ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की दो टूक; संप्रभुता से समझौता नहीं, बातचीत को तैयार
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि उनका देश संप्रभुता पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हम सुरक्षा, निवेश, अर्थव्यवस्था जैसे सभी राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता पर कोई चर्चा नहीं होगी।
आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ग्रीनलैंड एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में द्वीप पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकी दी थी, लेकिन बुधवार को उन्होंने इसे वापस ले लिया और नाटो महासचिव मार्क रुट के साथ आर्कटिक सुरक्षा पर 'भविष्य के समझौते का ढांचा' तय होने का दावा किया। इसके जवाब में डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि उनका देश संप्रभुता पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हम सुरक्षा, निवेश, अर्थव्यवस्था जैसे सभी राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता पर कोई चर्चा नहीं होगी।
फ्रेडरिक्सन ने अपने बयान में कहा कि आर्कटिक की सुरक्षा नाटो के सभी सदस्य देशों का साझा मुद्दा है और यह स्वाभाविक एवं उचित है कि अमेरिकी राष्ट्रपति और नाटो महासचिव मार्क रुट के बीच इस पर चर्चा हो। उन्होंने बताया कि वे रुट के साथ 'निरंतर' संपर्क में हैं, जिसमें डावोस में ट्रंप से मुलाकात से पहले और बाद की बातचीत भी शामिल है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि नाटो को डेनमार्क के रुख की पूरी जानकारी है। सुरक्षा, निवेश और आर्थिक मामलों सहित राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत की जा सकती है, लेकिन हम अपनी संप्रभुता पर कोई बातचीत नहीं कर सकते।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि मुझे सूचना मिली है कि यह मामला ऐसा नहीं है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ही डेनमार्क तथा ग्रीनलैंड से जुड़े मामलों पर फैसला लेने के हकदार हैं। फ्रेडरिक्सन ने कहा कि डेनमार्क आर्कटिक में सुरक्षा मजबूत करने के लिए सहयोगियों के साथ रचनात्मक संवाद जारी रखना चाहता है, जिसमें अमेरिका का गोल्डन डोम कार्यक्रम भी शामिल है, बशर्ते इसे हमारी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए किया जाए।
दरअसल, ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के लिए दबाव बनाने हेतु आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिसे उन्होंने बुधवार को वापस ले लिया। दावोस में उन्होंने कहा था कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए बल का प्रयोग नहीं करेंगे। वे इस मुद्दे पर बातचीत करने को तैयार हूं। इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि वे इस द्वीप को 'पूर्ण अधिकार, स्वामित्व और कब्जे' सहित हासिल करना चाहते हैं।
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