Cover to steal enriched uranium Iran on US motives behind operation for rescue of F-15E aviator पायलट को बचाना था या यूरेनियम चुराना था? ईरान ने US के रेस्क्यू ऑपरेशन पर उठा दिए सवाल, International Hindi News - Hindustan
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पायलट को बचाना था या यूरेनियम चुराना था? ईरान ने US के रेस्क्यू ऑपरेशन पर उठा दिए सवाल

अमेरिका ने अपने पायलट को दो दिन तक चले मिशन में सुरक्षित बचाने का दावा किया। यह पायलट तेहरान के हमले में अपने लड़ाकू विमान को निशाना बनाये जाने के बाद लापता हो गया था। अमेरिकी सेना ने इस अभियान को ईरान में घुसकर अंजाम दिया।

Tue, 7 April 2026 08:24 AMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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पायलट को बचाना था या यूरेनियम चुराना था? ईरान ने US के रेस्क्यू ऑपरेशन पर उठा दिए सवाल

US-Iran War: अमेरिका ने बीते दिनों ईरान के अंदर घुसकर कई घंटों का ऑपरेशन चलाकर अपने पायलट को सुरक्षित निकालने का दावा किया है। अब ईरान ने इसे लेकर अमेरिका पर बड़े आरोप लगाए हैं। ईरान का मानना है कि अपने पायलटों को बचाने की आड़ में अमेरिका की कोशिश दरअसल ईरानी यूरेनियम चुराने की एक साजिश हो सकती है, जो पूरी तरह विफल रही।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को ईरानी टेलीविजन चैनल 'एसएनएन' पर प्रसारित एक बयान में कहा, "इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि यह संवर्धित यूरेनियम चुराने के इरादे से की गयी छल कपट से भरी चाल हो सकती है।" बघाई ने कहा कि इस ऑपरेशन को लेकर कई सवाल और अनिश्चितताएं हैं। ईरानी प्रवक्ता ने कहा, “जिस इलाके में अमेरिकी पायलट के मौजूद होने का दावा किया गया था, यानी कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत, वह उस इलाके से काफी दूर है, जहां उन्होंने मध्य ईरान में अपनी सेनाओं को उतारने की कोशिश की थी या उतारना चाहते थे।”

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क्या बोले ईरानी प्रवक्ता?

उन्होंने आगे कहा, "इस संभावना को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि यह एनरिच्ड यूरेनियम चुराने के लिए किया गया एक जालसाजी भरा ऑपरेशन था। हालांकि अमेरिका के लिए एक बड़ी नाकामी साबित हुआ। वहीं ईरान की सेना ने भी इसे ‘धोखे’ और ‘भागने’ का मिशन बताया। ईरानी सेना ने कहा कि इस मिशन के दौरान हमले की चपेट में आने के बाद कई अमेरिकी विमानों को दक्षिणी इस्फ़हान प्रांत में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी, जिसकी वजह से US को अपने ही विमानों पर भारी बमबारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि अमेरिका का दावा है कि विमान ने ‘तकनीकी खराबी’ आने के कारण ऐसा करना पड़ा।

पायलट को बचाने का दावा

गौरतलब है कि अमेरिकी मीडिया ने शुक्रवार को खबर दी थी कि ईरान में एक 'एफ-15ई स्ट्राइक ईगल' सुपरसोनिक लड़ाकू-बमवर्षक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अमेरिका ने बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया है। विमान के दो पायलटों में से एक को जल्द ही ढूंढ लिया गया था। वहीं एक ईरान में ही फंस गया था। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान में गिराए गए अमेरिकी एफ-15ई जेट के दूसरे पायलट को भी बचा लिया गया है और वह सुरक्षित है। ट्रंप के अनुसार, इस बचाव अभियान में दर्जनों अमेरिकी विमानों ने हिस्सा लिया था।

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न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के अनुसार, ईरान द्वारा विमान को मार गिराये जाने के बाद अमेरिकी वायुसेना का अधिकारी ईरान से बचने के लिए पहाड़ों की एक दरार में छिप गया था और 7,000 फुट की ऊंचाई तक चढ़ाई की। इसके बाद दो दिन तक चले 'जीवन-मरण' वाले मिशन में अमेरिकी सेना उसे सुरक्षित ले आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पायलट को बचाने के लिए चलाए गए बचाव अभियान को साहस और प्रतिभा का एक अद्भुत प्रदर्शन करार दिया है।

ईरान ने दिखाए सबूत

ईरान ने इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दो लापता पायलटों को 'बचाने और वापस लाने' के रविवार को किये गये दावे के कुछ घंटों बाद ही ईरान ने इसे खारिज कर दिया था। ईरानी सेना ने अमेरिका के लड़ाकू विमान एफ-15 को मार गिराया था। ईरान के खातम अल-अम्बिया केंद्रीय मुख्यालय (केसीएचक्यू) के प्रवक्ता ने दावा किया कि मध्य ईरान में इस्फहान के दक्षिण में समन्वित अभियान के दौरान अमेरिका के दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक सी-130 सैन्य परिवहन विमान को भी मार गिराया गया है। ईरानी अधिकारियों ने इस्फहान में नष्ट हुए अमेरिकी सैन्य विमान के मलबे की कई तस्वीरें और वीडियो भी जारी किए थे।

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इस्फहान क्यों है अहम?

इस्फहान को अक्सर “आधा विश्व” कहा जाता है और यह ईरान के ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण शहरों में गिना जाता है। यहां देश का सबसे बड़ा परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थित है, जहां यूरेनियम परिवर्तन और ईंधन निर्माण का काम होता है। ईरान का कहना है कि यह उसके नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए है, जबकि अमेरिका और इजरायल का आरोप है कि इसका उपयोग परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा यह इलाका रक्षा उत्पादन का भी बड़ा केंद्र है और यहां एक प्रमुख वायुसेना अड्डा भी है, जहां ईरान के एफ-14 टॉमकैट लड़ाकू विमानों का बेड़ा तैनात है।

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