Iran become oil superpower India is rapidly moving closer to Tehran US expert warns world ईरान बन चुका है तेल महाशक्ति, भारत तेजी से तेहरान के करीब; अमेरिकी एक्सपर्ट ने दुनिया को चेताया, International Hindi News - Hindustan
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ईरान बन चुका है तेल महाशक्ति, भारत तेजी से तेहरान के करीब; अमेरिकी एक्सपर्ट ने दुनिया को चेताया

अमेरिकी एक्सपर्ट रॉबर्ट पेप ने कहा कि 29 दिनों के संघर्ष के बाद ईरान युद्ध से पहले की तुलना में अधिक खतरनाक और शक्तिशाली हो गया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि वास्तव में ईरान अब एक तेल महाशक्ति बन चुका है जो दुनिया के 20 प्रतिशत तेल को नियंत्रित करता है, जो किसी भी अन्य देश से अधिक है।

Mon, 30 March 2026 08:11 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान बन चुका है तेल महाशक्ति, भारत तेजी से तेहरान के करीब; अमेरिकी एक्सपर्ट ने दुनिया को चेताया

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही है। इस बीच प्रसिद्ध अमेरिकी पॉलिटिकल एक्सपर्ट और लेखक रॉबर्ट पेप ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक चलने वाले इस संघर्ष से उत्पन्न कमी भारत समेत वैश्विक दक्षिण के कई अन्य देशों को काफी नाटकीय रूप से प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली अपने ऊर्जा हितों की सुरक्षा के लिए धीरे-धीरे तेहरान के साथ जुड़ रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए शिकागो विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान प्रोफेसर रॉबर्ट पेप ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान पर जमीनी आक्रमण शुरू करने की 70 प्रतिशत संभावना है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे तेल की कीमतें बढ़ेंगी और आपूर्ति पर दबाव पड़ेगा, खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ेंगी। अमीर देश इन बढ़ी हुई कीमतों का भुगतान कर लेंगे, लेकिन गरीब देशों को न केवल अधिक कीमतें चुकानी पड़ेंगी बल्कि वास्तविक कमी का भी सामना करना पड़ेगा।

तेल महाशक्ति बन चुका है ईरान

रॉबर्ट पेप ने होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण का जिक्र करते हुए कहा कि 29 दिनों के संघर्ष के बाद ईरान युद्ध से पहले की तुलना में अधिक खतरनाक और शक्तिशाली हो गया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि वास्तव में ईरान अब एक तेल महाशक्ति बन चुका है जो दुनिया के 20 प्रतिशत तेल को नियंत्रित करता है, जो किसी भी अन्य देश से अधिक है। यह एक महीने पहले वाला ईरान नहीं है। पेप ने कहा कि हम अभी भी उस मानसिकता में जी रहे हैं कि अमेरिका के पास सारी शक्ति है और हम युद्ध में प्रभुत्व रखते हैं, जबकि ईरान एक छोटी सी चीज है। लेकिन ईरान को यह बात समझ नहीं आ रही कि वह हार रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान द्वारा अपने प्रभाव का इस्तेमाल अभी चरम सीमा तक नहीं पहुंचा है, बल्कि इसकी शुरुआत मात्र हुई है। पेप ने कहा कि तेल और उर्वरक के क्षेत्र में इसका प्रभाव अभी शुरू ही हुआ है।

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बुरी तरह प्राभावित होगा भारत

प्रोफेसर पेप ने कहा कि अगले कुछ महीनों में लगभग ढाई अरब लोगों को ईंधन की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है। यह ईंधन केवल वाहनों के लिए नहीं, बल्कि खाना पकाने और भोजन बनाने के लिए भी इस्तेमाल होता है। भोजन और उर्वरक की कमी का सबसे ज्यादा असर सबसे गरीब देशों पर पड़ेगा। हमने अभी इसके वास्तविक आर्थिक प्रभावों को देखना भी शुरू नहीं किया है। उन्होंने आगे कहा कि इससे भारत भी बुरी तरह प्रभावित होगा। भारत के लिए आपूर्ति लगभग न के बराबर हो सकती है, जबकि अमेरिका में आपूर्ति की कमी नहीं होगी, हालांकि कीमतों में भारी उछाल आएगा। रॉबर्ट पेप ने बताया कि वैश्विक तेल आपूर्ति को थोड़ा बढ़ाया तो जा सकता है, लेकिन प्रभावित 20 प्रतिशत आपूर्ति की जगह नहीं ली जा सकती। उन्होंने बताया कि दुनिया प्रतिदिन लगभग 10 करोड़ बैरल तेल का उपयोग करती है। 20 प्रतिशत कटौती का मतलब है कि आपूर्ति 100 से घटकर 80 रह जाएगी। इसे पूरी तरह भरपाई करना असंभव है।

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ईरान के प्रति नरम रुख अपना रहा भारत

उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच सभ्यतागत संबंध हैं तथा भारत धीरे-धीरे ईरान के प्रति नरम रुख अपना रहा है। पेप ने कहा कि भारत अब धीरे-धीरे ईरान के साथ संबंध सुधार रहा है। वह इसका खुलकर ऐलान नहीं करना चाहता क्योंकि उसे अमेरिका को नाराज नहीं करना है, लेकिन यही हो रहा है। पेप ने आगे कहा कि भारतीय टैंकर धीरे-धीरे होर्मुज से गुजर रहे हैं। यह ईरान के साथ सीधी बातचीत का नतीजा है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान द्वारा भारत पर राजनीतिक दबाव डाला जा रहा है और भारत वास्तविकताओं को देखते हुए कदम उठा रहा है। इस दौरान प्रोफेसर पेप ने यह भी कहा कि इस युद्ध से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

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