कौन हैं डॉ. अर्चना गुप्ता? हरियाणा में 43 साल बाद BJP ने महिला नेता को बनाया अध्यक्ष
Who is Haryana BJP Chief: अर्चना गुप्ता केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की करीबी मानी जाती हैं। वह पेशे से डॉक्टर हैं। अर्चना गुप्ता गोल्ड मेडलिस्ट रेडियोलॉजिस्ट हैं और पानीपत में इनका हॉस्पिटल भी है।

Haryana BJP President Dr. Archana Gupta: पानीपत की रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना गुप्ता को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हरियाणा भाजपा का अध्यक्ष बनाया है। वह मोहन लाल बडोली की जगह लेंगी। हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में 43 साल बाद कोई महिला नेता भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष बनी हैं। इनसे पहले 1980 में डॉ. कमला वर्मा हरियाणा में पार्टी की पहली महिला अध्यक्ष बनीं थी। डॉ. अर्चना गुप्ता अभी हरियाणा प्रदेश भाजपा की महामंत्री थी। इसके अलावा पानीपत जिले की बीजेपी महिला मोर्चा अध्यक्ष और पानीपल की बीजेपी जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं।
मनोहर लाल खट्टर की करीबी
अर्चना गुप्ता केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की करीबी मानी जाती हैं। वह पेशे से डॉक्टर हैं। अर्चना गुप्ता गोल्ड मेडलिस्ट रेडियोलॉजिस्ट हैं और पानीपत में इनका हॉस्पिटल भी है। अर्चना गुप्ता के पति डॉ. अनिल गुप्ता नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। डॉ. अर्चना के बेटे अविरल ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की है। वहीं उनकी बेटी आरुषी भी पेशे से डॉक्टर हैं। राजनीति में आने से पहले विश्व हिंदू परिषद की इंडियन हेल्थ लाइन में सक्रिय थीं। उसके बाद भाजपा महिला मोर्चा में एंट्री हुई। साल 2020 में पानीपत भाजपा की जिलाध्यक्ष बनीं। उनके बाद 2023 में प्रदेश महामंत्री बनीं। पानीपत से विधानसभा में टिकट की दावेदार भी थीं।
अर्चना गुप्ता को क्यों बनाया प्रदेश अध्यक्ष?
डॉ. अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे कई वजह हैं। एक वजह यह भी है कि वैश्य समाज को भाजपा का कैडर वोटर माना जाता है। खासकर शहरी इलाकों में यह वोटर निर्णायक है। इस वक्त वैश्य कोटे से सिर्फ विपुल गोयल ही कैबिनेट मंत्री हैं। पार्टी हाईकमान के इस फैसले को आगे की संगठनात्मक और राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्यों हुई बडौली की छुट्टी?
सोनीपत के मोहनलाल बडौली को अध्यक्ष पद से हटाने की चर्चा लंबे समय से चल रही थी। उनके और गायक रॉकी मित्तल के खिलाफ एक महिला द्वारा हिमाचल प्रदेश के कसौली में कथित गैंगरेप का मामला दर्ज कराया गया था। हालांकि पुलिस जांच में उन्हें फंसाने की साजिश और जबरन वसूली का मामला सामने आया और उन पर दर्ज एफआईआर रद्द कर दी गई, लेकिन इस विवाद से पार्टी की छवि काफी प्रभावित हुई थी।
वहीं, कुलदीप बिश्नोई सहित कई वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी बयानबाजी और खींचतान की खबरें लगातार सामने आ रही थीं, जिससे पार्टी में अंदरूनी कलह की स्थिति बनी हुई थी। बीजेपी नेतृत्व द्वारा संगठन में बड़ा बदलाव करने और महिला सशक्तीकरण का संदेश देने के उद्देश्य से भी यह कदम उठाया गया है।
रिपोर्ट: मोनी देवी
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