ईरान युद्ध के बीच मोसाद चीफ से नाराज हैं नेतन्याहू, एक वजह से बिगड़ी बात
ईरान युद्ध के बीच में इजरायल के प्रधानमंत्री खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख से नाराज चल रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक मोसाद चीफ ने युद्ध के पहले दावा किया था कि ईरान की सत्ता को कमजोर करके वहां पर जन विद्रोह को भड़काया जा सकता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है।

Iran war latest update: पश्चिम एशिया की जंग लगातार उलझती जा रही है। कुछ दिनों में ईरान की सत्ता परिवर्तन का सपना देखकर युद्ध में कूदे इजरायल और अमेरिका अब मदद के लिए दूसरे देशों की तरफ देख रहे हैं। इसी बीच दावा किया जा रहा है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख से नाराज चल रहे हैं। दरअसल, युद्ध शुरू करने से पहले मोसाद चीफ ने नेतन्याहू को एक रिपोर्ट दी थी कि अगर ईरान की सत्ता को कमजोर कर दिया जाता है, तो वहां दंगा भड़काकर इस्लामिक सत्ता को पलटा जा सकता है। लेकिन अब तीन हफ्ते बाद भी ऐसा संभव नहीं हो पाया है।
इजरायल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मोसाद की तरफ से रखी गई इस रिपोर्ट के आधार पर ही नेतन्याहू ने अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मिलकर ईरान पर हमला करने की योजना तैयार की थी। दोनों राष्ट्राध्यक्षों को यह रिपोर्ट इसलिए भी सही लगी थी क्योंकि उस समय तक ईरान में खामेनेई के खिलाफ बड़े आंदोलन हो चुके थे।
इजरायली अखबार के मुताबिक, मोसाद की तरफ से इस रिपोर्ट को लेकर खुद मोसाद चीफ डेविड बार्निया नेतन्याहू के पास पहुंचे थे, इसमें दावा किया गया था कि ईरान के शीर्ष नेताओं को खत्म करने के बाद एजेंसी दंगों और विरोध प्रदर्शनों को भड़काकर बड़े पैमाने पर अस्थिरता पैदा कर सकती है। यह योजना व्हाइट हाउस को भी बताई गई थी। पिछले सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक सीआईए ने भी इस रिपोर्ट पर अपनी सहमति दी थी।
इसके बाद भी 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया। रिपोर्ट के आधार पर ही राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले ही भाषण में ईरान की जनता को संबोधित करते हुए कानून को अपने हाथ में लेकर सड़कों पर उतरने का आह्वान किया, नेतन्याहू ने भी ईरान की जनता को इस्लामिक सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए कहा। हालांकि, बड़े हमलों के बाद भी ईरान में कोई आंदोलन नहीं हुआ।
अब अमेरिकी और इजरायली अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं, कि सत्ता परिवर्तन करना इतना आसान नहीं है। दोनों देश ईरान के कमजोर होने की संभावना पर चल रहे थे, लेकिन वह और मजबूत होकर सामने आया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के भीतर अलग-अलग धार्मिक गुटों में टकराव हो सकता है, लेकिन उससे लोकतांत्रिक सरकार बनने की संभावना बहुत कम है। साथ ही, कुर्द मिलिशिया के सहयोग से सरकार गिराने की उम्मीद भी पूरी नहीं हुई।
अब, जबकि तीन हफ्ते बाद भी ऐसा कोई बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं हुआ है और ईरान पलटकर इजरायल पर हमला कर रहा है, तो प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपने खुफिया प्रमुख से नाराज बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध की शुरुआत में हुई एक बैठक में उन्होंने शिकायत की थी कि योजना काम नहीं कर रही और ट्रंप कभी भी अभियान रोक सकते हैं। मोसाद के पूर्व प्रमुख योसी कोहेन का मानना था कि ईरान में शासन परिवर्तन मुश्किल है, इसलिए उन्होंने इस दिशा में कम ध्यान दिया और प्रतिबंधों व परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाने जैसी रणनीतियों पर ज्यादा फोकस किया।
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