स्टडी कर रहे; अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ से जुड़े फैसले पर क्या बोली भारत सरकार
भारत सरकार के बयान में कहा गया कि अमेरिकी प्रशासन की तरफ से कुछ कदमों की घोषणा की गई है। हम इन सभी घटनाक्रमों का उनके प्रभावों के संदर्भ में अध्ययन कर रहे हैं।

भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि सरकार अमेरिका में टैरिफ से जुड़े ताजा घटनाक्रम और उसके संभावित प्रभावों की स्टडी कर रही है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "शुक्रवार को सीमा शुल्क के बारे में आया अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे संज्ञान में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संबंध में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया है।"
बयान में कहा गया, "अमेरिकी प्रशासन की तरफ से कुछ कदमों की घोषणा की गई है। हम इन सभी घटनाक्रमों का उनके प्रभावों के संदर्भ में अध्ययन कर रहे हैं।" ट्रंप की तरफ से पिछले साल भारत समेत करीब 60 देशों के खिलाफ जारी शुल्क आदेशों को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को रद्द घोषित कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने 10 प्रतिशत वैश्विक सीमा शुल्क लगाने की घोषणा कर दी है।
ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर भी 25 प्रतिशत शुल्क और रूसी तेल खरीदने के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था। इस तरह अगस्त, 2025 से भारतीय उत्पादों के आयात पर अमेरिका में कुल 50 प्रतिशत शुल्क लग रहा था। हालांकि इस साल फरवरी की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की घोषणा की। इसके तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात कही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापक शुल्क आदेशों को उच्चतम न्यायालय की तरफ से रद्द कर दिए जाने के बाद अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर नया वैश्विक शुल्क लगाने की घोषणा की है जिसके तहत भारत को अब पहले के 25 प्रतिशत के बजाय केवल 10 प्रतिशत के जवाबी सीमा शुल्क का ही सामना करना होगा। ट्रंप की इस घोषणा के मुताबिक, यह अस्थायी आयात शुल्क 10 प्रतिशत का होगा और 24 फरवरी से 150 दिनों की अवधि के लिए लागू रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यासय 'व्हाइट हाउस' ने 20 फरवरी को इस संबंध में एक आधिकारिक घोषणा जारी की।
आयात शुल्क वह कर है जो कोई देश अन्य देशों से आयात की गई वस्तुओं पर लगाता है। आयातक को यह शुल्क सरकार को चुकाना होता है। आम तौर पर कंपनियां यह शुल्क अंतिम उपयोगकर्ता या उपभोक्ता पर डाल देती हैं। इस वजह से आयातित वस्तुएं उस देश में महंगी हो जाती हैं। जहां तक जवाबी शुल्क का सवाल है तो इस कर को अमेरिका ने पहली बार लगाया था। अप्रैल, 2025 में अमेरिका ने भारत सहित लगभग 60 देशों पर यह शुल्क लगाया था, ताकि अमेरिकी निर्यातकों को समान अवसर मिल सके। उदाहरण के लिए, यदि कोई देश अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क लगाता है, तो अमेरिका भी उस देश की वस्तुओं पर उतना ही शुल्क लगाएगा। यह मौजूदा शुल्कों के अतिरिक्त लगाया जाता है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन