दीपू चंद्र दास से प्रमोशन का था झगड़ा और मजहब का अपमान बताकर मार डाला? हैरान कर रहे खुलासे
दीपू चंद्र दास के परिवार के लोगों का कहना है कि उन्होंने पायनियर निटवियर्स कंपनी में प्रमोशन के लिए परीक्षा दी थी। फिलहाल वह फ्लोर मैनेजर के तौर पर काम कर रहे थे और यदि प्रमोशन हो जाता तो सुपरवाइजर हो जाते। कुछ लोगों को उनके प्रमोशन से आपत्ति थी और विवाद की एक वजह यह भी थी।

बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में 27 साल के हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की जिंदा जलाकर हत्या किए जाने के मामले में नए खुलासे हो रहे हैं। दीपू चंद्र दास को बेरहमी से मार डालने वाली भीड़ ने आरोप लगाया था कि उन्होंने उनके मजहब का अपमान किया है, लेकिन अब तक की जांच में पुलिस ने ऐसा कोई सबूत नहीं पाया है। यही नहीं दीपू चंद्र दास के परिवार के लोगों का कहना है कि उन्होंने पायनियर निटवियर्स कंपनी में प्रमोशन के लिए परीक्षा दी थी। फिलहाल वह फ्लोर मैनेजर के तौर पर काम कर रहे थे और यदि प्रमोशन हो जाता तो सुपरवाइजर हो जाते। कुछ लोगों को उनके प्रमोशन से आपत्ति थी और विवाद इसे लेकर भी था।
दीपू के भाई आपू रोबी ने कहा कि उनका प्रमोशन को लेकर अपने साथ काम करने वाले कई लोगों से मतभेद था। गुरुवार को दीपू चंद्र दास की हत्या हुई थी और उसी दिन दोपहर में उन्हें नौकरी से हटा दिया गया था। इसके बाद उनके खिलाफ मजहबी भावनाएं भड़काने के आरोप लगे। अपू ने कहा कि उन लोगों ने मेरे भाई को पीटा और फैक्टरी के बाहर फेंक दिया। उसने माफी भी मांगी और मिन्नतें की, लेकिन उसे छोड़ा नहीं गया। परिवार के अन्य लोग एवं स्थानीय लोगों ने भी प्रमोशन को लेकर विवाद की बात कही है। अपू ने कहा कि दीपू के दोस्त हिमेल ने उन्हें कॉल करके बवाल की जानकारी दी थी और कहा कि भीड़ उनके भाई को पुलिस थाने लेकर जा रही है।
भाई जब तक दौड़कर पहुंचा, दीपू को जलाकर मार डाला गया
उन्होंने कहा कि मेरे भाई आरोप लगाया गया कि उसने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अपशब्द कहे हैं। इसके कुछ देर बात ही मुझे हिमेल ने फिर से फोन किया और बताया कि मेरे भाई का कत्ल हो गया है। इसके बाद वह घटनास्थल की तरफ दौड़े तो पाया कि उनके भाई को जिंदा ही जला दिया गया है। अब तक पुलिस और रैपिड ऐक्शन बटालियन को मजहबी भावनाएं भड़काने का कोई सबूत नहीं मिला है। मेयमनसिंह जिले के एसपी अब्दुल्ला अल मामून ने कहा कि ईशनिंदा के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे आरोप भीड़ ने लगाए थे और अब तक इस बारे में कोई प्रमाण नहीं मिल सका है। हमें इन दावों की सत्यता के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है।

जांच अधिकारी ने कहा- अब तक कोई सबूत ऐसा नहीं मिला
इसके अलावा स्थानीय पुलिस थाना भालुका के प्रभारी मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने भी ऐसे सबूत मिलने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि हमारी जांच इस बात पर चल रही है कि आखिर फैक्ट्री के अंदर ऐसा क्या हुआ था, जिसके कारण ऐसी घटना को अंजाम दिया गया। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मौके पर ऐसा कोई नहीं मिला है, जो यह पुष्टि कर सके कि उसने मजहबी भावनाएं भड़काने वाला कोई बयान दिया है।
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