Brazilian President Lula tells Trump after US tariff threat to BRICS We dont want an emperor किसी सम्राट की हुकूमत नहीं चाहिए, BRICS को धमकाने वाले ट्रंप को ब्राजील के राष्ट्रपति का जवाब, International Hindi News - Hindustan
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किसी सम्राट की हुकूमत नहीं चाहिए, BRICS को धमकाने वाले ट्रंप को ब्राजील के राष्ट्रपति का जवाब

ब्रिक्स देशों ने ट्रंप का नाम लिए बगैर टैरिफ वृद्धि और ईरान पर हमलों की रविवार को आलोचना की। ब्रिक्स के घोषणापत्र में इजराइल की सैन्य कार्रवाई की भी आलोचना की गयी लेकिन रूस की आलोचना से बचा गया।

Tue, 8 July 2025 08:12 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, रियो डी जेनेरियो
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किसी सम्राट की हुकूमत नहीं चाहिए, BRICS को धमकाने वाले ट्रंप को ब्राजील के राष्ट्रपति का जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा BRICS समूह को “अमेरिका विरोधी” बताए जाने के एक दिन बाद, सोमवार को इस संगठन के नेताओं ने उनके आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “दुनिया को किसी सम्राट की जरूरत नहीं है।”

खुलकर धमकी दे चुके हैं ट्रंप

ट्रंप पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर BRICS देश अमेरिकी डॉलर की भूमिका को वैश्विक व्यापार में कमजोर करने की कोशिश करते हैं, तो वे “100% टैरिफ” के शिकार होंगे। यह धमकी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी सरकार दर्जनों देशों के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। ट्रंप ने 9 जुलाई तक का समय तय किया था, जिसके बाद वे इन “जवाबी टैरिफ” को लागू करेंगे।

किसी सम्राट की हुकूमत नहीं चाहिए- लूला

BRICS शिखर सम्मेलन के समापन पर रियो में संवाददाताओं से बात करते हुए लूला ने कहा, “दुनिया बदल चुकी है। अब हमें किसी सम्राट की हुकूमत नहीं चाहिए।” उन्होंने कहा, “BRICS देशों का मकसद दुनिया को आर्थिक रूप से एक अलग तरीके से संगठित करना है। शायद यही वजह है कि कुछ लोग असहज महसूस कर रहे हैं।”

हालांकि BRICS की साझा मुद्रा लाने की योजना पर ब्राजील पहले ही पीछे हट चुका है, फिर भी लूला ने सोमवार को दोहराया कि वैश्विक व्यापार को केवल अमेरिकी डॉलर पर निर्भर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “दुनिया को एक ऐसा तरीका खोजने की जरूरत है जिससे हमारे व्यापारिक लेन-देन को डॉलर के रास्ते न गुजरना पड़े। लेकिन हमें यह काम सावधानी से करना होगा। हमारे केंद्रीय बैंकों को दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ इस पर चर्चा करनी चाहिए।”

अन्य BRICS नेताओं ने भी ट्रंप की धमकियों पर प्रतिक्रिया दी, हालांकि अपेक्षाकृत संयमित भाषा में। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि BRICS का उद्देश्य किसी अन्य वैश्विक शक्ति से प्रतिस्पर्धा करना नहीं है। उन्होंने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर आशावाद भी जताया।

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क्या बोला चीन और रूस

चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में कहा, “टैरिफ का इस्तेमाल दबाव डालने या जबरदस्ती के उपकरण के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि BRICS “सभी के लिए फायदे वाले सहयोग” को बढ़ावा देता है और “किसी देश को लक्षित नहीं करता।” रूस की ओर से क्रेमलिन के प्रवक्ता ने कहा कि BRICS के साथ रूस का सहयोग एक “साझा वैश्विक दृष्टिकोण” पर आधारित है और “यह कभी भी किसी तीसरे देश के खिलाफ निर्देशित नहीं होगा।” जैसे-जैसे ट्रंप के टैरिफ डेडलाइन की तारीख नजदीक आ रही है, BRICS और अमेरिका के बीच भू-आर्थिक तनाव गहराने की आशंका बढ़ रही है। पर फिलहाल, BRICS देश अपनी स्वतंत्र आर्थिक रणनीति के प्रति प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं- बिना किसी वैश्विक “सम्राट” के दबाव के।

ब्रिक्स देशों ने शुल्क वृद्धि, ईरान पर हमलों की निंदा की, ट्रंप ने किया पलटवार

ब्रिक्स देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बगैर शुल्क वृद्धि और ईरान पर हमलों की रविवार को आलोचना की। ब्रिक्स के घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में इजराइल की सैन्य कार्रवाई की भी आलोचना की गयी लेकिन रूस की आलोचना से बचा गया और युद्धग्रस्त यूक्रेन का महज एक बार जिक्र किया गया। दो दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में उसके दो सबसे शक्तिशाली देशों के नेता अनुपस्थित रहे। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2012 में देश का नेता बनने के बाद से पहली बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया। उनकी जगह चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग इसमें शामिल हुए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी वीडियो कांफ्रेंस के जरिए इसमें शामिल हुए। वह यूक्रेन पर हमले के बाद जारी एक अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट के कारण विदेशी यात्राओं से बचते हैं।

क्स देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बगैर शुल्क वृद्धि और ईरान पर हमलों की रविवार को आलोचना की। ब्रिक्स के घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में इजराइल की सैन्य कार्रवाई की भी आलोचना की गयी लेकिन रूस की आलोचना से बचा गया और युद्धग्रस्त यूक्रेन का महज एक बार जिक्र किया गया। दो दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में उसके दो सबसे शक्तिशाली देशों के नेता अनुपस्थित रहे। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 2012 में देश का नेता बनने के बाद से पहली बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया। उनकी जगह चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग इसमें शामिल हुए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी वीडियो कांफ्रेंस के जरिए इसमें शामिल हुए। वह यूक्रेन पर हमले के बाद जारी एक अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट के कारण विदेशी यात्राओं से बचते हैं।

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