खाड़ी देशों की रिक्वेस्ट पर ईरान के ऊपर हमले को टाल दिया है, डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े पैमाने पर हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि ईरान को परमाणु कार्यक्रम छोड़ना होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमले को टालने का ऐलान किया है। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए उन्होंने बताया कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं की अपील पर यह फैसला लिया गया। ट्रंप के अनुसार, इन देशों ने गंभीर बातचीत की गुजारिश की है, जिसके चलते अमेरिका ने हमला टाल दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान के साथ एक ऐसा समझौता हो जाएगा जो अमेरिका के लिए पूरी तरह स्वीकार्य होगा और ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा। यह घटना मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच आई है, जहां अमेरिका-ईरान संबंध पहले से ही काफी तनाव भरे रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना बड़े पैमाने पर हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने जोर दिया कि ईरान को परमाणु कार्यक्रम छोड़ना होगा। इस बयान के बाद ईरान की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। खाड़ी देशों की यह अपील इसलिए अहम है क्योंकि वे क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना चाहते हैं। ईरान के हमलों से इन देशों को भी खतरा महसूस हो रहा था, जिसके चलते उन्होंने ट्रंप से बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह दी।
युद्ध की आशंका कम हुई मगर…
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह फैसला क्षेत्र में युद्ध की आशंका को कम कर सकता है, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। ताजा घटनाक्रम का मध्य पूर्व की राजनीति पर गहरा असर पड़ रहा है। हाल के दिनों में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देश ईरान के प्रभाव को सीमित करने के पक्ष में रहे हैं, लेकिन पूर्ण युद्ध से इनकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम कूटनीति को प्राथमिकता देने का संकेत देता है, हालांकि उन्होंने सैन्य विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं किया। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों की भूमिका क्षेत्रीय संकट को हल करने में निर्णायक साबित हो सकती है। फिलहाल मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया के लिए यह एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव अभी भी बड़े मुद्दे बने हुए हैं। अगर बातचीत सफल हुई तो युद्ध टल सकता है, वरना स्थिति और बिगड़ सकती है। ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए है, जबकि खाड़ी सहयोगी देश स्थिरता की अपील कर रहे हैं।
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