Amid War Now Iran warns UK says letting US use military bases is participation in aggression खबरदार! जो अपनी जमीं का इस्तेमाल... अब UK-ईरान में बढ़ी तनातनी; क्या यूरोप पहुंचने वाली है जंग?, International Hindi News - Hindustan
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खबरदार! जो अपनी जमीं का इस्तेमाल... अब UK-ईरान में बढ़ी तनातनी; क्या यूरोप पहुंचने वाली है जंग?

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की यह चेतावनी केवल बयानबाजी नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि यदि ब्रिटेन ने अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाया, तो ईरान उसे सीधे संघर्ष का एक पक्षकार मान सकता है और युद्ध की आग में घसीट सकता है।

Fri, 20 March 2026 10:35 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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खबरदार! जो अपनी जमीं का इस्तेमाल... अब UK-ईरान में बढ़ी तनातनी; क्या यूरोप पहुंचने वाली है जंग?

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अब कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। युद्धग्रस्त देश ईरान ने ब्रिटेन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति देता है, तो इसे “सीधे तौर पर युद्ध में भागीदारी” माना जाएगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने ब्रिटिश समकक्ष से बातचीत के दौरान ब्रिटेन के रुख की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़रायल के हमलों के प्रति ब्रिटेन का “नकारात्मक और पक्षपातपूर्ण” रवैया क्षेत्रीय तनाव को और भड़का रहा है। अराघची ने साफ शब्दों में ब्रिटेन को चेतावनी दी कि अमेरिकी सेना को ब्रिटिश ठिकानों का इस्तेमाल करने देना, ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने जैसा होगा।

ब्रिटेन की सफाई: सीमित और रक्षात्मक सहयोग

दूसरी ओर, ब्रिटेन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। लंदन स्थित डाउनिंग स्ट्रीट के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका को दी गई अनुमति “सीमित और विशुद्ध रूप से रक्षात्मक उद्देश्यों” के लिए है। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा, “हमने शुरुआती हमलों में हिस्सा नहीं लिया और न ही हम इस व्यापक युद्ध में शामिल होना चाहते हैं।”

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कीर स्टारमर की रणनीति पर सवाल

दरअसल, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में अहम मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने शुरू में अमेरिका के अनुरोध को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि ईरान पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो सकता है। हालांकि, बाद में जब ईरान की जवाबी कार्रवाई में मध्य-पूर्व स्थित ब्रिटिश सैन्य ठिकानों को खतरा हुआ, तो ब्रिटेन ने रक्षा सहयोग में अमेरिका का साथ दिया।

बढ़ती कूटनीतिक खाई

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की यह चेतावनी केवल बयानबाजी नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि यदि ब्रिटेन ने अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाया, तो ईरान उसे सीधे संघर्ष का एक पक्षकार मान सकता है और युद्ध की आग में घसीट सकता है। इससे पहले ही क्षेत्र में इज़रायल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। ऐसे में अगर यूरोपीय देश भी इसमें खिंचते हैं, तो यह लड़ाई और व्यापक रूप ले सकती है और इसमें NATO की एंट्री भी हो सकती है। लिहाजा, ईरान और ब्रिटेन के बीच बढ़ती तल्खी इस बात का संकेत है कि युद्ध अब केवल सैन्य मोर्चों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक कूटनीति को भी अपनी चपेट में ले रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ब्रिटेन कैसे संतुलन बनाए रख पाता है या ईरान के साथ उसका यह टकराव और गहरा होता है।

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