भारत हसीना को सौंपे या नहीं… बांग्लादेश में सरकार बनाने से पहले BNP का बड़ा बयान
बांग्लादेश में आम चुनावों में अपनी पार्टी को शानदार जीत दिलाने के बाद तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में मंगलवार को पद की शपथ लेंगे। रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 297 में से 209 सीटों पर जीत हासिल की।

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के लगभग डेढ़ साल बाद देश को आज नया प्रधानमंत्री मिल जाएगा। हाल ही हुए आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को मिली बंपर जीत के बाद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान मंगलवार को पीएम पद की शपथ लेंगे। इसके साथ ही बांग्लादेश में एक नए युग की शुरुआत होगी। जहां मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में बांग्लादेश ने खुलकर भारत विरोधी स्टैंड अपनाया, वहीं BNP ने सत्ता में वापसी से पहले अच्छे संकेत दिए हैं। BNP ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही है। वहीं पार्टी के सेक्रेटरी जनरल ने हाल ही में एक बयान में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मामला दोनों देशों के रिश्तों में खटास की वजह नहीं बनेगा।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के सेक्रेटरी जनरल मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने शपथ ग्रहण से ठीक पहले यह बातें कही हैं। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश कानूनी तरीकों से हसीना के प्रत्यर्पण की कोशिश करता रहेगा, लेकिन इस मुद्दे की वजह से भारत के साथ सहयोग को पटरी से नहीं उतरने देगा। गौरतलब है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 2024 में देश में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद से भारत में ही रह रही हैं। बांग्लादेश में उन्हें भगोड़ा और हत्यारा घोषित कर दिया गया है।
क्या बोले फखरुल?
फखरुल आलमगीर ने एक इंटरव्यू में द हिंदू को बताया, “हमारा मानना है कि हसीना ने सच में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन किए हैं। उन्हें सजा देने की मांग है और हमारा मानना है कि भारत को उन्हें हमें सौंप देना चाहिए। लेकिन शेख हसीना को बांग्लादेश को ना सौंपना रिश्तों में रुकावट नहीं डालेगा। हम और भी बेहतर रिश्ते बनाना चाहते हैं।”
अमेरिका और चीन का हवाला
इस दौरान फखरुल ने माना कि दोनों देशों में मतभेद ज़रूर हैं लेकिन उन्हें दूर कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “अमेरिका और चीन के रिश्तों में कई मुश्किलें हैं, फिर भी वे एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं। हमें भारत-बांग्लादेश रिश्तों में सिर्फ एक मुद्दे पर नहीं अटकना चाहिए।”
'हम भारत के साथ युद्ध नहीं लड़ सकते'
वहीं बांग्लादेशी नेताओं की तरफ से हो रही भड़काऊ बयानबाजियों को भी उन्होंने आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “हम भारत के साथ युद्ध नहीं लड़ सकते। हमें बात करने की जरूरत है। जो लोग भारत से लड़ने की बात करते हैं, वे पागलों की तरह बोल रहे हैं।” इसके अलावा उन्होंने गंगा जल संधि जैसे मुद्दों को भी अहम माना। उन्होंने सुझाव दिया है कि इन मुद्दों को सुलझाने के लिए कूटनीतिक जुड़ाव की जरूरत होगी।
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