Denmark gives a shock to America embroiled in the Iran war takes a big step regarding Greenland ईरान युद्ध में फंसे अमेरिका को डेनमार्क का झटका, ग्रीनलैंड को लेकर उठाया बड़ा कदम, International Hindi News - Hindustan
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ईरान युद्ध में फंसे अमेरिका को डेनमार्क का झटका, ग्रीनलैंड को लेकर उठाया बड़ा कदम

ईरान के खिलाफ युद्ध में फंसे अमेरिका को डेनमार्क ने तगड़ा झटका दिया है। ट्रंप द्वारा बार-बार ग्रीनलैंड हथियाने की बात करने के बाद डेनमार्क ने यहां की सुरक्षा को कड़ा कर दिया है। इसके लिए उसने ग्रीनलैंड में मौजूद हवाई पट्टियों को भी तबाह कर दिया है।

Thu, 26 March 2026 10:22 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान युद्ध में फंसे अमेरिका को डेनमार्क का झटका, ग्रीनलैंड को लेकर उठाया बड़ा कदम

Donald Trump: ईरान युद्ध में फंसे अमेरिका को डेनमार्क ने बड़ा झटका दिया है। अमेरिका का नाटो सहयोगी देश डेनमार्क धीरे-धीरे ट्रंप के ग्रीनलैंड हथियाने के सपने को खत्म करने में लगा हुआ है। ट्रंप, जो ईरान के पहले ग्रीनलैंड पर हमला करने की योजना बना रहे थे, अब उनके लिए वहां पर उतरना आसान नहीं होगा। ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए डेनमार्क सरकार ने तमाम योजनाएं तैयार कर ली हैं। इसमें सबसे प्रमुख ग्रीनलैंड पर मौजूद हवाई अड्डों को उड़ाना तक शामिल था ताकि अमेरिका की सेना वहां पर उतर न सके।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और उनका ट्रंप प्रशासन इस वक्त ईरान में फंसा हुआ है। ऐसी स्थिति में डेनमार्क सरकार ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा की तैयारियां पुख्ता करना शुरू कर दिया है। डेनमार्क के अधिकारियों ने फाइनेंशियल टाइम्स के साथ सरकार की इस योजना की पुष्टि की है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगातार ग्रीनलैंड हथियाने की बात करना और इसको लेकर एक तरीके का अभियान चलाना कोपेनहेगन में चिंता को बढ़ा रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए डेनिश अधिकारियों ने जनवरी से ही इस योजना पर काम करना शुरू कर दिया था। इसमें सबसे प्रमुख ठंडे ग्रीनलैंड पर डेनिश सैनिकों की तैनाती, इसके अलावा मुख्य रूप से ग्रीनलैंड पर मौजूद दो बड़े रनवे को निष्क्रिय करना शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक डेनिश सरकार और सैन्य अधिकारियों ने इस योजना को बहुत ही गोपनीय ढंग से अंजाम दिया है।

यूरोपी सैनिकों की तैनाती

राष्ट्रपति ट्रंप के ग्रीनलैंड हथियाने के सपने को देखते हुए यूरोप के तमाम देशों ने पहले ही ग्रीनलैंड में सैनिक भेजने शुरू कर दिए थे। भले ही यह संकेत के रूप में हों,लेकिन यह एक बड़ा परिवर्तन था, जिसमें अमेरिका की तरफ से होने वाले हमले को ध्यान में रखते हुए यूरोपीय सैनिकों की तैनाती की जा रही थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ग्रीनलैंड में अभी भी डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नॉर्वे और स्वीडन के सैनिकों का एक छोटा दल तैनात है, जो कि राजधानी नूक के रणनीतिक एयरपोर्ट की रक्षा के लिए तैनात किया गया है।

समंदर में फ्रांसीसी पोत तैनात

इसके अलावा डेनिश विमान और एक फ्रांसीसी नौसैनिक पोत को भी उत्तरी अटलांटिक में तैनात किया गया। आधिकारिक तौर पर, इस तैनाती को “ऑपरेशन आर्टकिट एन्यूरेंस" के तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास का हिस्सा बताया गया, लेकिन DR के अनुसार असली उद्देश्य किसी संभावित अमेरिकी हस्तक्षेप की लागत बढ़ाना था। इस मुद्दे पर डेनिस रक्षा मंत्रालय ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

अमेरिकी हमले की स्थिति के लिए तैयारी

गौरतलब है कि यूरोप और ग्रीनलैंड की इन रक्षा तैयारियों की गंभीरता बताती है कि यूरोपीय सहयोगी अमेरिका को किस नजर से देखने लगे हैं। हालांकि डेनमार्क की सैन्य क्षमता अमेरिका की तुलना में सीमित है, फिर भी संभावित टकराव की तैयारी करने की उसकी इच्छा ट्रंप की बयानबाजी और कदमों से उत्पन्न गहरी चिंता को दर्शाती है। इस संकट की जड़ ट्रंप के बार-बार दिए गए वे बयान हैं, जिनमें उन्होंने कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करना चाहिए। उन्होंने इस द्वीप को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बताया और बिना सबूत के दावा किया कि वहां रूसी और चीनी जहाज व्यापक रूप से सक्रिय हैं।

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