IRIS Dena से ईरानी नौसैनिक का पिता को आखिरी कॉल, कहा- US दे रहा डुबोने की चेतावनी
ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर अमेरिकी हमले से पहले एक ईरानी नौसैनिक ने अपने पिता को फोन करके इसकी जानकारी दी थी। उसने कहा कि अमेरिकी नेवी दो बार जहाज को डुबोने की चेतावनी दे चुकी है, वह बार-बार क्रू सदस्यों को जहाज से दूर हो जाने के लिए कह रही है।

अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर लगातार हमला कर रहे हैं। इसी बीच कुछ दिन पहले यूएस नेवी द्वारा डुबोए गए ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक डेना पर तैनात एक ईरानी नौसैनिक ने हमले से ठीक पहले अपने पिता को फोन करके बताया था कि यूएस नेवी जहाज को डुबोने की चेतावनी दे रही है, अभी तक दो बार चेतावनी मिल चुकी है। वह लगातार नाविकों को जहाज छोड़ने और अपनी जान बचाने के लिए कह रहे हैं।
अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो से किए गए हमले में जहाज के साथ डूबे नौसैनिक के परिवार ने बताया कि चेतावनी मिलने के बाद भी जहाज के कमांडर ने क्रू को जहाज खाली करने का आदेश देने से इनकार कर दिया। क्रू के कुछ सदस्य लगातार कमांडर से इस चेतावनी को गंभीरता से लेने के लिए कहते रहे, लेकिन कमांडर अपने आदेश पर अडिग रहे। दोनों के बीच हुए इस टकराव के गंभीर परिणाम हुए और अमेरिकी नेवी ने जहाज पर क्रू सदस्यों की मौजूदगी के बीच ही हमला कर दिया। सूत्रों के मुताबिक कई नाविकों ने कमांडर के आदेश की अवहेलना करते हुए लाइफबोट के साथ समंदर में छलांग लगा दी। इस हमले के पहले अपने पिता को फोन करके इसकी जानकारी देने वाले इस नौसैनिक की भी इस हमले में जान चली गई है।
गौरतलब है कि 4 मार्च तड़के अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका की सीमा से कुछ मील दूर अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में मौजूद ईरान जहाज पर हमला बोल दिया था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार था, जब एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो का प्रयोग कर दुश्मन के जहाज को निशाना बनाया था। हमले के समय जहाज में 180 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें से अब तक 87 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है।
मदद के लिए आए श्रीलंका और भारत
टॉरपीडो से हमला होने के बाद ईरानी जहाज से मदद के लिए इमरजेंसी संदेश भेजा। श्रीलंका पास होने की वजह से श्रीलंकाई नेवी ने इस संदेश पर प्रतिक्रिया दी और तुरंत ही बचाव और राहत मिशन शुरू कर दिया। श्रीलंकाई नेवी के मुताबिक घटनास्थल पर उन्हें जहाज को कोई नामोनिशान नहीं मिला, केवल एक बड़ा तेल का धब्बा और पानी में तैरते नाविक दिखाई दिए। इसके बाद श्रीलंकाई नेवी ने उन्हें बचाया और किनारे पर लेकर आई, भारतीय नौसेना के जहाज भी वहां पहुंचे और उन्होंने तेजी के काम पूरा करने में मदद की।
हेगशेथ ने बताया 'क्विक डेथ'
इस हमले की पुष्टि अमेरिका के रक्षामंत्री पीट हेगसेथ ने की। उन्होंने बताया कि यूएसएस शार्लेट नामक अमेरिकी पनडुब्बी ने मार्क-48 टॉरपीडो के हमले से ईरानी जहाज को डुबा दिया। हेगसेथ ने इस हमले को 'क्विक डेथ' करार दिया, उन्होंने कहा कि इस हमले के कुछ ही मिनट बाद पूरा जहाज पानी में समा गया।
गौरतलब है कि यह जहाज विशाखापट्टनम में फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के लिए आया था। युद्ध में हिस्सा लेने के लिए वापस ईरान की तरफ लौटते समय, अमेरिकी पनडुब्बी ने इस पर हमला कर दिया। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह जहाज ईरान के तट से लगभग 3000 किलोमीटर दूर डुबोया गया है। अमेरिका ने इस युद्ध को पूरे क्षेत्र में फैला दिया है। उन्होंने इस जहाज को भारत का मेहमान करार देते हुए कहा कि अमेरिका को इसकी कीमत चुकानी होगी।
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