बड़ा खुलासा! आपका कौन सा डाटा विदेश भेज रहा है फोन? क्या मिली पूरी खबर
भारत में बिकने वाले स्मार्टफोन्स कुछ डाटा सर्वर तक भेजते हैं, जो कई मामलों में भारत के बाहर मौजूद होते हैं। हालांकि बिना परमिशन पर्सनल डाटा बाहर नहीं भेजा जाता।

भारत में बिकने वाले ज्यादातर सस्ते स्मार्टफोन एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करते हैं और इनमें कई सिस्टम-लेवल सर्विसेज पहले से इंस्टॉल होती हैं। ये सेवाएं फोन को अपडेट रखने, सिक्योरिटी बनाए रखने और परफॉर्मेंस सुधारने के लिए इंटरनेट की मदद से सर्वर से जुड़ती हैं। कई मामलों में ये सर्वर भारत के बाहर होते हैं इसलिए कुछ डाटा देश से बाहर ट्रांसफर हो सकता है। आइए आपको बताएं कि कौन सा डाटा फोन से विदेश भेजा जाता है।
सबसे पहले तो आपका फोन अपने हार्डवेयर और पहचान से जुड़ी जानकारी सर्वर तक भेज सकता है। इसमें डिवाइस का मॉडल, ऑपरेटिंग सिस्टम का वर्जन, हार्डवेयर ID और कुछ मामलों में IMEI जैसी पहचान शामिल होती है। इस डाटा का इस्तेमाल आम तौर पर सिस्टम अपडेट, डिवाइस मैनेजमेंट और सिक्योरिटी से जुड़े कामों के लिए किया जाता है।
फोन की मौजूदा सेटिंग्स और ऐप्स
आपके फोन से नेटवर्क और तकनीकी इस्तेमाल से जुड़ा डाटा भी भेजा जा सकता है। इसमें यह जानकारी शामिल होती है कि फोन किस मोबाइल नेटवर्क या WiFi से जुड़ा है, नेटवर्क की क्वॉलिटी कैसी है और फोन के इस्तेमाल के दौरान कोई तकनीकी दिक्कत तो नहीं आ रही। यह डाटा फोन की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने और तकनीकी दिक्कतों को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
फोन यह जानकारी भी सर्वर तक भेज सकता है कि आपके डिवाइस में कौन-कौन से ऐप इंस्टॉल हैं और वे कितनी बार यूज हो रहे हैं। यह डाटा आम तौर पर सिस्टम एनालिटिक्स के रूप में भेजा जाता है और इससे कंपनियों को यह समझने में मदद मिलती है कि फोन पर कौन-सी सेवाएं ज्यादा या कम इस्तेमाल हो रही हैं।
अगर आपने किसी ऐप या सिस्टम फीचर को लोकेशन एक्सेस की परमिशन दी है, तो आपकी लोकेशन से जुड़ा डाटा भी सर्वर तक जा सकता है। यह आमतौर पर मैप्स, वेदर या ट्रैवल से जुड़े ऐप्स की मदद से होता है। बिना परमिशन के लोकेशन डाटा भेजे जाने का कोई पब्लिक और वैलिड प्रूफ नहीं है।
पर्सनल डाटा भी हो सकता है स्टोर
जब आप क्लाउड बैकअप या सिंक जैसे फीचर्स इनेबल करते हैं तब आपका कुछ पर्सनल डाटा भी सर्वर पर स्टोर होता है। इसमें फोटो, वीडियो, कॉन्टैक्ट या अन्य फाइलें शामिल हो सकती हैं। कई बार इन क्लाउड सर्विसेज के सर्वर भारत के बाहर होते हैं, इसलिए आपकी सहमति से यह डाटा विदेश में स्टोर हो सकता है।
इसके अलावा, फोन आपके ऐप इस्तेमाल करने के तरीके से जुड़ा डाटा भी भेज सकता है। इसमें यह शामिल होता है कि आप कौन-सा ऐप कितनी देर इस्तेमाल करते हैं या कितनी बार ओपेन करते हैं। यह जानकारी आमतौर पर एनालिटिक्स के तौर पर इस्तेमाल की जाती है और इससे ऐप या सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
बिना परमिशन नहीं शेयर होता डाटा
समझना जरूरी है कि फोन अपनेआप कोई पर्सनल डाटा, फोटो, चैट मेसेज या अन्य जानकारी सर्वर पर या विदेश नहीं भेजते। यह डाटा तभी ट्रांसफर होता है, जब आप पर्सनल जानकारी शेयर करने की परमिशन देते हैं। इसके अलावा भारत में डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन लॉ के चलते कंपनियों के लिए बताना अनिवार्य है कि वे कौन सा डाटा कलेक्ट कर रही हैं और उसे भारत से बाहर भेजा जा रहा है या नहीं।
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