मुसीबत में अब अमेरिका भी नहीं देगा साथ, नाटो पर फिर भड़के ट्रंप; बजट काटने की धमकी
ईरान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद में नाटो देशों का साथ न मिलने पर डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए हैं। उन्होंने सहयोगियों को 'कायर' और 'कागजी शेर' बताते हुए भविष्य में मदद न करने की चेतावनी दी है। जानिए पूरी खबर।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को नाटो सहयोगियों के प्रति अपनी गहरी निराशा व्यक्त की। यह निराशा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित करने के लिए सहयोगी देशों द्वारा अपनी सेना भेजने से इनकार करने के कारण है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भविष्य में नाटो सहयोगी वाशिंगटन से मदद मांगते हैं, तो हो सकता है कि अमेरिका उनकी मदद न करे।
शुक्रवार रात मियामी में एक इन्वेस्टमेंट फोरम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह इस बात से निराश और खफा हैं कि यूरोपीय नाटो देशों ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका को भौतिक या सैन्य सहायता देने से इनकार कर दिया है। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा यह युद्ध अब अपने चौथे सप्ताह में पहुंच गया है।
दूसरी ओर, यूरोपीय सहयोगियों का तर्क है कि पिछले महीने के अंत में ईरान पर हमला करने के फैसले से पहले अमेरिका ने उनसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया था। नाटो गठबंधन के कई नेताओं ने अमेरिका के इस एकतरफा कदम का कड़ा विरोध भी किया था।
ट्रंप का कड़ा बयान: वे हमारे लिए खड़े नहीं हुए, तो हम क्यों हों?
मंच से दर्शकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, 'हम हमेशा उनके लिए वहां मौजूद रहते, लेकिन अब उनके कदमों को देखते हुए, मुझे लगता है कि हमें ऐसा करने की कोई आवश्यकता नहीं है?' उन्होंने अमेरिका द्वारा नाटो पर किए जाने वाले खर्च का हवाला देते हुए कहा: हम नाटो पर हर साल अपनी रक्षा के लिए सैकड़ों-अरबों डॉलर खर्च करते हैं और हम हमेशा उनके लिए खड़े रहते। लेकिन अब उनके कार्यों को देखते हुए, मुझे लगता है कि हमें ऐसा करने की जरूरत नहीं है। अगर वे हमारे लिए नहीं हैं, तो हम उनके लिए क्यों रहें? वे हमारे लिए वहां नहीं थे।
उन्होंने आगे कहा, "क्या यह एक ब्रेकिंग स्टोरी लग रही है? हां सर। क्या यह ब्रेकिंग न्यूज है? मुझे लगता है कि हमने अभी-अभी एक ब्रेकिंग न्यूज दी है, लेकिन यही सच्चाई है। मैं यह बात कहता आ रहा हूं। अगर वे हमारे लिए मौजूद नहीं हैं, तो हम उनके लिए क्यों मौजूद रहें? वे हमारे लिए वहां नहीं थे।
नाटो के 'अनुच्छेद 5' और ट्रंप का उतार-चढ़ाव भरा रिश्ता
नाटो गठबंधन के साथ राष्ट्रपति ट्रंप के रिश्ते हमेशा से उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर ऐसी टिप्पणियां की हैं जिनसे नाटो के अनुच्छेद 5 का पालन करने की उनकी मंशा पर सवाल उठे हैं। इस अनुच्छेद का मूल सिद्धांत है कि "किसी एक सदस्य देश पर हमला, नाटो के सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा।"
एक महीने पहले ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का संयुक्त सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से ही ट्रंप पश्चिमी सहयोगियों के रवैये से नाराज हैं। खाड़ी देशों के तेल और गैस निर्यात के लिए 'होर्मुज जलडमरूमध्य' एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिस पर ईरानी हमलों का खतरा बना हुआ है। सहयोगी देश इस मार्ग को फिर से खोलने के लिए अपनी सेनाएं भेजने से कतरा रहे हैं। इस संकरे जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से ठप हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है।
प्रमुख देशों का रुख
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान सहित छह प्रमुख शक्तियों का कहना है कि वे उचित प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने कोई भी ठोस सैन्य या कूटनीतिक प्रतिबद्धता नहीं जताई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (नाटो) की कड़ी आलोचना की है। पिछले हफ्ते ट्रंप ने नाटो के अन्य सदस्यों को कायर करार दिया था और कहा था कि अमेरिका के बिना यह सैन्य गठबंधन सिर्फ एक कागजी शेर है। गुरुवार को उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि अमेरिका को नाटो से कुछ नहीं चाहिए। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, नाटो देशों ने उस पागल देश (ईरान), जो अब सैन्य रूप से तबाह हो चुका है, से निपटने में बिल्कुल कोई मदद नहीं की है।
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