क्या इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हो गई मौत? उनके कार्यालय का बयान आ गया सामने
सोशल मीडिया पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत की अफवाहों को लेकर उनके कार्यालय कीतरफ से सफाई दी गई है। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि प्रधानमंत्री एकदम स्वस्थ्य हैं।

ईरान से युद्ध के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत की अफवाहों को लेकर उनके ऑफिस ने बयान जारी किया है। नेतन्याहू के ऑफिस की तरफ से कहा गया है कि प्रधानमंत्री एकदम स्वस्थ्य हैं। एक समाचार एजेंसी ने जब नेतन्याहू के कार्यालय से सवाल किया कि क्या इस बात पर कोई बयान है कि नेतन्याहू की हत्या कर दी गई है। इसपर कार्यालय की तरफ से कहा गया कि ये सारी खबरें एकदम फर्जी हैं।
क्यों उड़ी थी अफवाह
शुक्रवार को बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने ट्विटर अकाऊंट पर युद्ध को लेकर एक वीडियो शेयर किया था। इसके बाद मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि उनके दाहिने हाथ में छह उंगलियां दिखाई दे रही थीं। इसके बाद अफवाह उड़ी की यह वीडियो एआई जनरेटेड था। दावा किया गया कि वीडियो में जब नेतन्याहू हाथ ऊपर की ओर उठाते हैं तो उंगली के बगल में ही मांस का एक टुकड़ा एक्स्ट्रा दिखाई दिया।
अमेरिका के एक टिप्पणीकार कैंडिस ओवेन्स ने पूछा कि नेतन्याहू की पत्नी हैं। उन्होंने कहा, देखिए पूरी वीडियो में ब्लैकआउट पर्दा एक ही पैटर्न में हिल रहा है। वहीं झंडे एकदम नहीं हिल रहे थे। ऐसे में साफ पता चलता है कि यह एआई वीडियो था। वहीं कई यूजर्स ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि आजकल बहुत सारे लोग डुप्लीकेट बैकग्राउंट का इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि बोलने वाला व्यक्ति भी नकली हो।
गुरुवार को नेतन्याहू का वीडियो सामने आया था। उन्होंने कहा था कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल का संयुक्त अभियान ''उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है'' और इजराइल ''पहले से कहीं अधिक मजबूत'' है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के नव निर्वाचित सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को भी ''बख्शा'' नहीं जाएगा।
इस सवाल के जवाब में कि क्या इजराइल खामेनेई और हिजबुल्ला नेता नईम कासिम को निशाना बनाएगा, इस पर नेतन्याहू ने कहा, ''मैं किसी भी आतंकी संगठन के नेता को नहीं बख्शूंगा।'' मोजतबा के पिता ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में मारे गए थे।
इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ ''रोरिंग लायन'' नामक अपना अभियान शुरू किया जिसमें अमेरिका भी शामिल हो गया और उसने इसे ''एपिक फ्यूरी'' नाम दिया। ऐसा दावा किया गया कि इन हमलों का उद्देश्य ''ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को विफल करना, उसके मिसाइल कार्यक्रम को नष्ट करना और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को करारा झटका देना'' है।
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