुजरते दिख रहे हैं। यूएस सेंट्रल कमांड ने बताया कि ब्लॉकेड केवल ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले यातायात पर लागू होता है। दूसरे देशों के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत है। सेंटकॉम ने दावा किया कि ब्लॉकेड के पहले 24 घंटों में कोई जहाज नहीं गुजरा, लेकिन ट्रैकिंग डेटा इसके विपरीत संकेत दे रहे हैं।
शिप ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म केप्लर के अनुसार, कल से कम से कम 9 वाणिज्यिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं। इनमें रिच स्टारी नामक ऑयल टैंकर शामिल है, जिस पर अमेरिका ने 2023 से ईरान से संबंधों के कारण प्रतिबंध लगा रखा है। इसी तरह एल्पिस नामक एक और प्रतिबंधित ईरान-लिंक्ड टैंकर भी गुजरा। मरीनट्रैफिक के डेटा से पता चलता है कि लाइबेरिया-फ्लैग्ड बल्क कैरियर क्रिश्चियनना और मार्शल आइलैंड्स की कंपनी के स्वामित्व वाला टैंकर मुरलीकिशन भी आज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। मुरलीकिशन पर भी अमेरिका के ईरान प्रतिबंध कार्यक्रम के तहत पाबंदी है।
रिपोर्ट में क्या आया सामने
इसके अलावा, चीनी कंपनी के स्वामित्व वाला एक ऑयल टैंकर और एक लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) टैंकर भी गुजरते दिखे। क्रिश्चियनना ईरानी बंदरगाह बंदर इमाम खोमैनी से मकई उतारने के बाद निकला, जबकि अन्य जहाज ईरान के पास वाले रूट से गुजरे। हालांकि, सीएनएन समेत कई मीडिया संगठन इन यात्राओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाए हैं, क्योंकि शिपिंग डेटा में कभी-कभी सिग्नल गैप की समस्या होती है, जो ट्रैकिंग को प्रभावित कर सकती है।
संघर्ष शुरू होने से पहले हॉर्मुज स्ट्रेट से रोजाना 100 से अधिक जहाज गुजरते थे, जो विश्व के तेल निर्यात का 5वां हिस्सा ले जाते हैं। अब यातायात उसका 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है। नाकेबंदी के बावजूद कुछ ईरान-लिंक्ड जहाजों का गुजरना अमेरिकी ब्लॉकेड की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है, जबकि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर पड़ रहा है।
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