2 साल बाद फिर लौटा इबोला वायरस, नर्स की मौत; 10 साल पहले 11000 की ले चुका है जान; जानें- लक्षण
इबोला खतरनाक और जानलेवा बीमारी माना जाता है। इसमें मरीज को तेज बुखार, उल्टी, दस्त मांसपेशियों में तेज दर्द और खिंचाव और कई बार मरीज के शरीर में आंतरिक रक्त स्राव भी होता है।

पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा में दो साल बाद फिर से खतरनाक वायरस इबोला ने दस्तक दी है और आते ही एक नर्स की जान ले ली है। 2023 के बाद सामने आए पहले में युगांडा की राजधानी कंपोला में इस वायरस से संक्रमित होकर एक पुरुष नर्स की मौत हो चुकी है। युगांडा के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है और कहा है कि उसके संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। युगांडा में इससे पहले 2023 में इबोला वायरस का संक्रमण देखा गया था लेकिन अब नर्स की मौत ने इसके दो साल बाद फिर से उभरने के संकेत दिए हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक 32 वर्षीय पुरुष नर्स को बुखार आया था, उसके बाद उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लैब टेस्टिंग में उसे इबोला वायरस से संक्रमित पाया गया था। अब उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान की जा रही है। अब तक उसके संपर्क में आए 44 लोगों की पहचान की गई है। इनमें से 30 मुलागो हॉस्पिटल के कर्मचारी हैं, जहां का वह कर्मचारी था। युगांडा हेल्थ मिनिस्ट्री की सचिव डायना अट्विन ने गुरुवार को बताया कि पुरुष नर्स मुलागो हॉस्पिटल में काम करता था।
पहले भी फैल चुका है इबोला
युगांडा में पहले भी कई बार इबोला वायरस का प्रकोप देखा जा चुका है। वर्ष 2000 में इबोला ने वहां घातक असर दिखाया था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में इबोला प्रकोप के कारण 11,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई हो चुकी है। इबोला वायरस का पता सबसे पहले 1976 में चला था, जब इबोला नदी के पास दक्षिण सूडान और कांगो में एक साथ इसका प्रकोप फैला था।
कैसे फैलता है संक्रमण और लक्षण क्या
इबोला खतरनाक और जानलेवा बीमारी माना जाता है। इसमें मरीज को तेज बुखार, उल्टी, दस्त मांसपेशियों में तेज दर्द और खिंचाव और कई बार मरीज के शरीर में आंतरिक रक्त स्राव भी होता है। मरीज के गले में खरास और उसे कमजोरी का भी अनुभव होता है। संक्रमित शख्स के शरीर पर बड़े-बड़े फोड़े भी होते हैं। ये बीमारी तरल पदार्थ या दूषित पदार्थों के संपर्क से फैलता है। इसके लक्षण आम तौर पर संक्रमित होने के 8 से 10 दिनों बाद दिखता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इबोला के मामलों में मृत्यु दर औसतन 50% से ज्यादा है। वैज्ञानिक अभी भी ये नहीं समझ सके हैं कि इसकी उत्पत्ति कैसे हुई है लेकिन उन्हें संदेह है कि ये वायरस संक्रमित जानवरों या उनके कच्चे मांस खाने से इंसानों में फैला है।
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