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बांग्लादेश पर क्या बोल गए असम सीएम हिमंत शर्मा? तारिक सरकार ने भारत के दूत को किया तलब

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के 'विदेशी नागरिकों को वापस खदेड़ने' वाले बयान पर बांग्लादेश ने कड़ा विरोध जताया है। ढाका ने भारतीय कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब कर द्विपक्षीय संबंधों पर असर डालने वाले बयानों से बचने की नसीहत दी।

Fri, 1 May 2026 12:28 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, ढाका
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बांग्लादेश पर क्या बोल गए असम सीएम हिमंत शर्मा? तारिक सरकार ने भारत के दूत को किया तलब

हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा द्वारा की गई एक टिप्पणी को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस मामले में बांग्लादेश ने कड़ी आपत्ति जताते हुए भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया है और द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचाने वाले बयानों से बचने की हिदायत दी है। बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार है।

भारतीय राजनयिक को किया गया तलब: बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय (MoFA) ने ढाका में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बाधे को तलब किया।

ढाका ने स्पष्ट किया अपना रुख: विदेश मंत्रालय में महानिदेशक इशरत जहां ने पवन बाधे के साथ हुई बैठक के दौरान इस मुद्दे पर बांग्लादेश सरकार का आधिकारिक रुख भारत के सामने रखा।

क्या था विवादित बयान?: यह पूरा विवाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के 26 अप्रैल के एक बयान से जुड़ा है। शर्मा ने कहा था कि असम में 20 विदेशी नागरिकों को पकड़ा गया है और उन्हें वापस बांग्लादेश खदेड़ दिया गया है।

बांग्लादेश की कड़ी नाराजगी: एक कूटनीतिक सूत्र के अनुसार, बांग्लादेश ने मुख्यमंत्री की इन टिप्पणियों को भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को 'नीचा दिखाने वाला' करार दिया है और भारत के समक्ष अपनी गहरी अप्रसन्नता व्यक्त की है।

बांग्लादेश ने दी संयम बरतने की नसीहत

बैठक के दौरान बांग्लादेश की ओर से कुछ अहम बातों पर जोर दिया गया।

संबंधों पर असर: बांग्लादेश ने स्पष्ट किया कि ऐसे सार्वजनिक बयान दोनों पड़ोसी देशों के बीच के मधुर संबंधों में तनाव पैदा कर सकते हैं और ये पूरी तरह से गैर-जरूरी हैं।

संयम की आवश्यकता: ढाका ने इस बात का भी जिक्र किया कि दोनों देशों से जुड़े संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से बोलते समय हमेशा संयम बरता जाना चाहिए ताकि आपसी रिश्तों को कोई ठेस न पहुंचे।

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कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं

गौरतलब है कि राजनयिक स्तर पर भारतीय उच्चायुक्त को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराने के बावजूद, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय (MoFA) की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई भी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति या लिखित बयान जारी नहीं किया गया है। सारी जानकारी कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से सामने आई है।

गौरतलब है कि इससे पहले 25 अप्रैल को असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हर भारतीय का हित जुड़ा हुआ है क्योंकि बांग्लादेशी घुसपैठिए न केवल राज्य में जनसांख्यिकीय परिवर्तन ला रहे हैं बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी फैल रहे हैं। शर्मा ने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा को सत्ता में नहीं लाया गया तो राज्य में अनियंत्रित घुसपैठ के कारण ''बांग्लादेश का विस्तार'' होने का खतरा है।

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हालिया असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में 'बांग्लादेशी घुसपैठ' सबसे बड़ा और ध्रुवीकरण करने वाला चुनावी मुद्दा रहा है। पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेताओं और खासकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने घुसपैठ को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के लिए सीमा पार से अवैध घुसपैठियों को बसाया जा रहा है, जिससे इन राज्यों की डेमोग्राफी खतरनाक तरीके से बदल रही है। वहीं, असम में अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए सरमा ने 'मूल निवासियों की पहचान और माटी की रक्षा' को अपना मुख्य चुनावी हथियार बनाया।

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