Iran is unable to open Strait of Hormuz having laid mines forgotten their location चाहकर भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोल पा रहा ईरान? बारूदी सुरंगें बिछाकर खुद भूल गया लोकेशन, International Hindi News - Hindustan
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चाहकर भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोल पा रहा ईरान? बारूदी सुरंगें बिछाकर खुद भूल गया लोकेशन

इस्लामाबाद में चल रही उच्च-स्तरीय वार्ता में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस आमने-सामने हैं। इस हफ्ते अराघची ने कहा था कि जलमार्ग को तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए खोला जाएगा।

Sat, 11 April 2026 11:11 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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चाहकर भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोल पा रहा ईरान? बारूदी सुरंगें बिछाकर खुद भूल गया लोकेशन

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का आयोजन किया जा रहा है। इससे ठीक पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ईरान को लेकर नए खुलासे हुए हैं। ये खुलासे भारत सहित दुनिया के उन देशों की चिंता बढ़ा सकता है, जिनके तेल टैंकरों से लदे जहाज इस समुद्री मार्ग से निकलते हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से न खोल पाने के पीछे ईरान की कोई कूटनीतिक चाल नहीं, बल्कि एक गंभीर तकनीकी दिक्कत है।

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से अखबार ने कहा है कि पिछले महीने युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने आनन-फानन में छोटी नावों के जरिए होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाई थीं। ईरान ने इन सुरंगों को बिछाते समय उनका सटीक रिकॉर्ड नहीं रखा। कई सुरंगें ऐसी तकनीक से बिछाई गईं जो समुद्री धाराओं के साथ अपना स्थान बदल लेती हैं। इसका मतलब है कि जो रास्ता कल सुरक्षित था, वह आज घातक हो सकता है। ईरान के पास इन सुरंगों को खोजने और सुरक्षित रूप से हटाने के लिए आवश्यक आधुनिक तकनीक और जहाजों की कमी है।

इस्लामाबाद में चल रही उच्च-स्तरीय वार्ता में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस आमने-सामने हैं। इस हफ्ते अराघची ने कहा था कि जलमार्ग को तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए खोला जाएगा। अब स्पष्ट हो गया है कि यह तकनीकी सीमा दरअसल वे बारूदी सुरंगें हैं जिनका पता खुद ईरान को भी नहीं है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने शर्त रखी है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल होगी। हालांकि, ईरान चाहकर भी इस मांग को तुरंत पूरा करने की स्थिति में नहीं है।

ईरान ने पूरे जलमार्ग को बंद नहीं किया है, बल्कि एक बेहद संकरा रास्ता खुला रखा है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने सुरक्षित मार्गों के चार्ट प्रकाशित किए हैं, लेकिन ये मार्ग बहुत संकरे हैं और इनके चारों ओर अनचाहे खतरों का अंबार है। इस संकरे रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से ईरान टोल वसूल रहा है। माइनफील्ड का यह डर ईरान को सौदेबाजी की मेज पर एक बार्गेनिंग चिप दे रहा है, क्योंकि जब तक सुरंगें साफ नहीं होतीं, वैश्विक ऊर्जा कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी।

भारत की भी बढ़ेगी चिंता

दुनिया के कुल तेल और एलएनजी (LNG) व्यापार का 20% इसी मार्ग से गुजरता है। भारत के लिए यह खबर चिंताजनक है क्योंकि 8 अप्रैल के युद्धविराम के बाद उम्मीद थी कि कतर और अन्य देशों से आपूर्ति बहाल होगी। लेकिन माइनफील्ड के कारण टैंकरों को भेजने में शिपिंग कंपनियां और बीमा कंपनियां हिचकिचाएंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी अपनी माइन-स्वीपिंग तकनीक का उपयोग भी करें, तो भी पूरे जलमार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने में हफ्तों या महीनों का समय लग सकता है।

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