ठंड कहां गायब हो गई, रातें भी गर्म; गुजरात में मौसम चल रहा कौन सी नई चाल?
गुजरात में नलिया को छोड़ दिया जाए, तो राज्य का एक भी शहर ऐसा नहीं है जहां तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिरा हो। इससे लोगों और विशेषज्ञों के बीच यह चिंता बढ़ गई है कि क्या इस साल गुजरात में भीषण ठंड पड़ेगी भी या नहीं, और बदलते मौसम के मिजाज का क्या असर होगा।

गुजरात के गांवों से लेकर महानगरों तक, इन दिनों हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है कि इस साल कड़ाके की ठंड कहाँ गायब हो गई है? लोग हैरान हैं कि अब तक वैसी सर्दी महसूस क्यों नहीं हुई जैसी हर साल होती है। जब सर्दियों के मौसम की शुरुआत हुई थी, तब भविष्यवाणी की गई थी कि इस बार ठंड समय से पहले आ जाएगी। मौसम विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया था कि इस साल कड़ाके की ठंड केवल 30 दिनों तक सीमित रहेगी, मुख्य रूप से दिसंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक। हालांकि, दिसंबर खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन ठंड का नामोनिशान नहीं है।
गुजरात में नलिया को छोड़ दिया जाए, तो राज्य का एक भी शहर ऐसा नहीं है जहां तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिरा हो। इससे लोगों और विशेषज्ञों के बीच यह चिंता बढ़ गई है कि क्या इस साल गुजरात में भीषण ठंड पड़ेगी भी या नहीं, और बदलते मौसम के मिजाज का क्या असर होगा। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में स्काईमेट के वाइस प्रेसिडेंट महेश पलावत ने तसल्ली से जानकारी दी है।
नलिया को परंपरागत रूप से गुजरात का सबसे ठंडा स्थान माना जाता है, लेकिन इस बार यहां भी वैसी ठंड नहीं पड़ रही है। पिछले साल और इस साल के आंकड़ों की तुलना एक हैरान करने वाला बदलाव दिखा है। आंकड़ों के अनुसार, नलिया और राजकोट जैसे शहरों के औसत तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। वहीं अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा के तापमान में भी 1 डिग्री की बढ़त दर्ज की गई है। इसका सीधा मतलब है कि ठंड का प्रभाव कम हो गया है।
| शहर | पिछले साल (ठंडे दिन) | इस साल (अब तक) | स्थिति |
|---|---|---|---|
| अहमदाबाद | 14 दिन | 10 दिन | 4 दिन की कमी |
| राजकोट | 17 दिन | 15 दिन | 2 दिन की कमी |
| सूरत | पिछले साल से अधिक | - | 5 दिन की कमी |
| वडोदरा | 1 दिन | 0 दिन | एक भी ठंडा दिन नहीं |
| नलिया | सिंगल डिजिट (10 से कम) | 10°C से ऊपर | तापमान 10 से नीचे नहीं गया |
नलिया में आमतौर पर पारा 10 डिग्री से नीचे चला जाता है, लेकिन इस साल एक बार भी ऐसा नहीं हुआ। वडोदरा में इस सीजन में अब तक एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब तापमान 15 डिग्री या उससे नीचे गया हो। स्काईमेट वेदर के महेश पलावत ने पिछले साल और इस साल के मौसम के मिजाज की तुलना करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें बताईं
1. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) की कमी: पिछले साल की तरह इस साल भी पश्चिमी विक्षोभ बहुत कम आए हैं। जब तक ये आने शुरू हुए, तब तक आधा दिसंबर बीत चुका था। इसके कारण पहाड़ों पर उम्मीद के मुताबिक बर्फबारी नहीं हुई, जिसका सीधा असर उत्तर भारत में आने वाली ठंडी हवाओं पर पड़ा।
2. हवाओं का रुख और सर्दी की शुरुआत: सामान्यतः, पहाड़ों पर बर्फबारी के बाद ठंडी हवाएं दक्षिण की ओर बढ़ती हैं। इससे राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में तापमान गिरता है और सर्दी शुरू होती है। लेकिन इस साल बर्फबारी में देरी के कारण यह प्रक्रिया रुक गई है।
3. सर्दियों की घटती अवधि: पलावत ने एक चिंताजनक बदलाव की ओर इशारा किया कि पहले सर्दियां लगभग 60 दिनों तक रहती थीं। हाल के वर्षों में यह घटकर केवल 30 दिन रह गई हैं। इस साल यह अवधि और भी कम होने की आशंका है।
अब आगे क्या उम्मीद है?
पहले उम्मीद थी कि दिसंबर के पहले या दूसरे हफ्ते में बर्फबारी शुरू हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब 23 दिसंबर के आसपास एक 'पश्चिमी विक्षोभ' आने की संभावना है, जिससे पहाड़ों पर बर्फ गिर सकती है और अंततः गुजरात सहित अन्य राज्यों में ठंड महसूस की जा सकती है।
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