donald trump warns diego garcia military base UK Mauritius deal chagos islands Good news for India अगर डील टूटी तो सेना भेज देंगे, ब्रिटिश पीएम को ट्रंप की चेतावनी; भारत के लिए अच्छी खबर क्यों?, International Hindi News - Hindustan
More

अगर डील टूटी तो सेना भेज देंगे, ब्रिटिश पीएम को ट्रंप की चेतावनी; भारत के लिए अच्छी खबर क्यों?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को लेकर ब्रिटेन-मॉरीशस समझौते पर बड़ा बयान दिया है। जानें क्यों ट्रंप ने दी सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी और क्या है 99 साल की यह लीज डील। भारत के लिए गुड न्यूज!

Fri, 6 Feb 2026 10:19 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
share
अगर डील टूटी तो सेना भेज देंगे, ब्रिटिश पीएम को ट्रंप की चेतावनी; भारत के लिए अच्छी खबर क्यों?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ 'सकारात्मक' बातचीत के बाद, ट्रंप ने इस समझौते पर अपनी पिछली कड़ी आलोचना को नरम करते हुए एक कड़ी चेतावनी भी जारी की है। उन्होंने ब्रिटिश पीएम को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भविष्य में कभी भी ये यूके-मॉरीशस की ये डील टूटी तो अमेरिका अपनी सेना भेजकर उस द्वीप को अपने कब्जे में ले लेगा।

समझौते पर ट्रंप का रुख: कमजोरी से मजबूरी तक

पिछले महीने डोनाल्ड ट्रंप ने चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के ब्रिटेन के फैसले की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने इसे पूर्ण कमजोरी और बड़ी मूर्खता करार दिया था। हालांकि, ताजा घटनाक्रम में ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि वह अब समझते हैं कि प्रधानमंत्री स्टारमर ने जो समझौता किया, वह उनके लिए संभव सबसे अच्छा विकल्प था।

हालांकि ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि वह किसी भी सूरत में डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को कमजोर या खतरे में नहीं पड़ने देंगे। उन्होंने कहा कि वह समझते हैं कि प्रधानमंत्री स्टारमर ने मौजूदा परिस्थितियों में सबसे बेहतर समझौता किया है, लेकिन यदि भविष्य में इस सैन्य अड्डे पर अमेरिकी संचालन या सैनिकों को खतरा पैदा होता है, तो अमेरिका निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

सैन्य हस्तक्षेप का अधिकार सुरक्षित

यहां भले ही ट्रंप ने समझौते को स्वीकार कर लिया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका के हितों की रक्षा करने की बात कही है। ट्रंप ने लिखा, 'मैंने प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ डिएगो गार्सिया द्वीप के बारे में बहुत अच्छी बातचीत की है। यह एक बड़े अमेरिकी मिलिट्री बेस की जगह है, जो हिंद महासागर के बीच में रणनीतिक रूप से स्थित है और यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है। पिछले एक साल में हमारे मिलिट्री ऑपरेशन हमारे सैनिकों की ताकत, हमारे उपकरणों की आधुनिक क्षमता और, सबसे महत्वपूर्ण बात हमारे मिलिट्री बेस की रणनीतिक स्थिति के कारण सफल रहे। मुझे पता है कि प्रधानमंत्री स्टारमर ने जो डील की है, कई लोगों के अनुसार वह सबसे अच्छी डील थी जो वह कर सकते थे। हालांकि, अगर भविष्य में कभी भी लीज डील टूट जाती है या कोई भी हमारे बेस पर अमेरिकी ऑपरेशन और सेना को धमकी देता है या खतरे में डालता है, तो मुझे डिएगो गार्सिया में अमेरिकी मौजूदगी को मिलिट्री तरीके से सुरक्षित करने और मजबूत करने का अधिकार है। यह जान लें कि मैं कभी भी इतने महत्वपूर्ण बेस पर हमारी मौजूदगी को झूठे दावों या पर्यावरण के नाम पर बकवास से कमजोर या खतरे में नहीं पड़ने दूंगा। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!'

चागोस द्वीप समूह क्या है?

चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित 60 से अधिक छोटे द्वीपों का एक समूह है। रणनीतिक रूप से यह क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री रास्तों के केंद्र में स्थित है। इसका सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण द्वीप डिएगो गार्सिया है। 1965 में मॉरीशस की आजादी से ठीक पहले, ब्रिटेन ने चागोस को मॉरीशस से अलग कर दिया था और इसे 'ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र' (BIOT) घोषित कर दिया। 1960 और 70 के दशक में, ब्रिटेन ने यहां रहने वाले लगभग 2,000 स्थानीय निवासियों (चागोसियों) को जबरन बाहर निकाल दिया ताकि अमेरिका वहां अपना सैन्य अड्डा बना सके। मॉरीशस दशकों से इस पर अपनी संप्रभुता का दावा कर रहा था। 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने भी ब्रिटेन के कब्जे को अवैध बताते हुए द्वीप मॉरीशस को लौटाने की सलाह दी थी।

क्या है 2025 का यह चागोस समझौता?

ट्रंप ने 2025 में साइन की गई यूके-मॉरीशस संधि का भी जिक्र किया। ब्रिटेन की वर्तमान सरकार (कीर स्टारमर के नेतृत्व में) और मॉरीशस के बीच हुए इस 'ऐतिहासिक' समझौते के तहत ब्रिटेन ने आधिकारिक तौर पर चागोस द्वीप समूह पर मॉरीशस की संप्रभुता को स्वीकार कर लिया है। अब यह कानूनी रूप से मॉरीशस का हिस्सा है। सुरक्षा कारणों से, डिएगो गार्सिया द्वीप पर स्थित ब्रिटेन-अमेरिका का संयुक्त सैन्य अड्डा कम से कम अगले 99 वर्षों तक वहां बना रहेगा। ब्रिटेन इस सैन्य अड्डे के उपयोग के लिए मॉरीशस को सालाना किराया (लगभग 136 मिलियन डॉलर) देगा। समझौते में 50 साल के विस्तार का विकल्प भी शामिल है। समझौते के तहत विस्थापित किए गए चागोसियों को डिएगो गार्सिया को छोड़कर अन्य द्वीपों पर वापस बसने की अनुमति मिलेगी।

डिएगो गार्सिया का महत्व

यह बेस अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है:

  • इसका उपयोग यमन और अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रों में लंबी दूरी के अमेरिकी ऑपरेशनों के लिए किया गया है।
  • वर्तमान में यहां लगभग 4,000 सैन्य और नागरिक कर्मचारी तैनात हैं।

भारत के लिए अच्छी खबर क्यों?

भारत ने पहले ही इस समझौते का दिल खोलकर स्वागत किया है। इसके पीछे कई कारण हैं। मॉरीशस भारत का एक करीबी सहयोगी है। डिएगो गार्सिया में पश्चिमी देशों की उपस्थिति बने रहने से हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिलती है। भारत हमेशा से औपनिवेशीकरण के खात्मे का समर्थक रहा है। इस समझौते को ब्रिटिश साम्राज्य के आखिरी अवशेष के खत्म होने के रूप में देखा जा रहा है।

SAGAR नीति की जीत

भारत ने इस समझौते को अमली जामा पहनाने में एक साइलेंट फैसिलिटेटर या कहें कि पर्दे के पीछे से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच बातचीत के दौरान भारत ने दोनों देशों को प्रोत्साहित किया कि वे एक ऐसे नतीजे पर पहुंचें जो 'विन-विन' वाला हो यानी दोनों देशों के लिए फायदेमंद। भारत ने मॉरीशस को उसकी संप्रभुता दिलाने में मदद की। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों (जैसे UN और ICJ) पर लगातार मॉरीशस के उपनिवेशवाद के अंत के दावे का समर्थन किया। इससे ब्रिटेन पर नैतिक दबाव बना। भारत ने मॉरीशस को भरोसा दिलाया कि इस समझौते के बाद भी हिंद महासागर की सुरक्षा में भारत एक मजबूत साझेदार बना रहेगा। खुद मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने भी इस डील के बाद भारत के योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। भारत के लिए यह समझौता उसकी 'SAGAR' (Security and Growth for All in the Region) नीति की एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।