ईरान संकट के बीच सऊदी ने पाकिस्तान को याद दिलाया रक्षा समझौता, युद्ध में कूदेगी मुनीर सेना?
पाकिस्तान भले ही सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते में शामिल हो, लेकिन उसके लिए इस समय पर ईरान के खिलाफ जाना आसान नहीं है। शिया बहुल ईरान पर हमला करने से देश के अंदर सांप्रदायिक तनाव भड़क सकता है। पाकिस्तान में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी रहती है।

पश्चिम एशिया का संकट अब इस युद्ध में शामिल देशों के आगे भी बढ़ता जा रहा है। ईरान ने पलटवार कर सऊदी अरब समेत तमाम खाड़ी देशों को निशाना बनाया था। अब ऐसी स्थिति में सऊदी अरब मदद के लिए पाकिस्तान की ओर देख रहा है। वर्ष 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच में एक रक्षा समझौता हुआ था, जिसके तहत पाक या सऊदी अरब में से किसी भी एक देश पर हमला होता है, तो यह दोनों देशों के ऊपर हमला माना जाएगा। अब जबकि ईरान सऊदी अरब पर हमला कर रहा है, तो सऊदी अरब की तरफ से ऐसे संकेत सामने आए हैं कि वह इस्लामाबाद से इस मुद्दे पर कार्रवाई की उम्मीद करता है।
कनाडा टीवी पर प्रसारित एक इंटरव्यू में सऊदी सरकार के करीबी ने कहा कि उनके देश का पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता है, जो कि सऊदी अरब को परमाणु शक्ति की सहायता उपलब्ध कराता है। सऊदी अरब में कुछ परेशानी आती है, तो पाकिस्तान मदद के लिए आएगा और पाकिस्तान में कुछ गड़बड़ होती है तो सऊदी अरब मदद के लिए जाएगा। अब जबकि सऊदी के ऊपर ईरान लगातार हमला कर रहा है, तेल व्यापार का मुख्य रास्ता होर्मुज बंद है, तो सऊदी अरब ऐसी उम्मीद कर सकता है कि पाकिस्तान या तो ईरान के खिलाफ उसकी मदद करने के लिए आए या फिर होर्मुज को खोलने में सहायता करे। हालांकि, पाकिस्तान की तरफ से अभी तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं की गई है। आसिम मुनीर की तरफ से जरूर एक बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने सऊदी अरब की रक्षा की बात कही थी।
दरअसल, ईरान के हमले झेल रहे सऊदी अरब को पाकिस्तान की सेना पर भरोसा है। क्योंकि पाकिस्तान की सेना को युद्ध का लंबा अनुभव है। इसके अलावा आसिम मुनीर की सुन्नी बहुल भावना भी उनकी मदद करने का काम करती है। पाक सेना ने यमन में भी एक लंबा अभियान चलाया था। ईरान की शिया बहुल सरकार के खिलाफ सऊदी अरब की सत्ता लगातार अपनी भावना दिखाता रहा है। कई रिपोर्ट्स में तो यह दावा तक किया गया है कि ईरान पर हमला करने के लिए सऊदी क्राउन प्रिंस ने ही ट्रंप को मनाया था।
पाकिस्तान के आसान नहीं सऊदी अरब की मदद करना
पाकिस्तान भले ही सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते में शामिल हो, लेकिन उसके लिए इस समय पर ईरान के खिलाफ जाना आसान नहीं है। शिया बहुल ईरान पर हमला करने से देश के अंदर सांप्रदायिक तनाव भड़क सकता है। पाकिस्तान में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी (लगभग 3 से 5 करोड़) रहती है। आसिम मुनीर द्वारा हाल में एक बंद कमरे की बैठक में शिया नेताओं से कहे गए शब्द भी फिलहाल पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा मुद्दा बने हुए हैं।
मुश्किल है पाकिस्तान की स्थिति
युद्ध से पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था और बिगड़ सकती है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, खाड़ी देशों से आने वाले रेमिटेंस में कमी, और पहले से ही दबाव में चल रही वित्तीय व ऊर्जा स्थिति संकट को और गहरा कर सकती है। इसके अलावा अगर वह सऊदी अरब की मदद करने के लिए जाता है, तो वह अमेरिका और इजरायल के साथ खड़ा दिखाई देगा, जो उसके मुस्लिम उम्मा के लक्ष्य के लिए बड़ी बाधा साबित होगा।
इसके अलावा पाकिस्तान और ईरान के बीच में लगभग 900 किलोमीटर लंबी सीमा है। अगर पाकिस्तान ईरान पर कोई कार्रवाई करता है, तो फिर ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की जाएगी, जो कि पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी साबित होगी। इस्लाबाद पहले ही भारत के साथ दबाव और अफगानिस्तान के साथ युद्ध, बलूच विद्रोह, टीटीपी विद्रोह को झेल रहा है। ऐसे में नया युद्ध उसकी सेना पर कई मोर्चों का दबाव डाल सकता है।
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान पूर्ण पैमाने पर हमला करने या ईरान में जमीनी सैनिक भेजने की संभावना कम है। हालांकि, वह हवाई मदद और होर्मुज खोलने के लिए सामने आ सकता है, लेकिन सीधी कार्रवाई की संभावना कम है। इस्लामाबाद के हालिया बयान संतुलन बनाए रखने की कोशिश माने जा रहे हैं, न कि युद्ध में उतरने का संकेत। अब तक पाकिस्तान ने अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष में आधिकारिक तटस्थता बनाए रखी है और सभी पक्षों के हमलों की निंदा करते हुए कूटनीति और सीमा पर स्थिरता पर जोर दिया है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन