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बलूचिस्तान से सोना निकालेगा अमेरिका, मजबूर पाकिस्तान ने कर लिया समझौता; एक डर भी

बलूचिस्तान में चीन की मौजूदगी और उसकी ओर से चल रही परियोजनाओं का विरोध होता रहा है। ऐसी स्थिति में अब यहां अमेरिका की एंट्री से हालात और बिगड़ सकते हैं। पाकिस्तान ने जिस प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका से डील की है, उसे रेको डिक परियोजना कहा जा रहा है। यह पाकिस्तान और ईरान की सीमा पर स्थित है।

Fri, 6 Feb 2026 03:32 PMSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, इस्लामाबाद
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बलूचिस्तान से सोना निकालेगा अमेरिका, मजबूर पाकिस्तान ने कर लिया समझौता; एक डर भी

पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ 1.3 अरब डॉलर में एक डील कर ली है। इसके तहत वह अमेरिका को बलूचिस्तान प्रांत में सोना और कॉपर निकालने की अनुमति देगा। इस तरह पाकिस्तान के संवेदनशील इलाके बलूचिस्तान की धरती में मौजूद खजाने पर एक तरह से अमेरिका का कब्जा हो जाएगा। पहले ही बलूचिस्तान में चीन की मौजूदगी और उसकी ओर से चल रही परियोजनाओं का विरोध होता रहा है। ऐसी स्थिति में अब यहां अमेरिका की एंट्री से हालात और बिगड़ सकते हैं। पाकिस्तान ने जिस प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका से डील की है, उसे रेको डिक परियोजना कहा जा रहा है। यह पाकिस्तान और ईरान की सीमा पर स्थित है।

कुल 7 अरब डॉलर की इस परियोजना के तहत 2028 के अंत तक अमेरिका की ओर से सोना निकालने की शुरुआत हो सकती है। इस प्रोजेक्ट को कनाडा की कंपनी बैरिक माइनिंग की ओर से तैयार किया जा रहा है। इसमें पाकिस्तानी अथॉरिटीज भी साझेदार के तौर पर काम कर रही हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए अमेरिकी रकम EXIM यानी एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक ऑफ अमेरिका के माध्यम से प्राप्त होगी। इसके तहत अमेरिका बलूचिस्तान की जमीन में गड़े खजाने पर कब्जा करने की ओर कदम बढ़ा रहा है। हालांकि उसका कहना है कि हम पाकिस्तान के साथ आर्थिक रिश्तों को मजबूत कर रहे हैं।

बैरिक माइनिंग का कहना है कि इस परियोजना में उसकी 50 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा 25 फीसदी पर पाकिस्तान की तीन सरकारी कंपनियों का हिस्सा है। 25 फीसदी प्रोजेक्ट पर हक बलूचिस्तान सरकार का है। बता दें कि बलूचिस्तान में बलूच विद्रोही संगठन काफी गुस्से में हैं और बीते कई सालों से पाकिस्तानी प्रतिष्ठानों पर हमलावर हैं। कई बार उनकी ओर से चीनी नागरिकों को टारगेट करके भी हमले हुए हैं। अब यदि अमेरिका की भी यहां एंट्री हो रही है तो उसके लिए भी सुरक्षा से जुड़ी चिंता होगी। माइनिंग के इस प्रोजेक्ट के तहत रेलवे लाइन के भी विस्तार की तैयारी है। इसके लिए बलूचिस्तान से कराची तक के लिए कॉपर ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की जाएगी।

पाकिस्तान के लिए रेको डिक प्रोजेक्ट बेहद अहम है। उसे यहां से बड़े पैमाने पर कमाई होने की उम्मीद है। इसीलिए उसने कनाडा की कंपनी को काम सौंप कर तेजी से विकास कराना शुरू किया है। हालांकि बलूचिस्तान के मूल निवासियों के लिए यह चिंता की बात होगी। उनकी पहले ही शिकायत कर रही है कि देश के प्रशासन, राजनीति, सेना समेत अहम संस्थानों में पंजाबियों का वर्चस्व है। इसके अलावा संसाधनों के दोहन से बलूचिस्तान को कोई फायदा ना मिलने की भी उनकी चिंता है। ऐसी स्थिति में चीन, पाकिस्तान और अमेरिका की मौजूदगी पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी, यह देखने वाली बात है।

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