युद्ध का हर्जाना तुम भरो, ईरान ने 5 मुस्लिम देशों के सामने रख दी मांग; बड़ा इल्जाम भी लगाया
ईरान के सेंट्रल बैंक ने एक अनुमान जारी किया है, जिसके मुताबिक युद्ध से बुरी तरह प्रभावित अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने में ईरान को 12 साल से ज्यादा का समय लग सकता है।
अमेरिका के साथ हालिया युद्ध के बाद ईरान अपने पड़ोसियों पर भड़क उठा है। इस्लामाबाद में हुई बातचीत फेल होने के बाद अब ईरान ने अपने पांच मुस्लिम देशों, बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और जॉर्डन पर बड़े आरोप लगाते हुए युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा है कि युद्ध में इन देशों ने अमेरिका और इजरायल की मदद की है और इसीलिए अब हर्जाना भी यही देश भरेंगे।
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इरावानी ने कहा कि इन खाड़ी देशों ने अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की इजाजत देकर हमलों को संभव बनाया। उनके मुताबिक, ऐसा करके इन देशों ने ईरान की संपत्ति की बर्बादी में योगदान दिया और अब उन्हें पुनर्निर्माण का खर्च उठाना होगा।
ईरान की तरफ से यह मांग ऐसे समय आई है जब इस्लामाबाद में हुई अहम बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। रविवार को ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद घालीबाफ और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हुई बातचीत 1979 के बाद दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तर की सीधी बातचीत हुई थी। हालांकि परमाणु हथियार और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण जैसे बड़े विवाद सुलझ नहीं पाए और बातचीत बेनतीजा रही।
मुआवजे के बिना कोई समझौता नहीं
इससे पहले ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने साफ कहा है कि मुआवजे की मांग पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ईरान के लोगों को हुए नुकसान की भरपाई उनका अधिकार है और जिन्होंने इस युद्ध को बढ़ावा दिया, वे इसकी कीमत से बच नहीं सकते। इस मामले पर फिलहाल खाड़ी देशों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ईरान को कितना हुआ है नुकसान?
इस बीच ईरान के सेंट्रल बैंक ने आकलन जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि युद्ध से बुरी तरह प्रभावित अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने में 12 साल से ज्यादा का समय लग सकता है। इसमें तेल रिफाइनरी और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए भारी नुकसान को मुख्य वजह बताया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि औद्योगिक इनपुट सप्लाई की कमी इसी तरह बनी रही तो महंगाई में 180 फीसदी तक बढ़ सकती है।
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