क्या ईरान से अमेरिका की बातचीत बंद हो गई? मीडिया में अटकलों पर डोनाल्ड ट्रंप का जवाब
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि एक तरफ या दूसरी तरफ कोई समझौता हो जाए। उन्होंने स्वीकार किया कि बातचीत का नतीजा अनिश्चित हो सकता है, लेकिन ईरान को अमेरिका के साथ डील करने की जरूरत पर जोर दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह गलत बताते हुए खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर चल रही बातचीत टूट गई है। ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा कि दोनों देशों के बीच बातचीत बंद होने की खबरें फेक न्यूज हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में बातचीत लगातार जारी रही है, जिसमें चार दिन पहले, तीन दिन पहले, दो दिन पहले, एक दिन पहले और आज भी चर्चा हुई। इस बयान से अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव के बीच नई उम्मीद जगी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि एक तरफ या दूसरी तरफ कोई समझौता हो जाए। उन्होंने स्वीकार किया कि बातचीत का नतीजा अनिश्चित हो सकता है, लेकिन ईरान को अमेरिका के साथ डील करने की जरूरत पर जोर दिया। ट्रंप ने ईरान की नेतृत्व व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि यह मुद्दा दशकों से लंबित है और इसे अब और नहीं चलने दिया जा सकता। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल के लेबनान में सैन्य अभियान के बाद ईरान ने वार्ता से पीछे हटने की घोषणा की थी, जिससे कूटनीतिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।
इजरायली प्रधानमंत्री से ट्रंप की बातचीत
इस घटनाक्रम के बीच ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और हिजबुल्लाह प्रतिनिधियों से सोमवार को बात की। उन्होंने दोनों पक्षों को गोलीबारी बंद करने पर सहमत कराया। ट्रंप ने नेतन्याहू से बेरूत पर बड़ा हमला न करने का अनुरोध किया, जिसके बाद इजरायली सैनिकों को वापस बुला लिया गया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'थैंक यू बिबी!' इस मध्यस्थता से क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।
ईरान-अमेरिका वार्ता का मुद्दा न केवल परमाणु कार्यक्रम बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक संबंधों से भी जुड़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान ईरान पर दबाव बढ़ाने और साथ ही वार्ता की राह खुली रखने की रणनीति का हिस्सा है। अगर दोनों देशों के बीच कोई समझौता होता है तो मध्य पूर्व में स्थिरता आ सकती है, नहीं तो तनाव बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
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