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ईरान ने पाकिस्तान को फिर सिखाया सबक! ISI के मोहरों की पूरी टीम को खत्म कर दिया

ईरान के रास्क इलाके में घुसे पाकिस्तान समर्थित 'जैश अल-अदल' के आतंकियों को ईरानी सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। यह वही ISI समर्थित गुट है जिसने कुलभूषण जाधव का अपहरण किया था। पढ़ें ईरान-पाकिस्तान सीमा विवाद की पूरी खबर।

Thu, 23 April 2026 11:52 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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ईरान ने पाकिस्तान को फिर सिखाया सबक! ISI के मोहरों की पूरी टीम को खत्म कर दिया

ईरानी सुरक्षा बलों ने सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के रास्क क्षेत्र में 'जैश अल-अदल' की एक ऑपरेशनल टीम को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। ये आतंकवादी पाकिस्तान की सीमा पार करके ईरान में घुसे थे। इस सैन्य कार्रवाई में कई आतंकवादी मारे गए हैं। बता दें कि ईरान इस आतंकी गुट को 'जैश अल-जुल्म' के नाम से बुलाता है। इस घटना ने एक बार फिर ईरान और पाकिस्तान के बीच चल रहे सीमा विवाद और आतंकी गुटों को लेकर तनाव को सतह पर ला दिया है।

जैश अल-अदल और पाकिस्तान की ISI का कनेक्शन

ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादियों का यह गुट पाकिस्तान की सीमा पार करके ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के रास्क इलाके में घुसपैठ कर रहा था। ईरानी इंटेलिजेंस और सुरक्षा बलों ने समय रहते इस घुसपैठ को भांप लिया और आतंकियों पर धावा बोल दिया, जिसमें कई आतंकी मौके पर ही ढेर हो गए। ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) का लंबे समय से यह आरोप रहा है कि जैश अल-अदल एक स्वतंत्र आतंकी गुट नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की एक शाखा या मोहरे के रूप में काम करता है।

जैश अल-जुल्म कौन है?

यह एक सुन्नी चरमपंथी गुट है जिसे अक्सर 'जैश अल-अद्ल' के नाम से भी जाना जाता है। ईरान इस गुट को आतंकवादी संगठन मानता है, क्योंकि यह समूह अक्सर दक्षिण-पूर्वी ईरान में ईरानी सैनिकों और नागरिकों पर हमले करता रहता है।

कुलभूषण जाधव का मामला

साल 2016 में इसी आतंकी संगठन (जैश अल-अदल) ने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव का ईरान के सरबाज इलाके से अपहरण कर लिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपहरण के बाद जैश अल-अदल ने जाधव को पाकिस्तान की ISI को सौंप दिया था। कुलभूषण जाधव आज भी पाकिस्तान की जेल में बंद हैं।

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कूटनीतिक पेंच: ईरान-अमेरिका के बीच पाकिस्तान की भूमिका

यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कूटनीतिक स्तर पर एक बेहद दिलचस्प और विरोधाभासी स्थिति बनी हुई है। दरअसल पाकिस्तान वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी कूटनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। वह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने का प्रयास कर रहा है ताकि दोनों देशों के बीच चल रहे लंबे तनाव को कम किया जा सके। पाकिस्तान खुद को क्षेत्र में एक 'शांतिदूत' के रूप में स्थापित करना चाहता है। यहीं पर सबसे बड़ा विरोधाभास पैदा होता है। एक तरफ इस्लामाबाद, तेहरान (ईरान) और वॉशिंगटन (अमेरिका) के बीच शांति वार्ता कराने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसकी अपनी धरती का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए हो रहा है।

रास्क क्षेत्र में हुई यह मुठभेड़ ईरान की तरफ से पाकिस्तान को एक परोक्ष संदेश भी है। ईरान लंबे समय से पाकिस्तान पर यह आरोप लगाता रहा है कि वह अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने और बलूच/सुन्नी चरमपंथियों को पनाह देने से रोकने में नाकाम रहा है। इस घटना से यह साफ हो जाता है कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है और मध्यस्थता की मेज पर बैठने से पहले वह पाकिस्तान से अपनी सरजमीं से पनपने वाले आतंकवाद पर लगाम लगाने की उम्मीद करता है।

ईरान और पाकिस्तान के बीच क्या है मुख्य विवाद?

ईरान और पाकिस्तान एक लंबी सीमा शेयर करते हैं और दोनों ही देश एक-दूसरे पर सीमा पार आतंकवाद और दखलअंदाजी का आरोप लगाते रहते हैं। ईरान का कहना है कि जैश अल-अदल पिछले एक दशक से ईरान के अंदर हिंसक और आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। ईरान के मुताबिक, पाकिस्तान अपने बलूचिस्तान प्रांत के सीमावर्ती इलाकों में इन आतंकियों को पनाह मुहैया कराता है।

दूसरी तरफ, पाकिस्तान भी पलटवार करते हुए ईरान पर आरोप लगाता है कि ईरान अपने यहां 'बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी' (BLA) और 'बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट' (BLF) जैसे बलूच राष्ट्रवादी-अलगाववादी गुटों को शरण देता है, जो पाकिस्तान में हमले करते हैं।

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जब 2024 में ईरान ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर की थी एयरस्ट्राइक

जैश अल-अदल के खिलाफ ईरान का गुस्सा कोई नया नहीं है। जनवरी 2024 में यह तनाव तब अपने चरम पर पहुंच गया था जब ईरान ने सीधे तौर पर पाकिस्तान की संप्रभुता को चुनौती देते हुए उसके अंदर घुसकर एयरस्ट्राइक कर दी थी। ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के पंजगूर इलाके में जैश अल-अदल के ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन से भीषण हमले किए थे। ईरान का दावा था कि उसने आतंकियों के दो प्रमुख अड्डों को तबाह कर दिया है। इस हमले के बाद पाकिस्तान ने कड़ी आपत्ति जताई, ईरान से अपने राजदूत को वापस बुला लिया और ईरानी राजदूत को पाकिस्तान आने से रोक दिया।

ईरान के हमले के ठीक 48 घंटे बाद, पाकिस्तान की वायुसेना ने भी ऑपरेशन मार्ग बार सरमाचार के तहत ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में घुसकर एयरस्ट्राइक की। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने ईरान में पनाह लिए हुए बलूच अलगाववादियों (BLA और BLF) के ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि, बाद में दोनों देशों ने कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस तनाव को कम करने की कोशिश की, लेकिन ताजा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच सीमा पर सक्रिय आतंकी गुटों को लेकर अभी भी अविश्वास और संघर्ष की स्थिति बरकरार है।

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