Iran US stalled talks putin supports araghchi gulf tensions महाशक्ति के सामने घुटने नहीं टेके, भीख मांग रहा अमेरिका; पुतिन से मिलकर बोले ईरानी विदेश मंत्री, International Hindi News - Hindustan
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महाशक्ति के सामने घुटने नहीं टेके, भीख मांग रहा अमेरिका; पुतिन से मिलकर बोले ईरानी विदेश मंत्री

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान को पूर्ण समर्थन का वादा किया है, जबकि अमेरिका-ईरान शांति वार्ता फिलहाल रुकी हुई है। जानें हॉर्मुज विवाद, ट्रंप का रुख और खाड़ी देशों पर इस कूटनीतिक तनाव का क्या असर पड़ रहा है।

Tue, 28 April 2026 06:52 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, मॉस्को
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महाशक्ति के सामने घुटने नहीं टेके, भीख मांग रहा अमेरिका; पुतिन से मिलकर बोले ईरानी विदेश मंत्री

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मॉस्को में मुलाकात की। इस बैठक में रूस ने एक बार फिर अपने पुराने सहयोगी ईरान को पूर्ण समर्थन देने का भरोसा दिया। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत ठप पड़ी है और क्षेत्रीय तनाव बना हुआ है। पुतिन ने कहा कि रूस शांति स्थापित करने के लिए वह सब कुछ करेगा जो ईरान के हितों में हो। दोनों नेताओं ने अपने देशों के बीच रणनीतिक संबंधों के प्रति प्रतिबद्धता भी जताई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में पूरी तरह विफल रहा है और अब डोनाल्ड ट्रंप बातचीत के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। अराघची ने मुलाकात के बाद अपनी भाषा और तेवर पूरी तरह बदल दिए। उन्होंने रूस को दुनिया की महाशक्ति करार दिया और कहा कि रूस ईरान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने ट्रंप के उस दावे पर भी पलटवार किया जिसमें ट्रंप ने ईरान पर बातचीत की भीख मांगने का आरोप लगाया था। अराघची ने तंज कसते हुए कहा कि असल में ट्रंप ही गिड़गिड़ा रहे हैं।

अमेरिका के साथ वार्ता पर ईरान का रुख

अराघची इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता के मुख्य वार्ताकार रहे हैं। यह बातचीत फिलहाल असफल रही। अराघची ने रूसी मीडिया को बताया कि अमेरिका ने बातचीत का अनुरोध किया है और ईरान फिलहाल उस अनुरोध पर विचार कर रहा है। अराघची ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान ने दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति (अमेरिका) का डटकर सामना किया है और अमेरिका अपने किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाया। उन्होंने दावा किया कि यही कारण है कि अमेरिका अब बातचीत की भीख मांग रहा है। अराघची ने पिछली शांति वार्ता की विफलता का सीधा दोष डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की अत्यधिक और अनुचित मांगों पर मढ़ा।

ट्रंप का कदम और बैक-चैनल कूटनीति

इस्लामाबाद में बातचीत की उम्मीदें तब टूट गईं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों- स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का दौरा रद्द कर दिया। दौरा रद्द करने के बाद ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा कि अगर ईरान बात करना चाहता है, तो वे हमें फोन कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दौरा रद्द होने का मतलब युद्ध की वापसी या वर्तमान युद्धविराम का खत्म होना नहीं है। ट्रंप इस मुद्दे पर अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ बैठक करने वाले थे।

'फार्स' समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को लिखित संदेश भेजे हैं, जिसमें उसने परमाणु मुद्दों और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को लेकर अपनी 'रेड लाइन्स' (अंतिम शर्तें) स्पष्ट कर दी हैं। अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस के अनुसार, ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए एक नया प्रस्ताव भेजा है। इसका मुख्य बिंदु हॉर्मुज को फिर से खोलना और वहां से अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना है। इस प्रस्ताव में परमाणु वार्ता को फिलहाल टालने की बात कही गई है।

कूटनीतिक दौरे और मध्यस्थता

अराघची इस समय एक व्यापक कूटनीतिक दौरे पर हैं। रूस पहुंचने से पहले उन्होंने मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान का दो बार और इसके बीच में ओमान का दौरा भी किया था। पाकिस्तान ने ही अमेरिका और ईरान के बीच पहले और एकमात्र (जो असफल रहा) दौर की वार्ता की मेजबानी की थी।

खाड़ी देशों पर प्रभाव और यूएई की तीखी प्रतिक्रिया

हालांकि युद्धविराम अभी भी कायम है, लेकिन युद्ध के आर्थिक झटके पूरी दुनिया और विशेषकर खाड़ी देशों में महसूस किए जा रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से खाड़ी देश भारी नुकसान उठा रहे हैं। युद्ध के दौरान ईरानी ड्रोनों और मिसाइलों के हमलों ने इन देशों के हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया था और उनके महत्वपूर्ण तेल तथा गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचाया था।

यूएई की आलोचना

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक वरिष्ठ अधिकारी और राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गर्गश ने अपने पड़ोसी खाड़ी देशों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ईरान के प्रति खाड़ी देशों का रुख बहुत कमज़ोर रहा है। उनके अनुसार, ईरान को लेकर अब तक अपनाई गई 'रोकथाम की नीति' "बुरी तरह विफल" रही है और अब इस पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

लेबनान के मोर्चे पर अशांति

रिपोर्ट के अंत में बताया गया है कि जहां एक तरफ शांति वार्ता के प्रयास हो रहे हैं, वहीं लेबनान के मोर्चे पर इजराइल और ईरान-समर्थित 'हिजबुल्लाह' के बीच हाल ही में बढ़ाए गए युद्धविराम के बावजूद हिंसा जारी है।

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