गुजरात में नए अत्याधुनिक बूचड़खाने का प्रस्ताव रद्द, MLA ने विचारधारा के खिलाफ बता किया था विरोध
इस प्रस्तावित अत्याधुनिक बूचड़खाने में डॉक्टरों की चौबीसों घंटे उपलब्धता, मौत से पहले जानवरों की जांच के लिए एक कमरा, कोल्ड स्टोरेज, पशुओं के परिवहन के लिए वातानुकूलित वाहन जैसी सुविधाएं बनना थीं।
गुजरात के अहमदाबाद शहर में बनने वाले नए बूचड़खाने के प्रस्ताव को अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने वापस ले लिया है। AMC ने वित्त वर्ष 2026-27 के मसौदा बजट में इस प्रस्तावित बूचड़खाने के लिए 32 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था, लेकिन गुरुवार को एक भाजपा विधायक के कड़े विरोध और पार्टी की विचारधारा का हवाला दिए जाने के बाद निगम ने इस प्रावधान को भी वापस लेने की घोषणा कर दी। फिलहाल शहर के गीता मंदिर क्षेत्र में एक बूचड़खाना चल रहा है, और नए आधुनिक बूचड़खाने के बनने के बाद उसे वहीं शिफ्ट करने का प्लान था।
नगर निगम आयुक्त बंछानिधि पाणि द्वारा प्रस्तुत बजट ड्राफ्ट के अनुसार शहर के बाहरी इलाके (शाहवाड़ी-बहरामपुरा) में 15,882 वर्ग मीटर भूमि पर एक अत्याधुनिक बूचड़खाना बनाने का प्रस्ताव था। बूचड़खाने के लिए इतनी बड़ी जमीन सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार निर्धारित की गई थी। जिस पर 32 करोड़ रुपए की लागत आनी थी।
इस प्रस्तावित अत्याधुनिक बूचड़खाने में डॉक्टरों की चौबीसों घंटे उपलब्धता, मौत से पहले जानवरों की जांच के लिए एक कमरा, कोल्ड स्टोरेज (चिलिंग प्लांट), पशुओं के परिवहन के लिए वातानुकूलित वाहन और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 'एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट' (ETP) जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं शामिल थीं। ETP को बनाने का मकसद इसे पर्यावरण के अनुकूल और स्वच्छ सुविधा बनाना था।
विधायक ने प्रस्ताव को बताया पार्टी विचारधारा के खिलाफ
नगर निगम आयुक्त बंछानिधि पाणि द्वारा बजट पेश किए जाने के तुरंत बाद, एलिसब्रिज से भाजपा विधायक और पूर्व महापौर अमित शाह ने इस योजना पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट उनकी पार्टी की विचारधारा के खिलाफ है। इस दौरान बुधवार को म्युनिसिपल कमिश्नर को लिखे एक संदेश में पूर्व मेयर ने मांग की कि स्टैंडिंग कमेटी द्वारा बजट को अंतिम रूप देने से पहले इस आवंटन को वापस ले लिया जाए।

शाह बोले- दबाव के बाद भी मैंने नहीं माना था प्रस्ताव
इस बारे में जानकारी देते हुए शाह ने पत्रकारों से कहा, 'मैं नया बूचड़खाना बनाने के प्रस्ताव के खिलाफ हूं क्योंकि यह पूरी तरह से भाजपा के वैचारिक रुख के खिलाफ है। जब मैं मेयर था, तब भी प्रशासन से इसी तरह का एक प्रस्ताव आया थास जिसमें कहा गया था कि केंद्र ने इसके लिए फंड आवंटित किया है। लेकिन दबाव के बावजूद, मैंने इसे स्वीकार नहीं किया था। इस बार भी, मुझे यकीन है कि मेरी पार्टी का नेतृत्व इस काम के लिए अपनी मंजूरी नहीं देगा।'
उधर विवाद बढ़ने के बाद गुरुवार को नगर निगम आयुक्त पाणि ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया बूचड़खाना नहीं था, बल्कि पुराने को शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन केवल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और पर्यावरण मंत्रालय से मिले दिशानिर्देशों का पालन करने की कोशिश कर रहा था ताकि स्वच्छता और पर्यावरण नियमों को बनाए रखा जा सके। इसीलिए इसे शहर के बाहर शिफ्ट करने का प्रस्ताव था। उन्होंने कहा, लेकिन क्योंकि यह एक संवेदनशील मुद्दा है, इसलिए प्रस्ताव वापस ले लिया गया है और हमने स्टैंडिंग कमेटी को भी इस बारे में बता दिया है।
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