हिमाचल से गायब हो गई बारिश? 124 साल का टूटा रिकॉर्ड! सूखे ने बढ़ाई किसानों की टेंशन
मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, राज्य में पूरे दिसंबर महीने में महज 0.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं इसी समय में सामान्य औसत वर्षा 38.1 मिलीमीटर होती है। यानी इस बार बारिश में करीब 99 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई।

हिमाचल प्रदेश में दिसंबर 2025 का महीना बारिश के लिहाज से देखें तो काफी चिंता बढ़ाने वाला रहा है। मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, राज्य में पूरे दिसंबर महीने में महज 0.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं इसी समय में सामान्य औसत वर्षा 38.1 मिलीमीटर होती है। यानी इस बार बारिश में करीब 99 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई। ये जानकारी शिमला स्थित मौसम विज्ञान कार्यालय ने गुरुवार को दी।
124 सालों में छठी सबसे कम वर्षा हुई
आंकड़ों को गौर से देखें तो मालूम होता है कि दिसंबर 2025 में दर्ज की गई यह बारिश पिछले 124 वर्षों में छठी सबसे कम वर्षा है। 1901 से अब तक। इससे पहले दिसंबर महीने में पूरी तरह शून्य बारिश 1902, 1907, 1925, 1939 और 1993 में दर्ज की जा चुकी है। वहीं, दिसंबर 1929 में सबसे अधिक 176 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
दिसंबर में 3 दिन हुई हल्की-फुल्की बारिश
मौसम विभाग ने बताया कि दिसंबर 2025 में केवल तीन दिनों में ही कहीं-कहीं हल्की वर्षा या बर्फबारी देखने को मिली, जबकि बाकी पूरा महीना लगभग शुष्क रहा। इस दौरान ऊना जिले में 20 और 31 दिसंबर को कड़ाके की ठंड दर्ज की गई, जिससे जनजीवन भी प्रभावित हुआ।
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति को छोड़कर हिमाचल प्रदेश के बाकी 11 जिलों में दिसंबर के दौरान 100 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई। लाहौल-स्पीति में भी हालात बेहतर नहीं रहे और वहां 99 फीसदी वर्षा की कमी दर्ज की गई।
जानिए अक्टूबर से दिसंबर तक कैसी बारिश हुई
मौसम विभाग के अनुसार, पोस्ट मॉनसून सीजन यानी 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2025 के बीच हिमाचल प्रदेश में कुल 69.7 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य वर्षा 82.9 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। इस तरह पूरे पोस्ट मॉनसून सीजन में राज्य को 16 फीसदी बारिश की कमी का सामना करना पड़ा। यह अवधि भी 1901 के बाद से 58वीं सबसे कम वर्षा वाली रही।
अगर महीनेवार स्थिति देखें तो 2025 में अक्टूबर में राज्य को सामान्य से 173 फीसदी अधिक बारिश मिली थी, लेकिन इसके बाद हालात तेजी से बिगड़े। नवंबर में 95 फीसदी और दिसंबर में 99 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई, जिससे लगातार सूखा जैसे हालात बन गए।
सूखे के दौर से किसानों की बढ़ी चिंता
इस लंबे सूखे दौर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर सेब उत्पादकों की। विशेषज्ञों के मुताबिक, सेब की फसल के लिए बर्फ को ‘सफेद खाद’ माना जाता है, क्योंकि अच्छी पैदावार के लिए सेब के पौधों को पर्याप्त ‘चिलिंग ऑवर्स’ की जरूरत होती है। बर्फबारी और ठंड की कमी से आने वाले सीजन में सेब उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने आने वाले महीनों में स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है।
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