नहीं दिया हमारा साथ; सबसे पावरफुल ग्रुप को झटका दे सकते हैं ट्रंप, सीक्रेट मीटिंग हुई
NATO महासचिव बुधवार को दो घंटे से अधिक समय तक वाइट हाउस में रहे। हालांकि ट्रंप के साथ उनकी बैठक कितने समय तक चली यह ज्ञात नहीं है। इस बैठक का उद्देश्य ट्रंप को यह समझाना और राजी करना था कि NATO गठबंधन में बने रहना उनके और अमेरिका दोनों के हित में है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस में NATO महासचिव मार्क रुट्टे के साथ एक निजी बैठक के बाद, ईरान युद्ध में अमेरिका का समर्थन न करने के लिए NATO की फिर से आलोचना की। यह जानकारी बीबीसी ने गुरुवार को दी। इस बीच, स्पष्ट मतभेदों के बावजूद रुट्टे ने सीएनएन को ट्रंप के साथ अपनी मुलाकात को बहुत स्पष्ट और बहुत खुला करार दिया।
बैठक के बाद ट्रुथ सोशल पर साझा की गई एक पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, 'जब हमें NATO की जरूरत थी तब वे मौजूद नहीं थे और अगर हमें उनकी फिर से जरूरत पड़ी तो वे मौजूद नहीं होंगे।'
नाटो छोड़ने पर कर चुके हैं विचार
बुधवार को होने वाली वार्ता से पहले, ट्रंप ने NATO से बाहर निकलने के विचार पर गौर किया था, क्योंकि कई NATO देशों ने वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने में मदद करने के उनके आह्वान का विरोध किया था। हालांकि वाइट हाउस ने वार्ता के विवरण का खुलासा नहीं किया।
ट्रंप को मनाने की हो रही कोशिश?
NATO महासचिव बुधवार को दो घंटे से अधिक समय तक वाइट हाउस में रहे। हालांकि ट्रंप के साथ उनकी बैठक कितने समय तक चली यह ज्ञात नहीं है। इस बैठक का उद्देश्य ट्रंप को यह समझाना और राजी करना था कि NATO गठबंधन में बने रहना उनके और अमेरिका दोनों के हित में है।
हालांकि, यह स्पष्ट है कि राष्ट्रपति ट्रंप को अभी भी इस गठबंधन और इसके सदस्य देशों के बारे में गहरी आशंकाएं हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से पहले और उसके दौरान इन देशों ने अमेरिका की पर्याप्त मदद नहीं की। हाल के हफ्तों में ट्रंप ने 32 सदस्यीय गठबंधन से हटने की लगातार धमकी दी है।
वाइट हाउस ने क्या कह दिया
ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में NATO की भूमिका के बारे में पूछे गए एक सवाल पर, वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने राष्ट्रपति के एक प्रत्यक्ष उद्धरण का हवाला देते हुए कहा कि NATO की परीक्षा ली गई और वे असफल रहे। उन्होंने कहा कि NATO देशों ने अमेरिकी जनता से मुंह मोड़ लिया है जो उनके देशों की रक्षा के लिए धन देते हैं और ट्रंप NATO प्रमुख के साथ बहुत ही स्पष्ट और बेबाक बातचीत करेंगे।
इस बीच NATO महासचिव ने सीएनएन को बताया कि उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अधिकांश यूरोपीय देशों ने सैन्य अड्डे स्थापित करने, रसद व्यवस्था और हवाई उड़ानों में सहायता प्रदान की है। हालांकि यह देखना बाकी है कि क्या यह बात और महासचिव के ट्रंप के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए पर्याप्त साबित होंगे या नहीं।
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