युद्ध की वजह से ठप हो सकता है इंटरनेट! सबसे बड़े खतरे के लिए सरकार भी तैयार Undersea Cable Threats Explained How India is Preparing for Internet Disruptions Amid Global Tensions, Gadgets Hindi News - Hindustan
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युद्ध की वजह से ठप हो सकता है इंटरनेट! सबसे बड़े खतरे के लिए सरकार भी तैयार

मध्य-पूर्व तनाव के बीच अंडरसी केबल्स पर खतरा बढ़ने से भारत के इंटरनेट नेटवर्क पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और टेलीकॉम कंपनियां बैकअप प्लान और वैकल्पिक रूट्स पर तेजी से काम कर रही हैं।

Fri, 27 March 2026 10:22 PMPranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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युद्ध की वजह से ठप हो सकता है इंटरनेट! सबसे बड़े खतरे के लिए सरकार भी तैयार

इंटरनेट आज के तौर में जितना 'वायरलेस' दिखता है, हकीकत में वह उतना ही केबल्स पर आधारित है। ग्लोबल डेटा ट्रैफिक का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक लाइनों यानी अंडरसी केबल्स की मदद से चलता है। भारत भी इसी नेटवर्क पर काफी हद तक, खासकर यूरोप, अमेरिका और मिडिल-ईस्ट के साथ डाटा कनेक्टिविटी के लिए निर्भर है। ऐसे में ईरान-इजराइल युद्ध के चलते मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ने से इन केबल्स पर खतरा भी बढ़ गया है। इसका सीधा मतलब है कि भारत में इंटरनेट ठप हो सकता है।

भारत के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह यह है कि उसके कई अहम इंटरनेट रूट्स मौजूदा युद्ध के चलते संवेदनशील बन चुके इलाकों जैसे- रेड सी (Red Sea) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से होकर गुजरते हैं। अगर किसी सैन्य कार्रवाई, दुर्घटना या जानबूझकर किए गए हमले में इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है तो इंटरनेट स्पीड में गिरावट, नेटवर्क लेटेंसी और यहां तक कि कुछ सेवाओं के पूरी तरह बाधित होने की स्थिति बन सकती है। इसका असर सिर्फ वीडियो स्ट्रीमिंग या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बैंकिंग, UPI पेमेंट्स, क्लाउड सर्विसेज और कॉर्पोरेट नेटवर्क भी प्रभावित हो सकते हैं।

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भारत सरकार ने शुरू कर दी तैयारी

खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। टेलीकॉम कंपनियों और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने नेटवर्क का रिस्क एनालिसिस करें और संभावित संकट की स्थिति में 'फॉलबैक' यानी बैकअप विकल्प तैयार रखें। इसका मतलब है कि अगर एक रूट बाधित होता है, तो डाटा ट्रैफिक को दूसरे रास्तों से डायवर्ट किया जा सके।

हालांकि, यह काम इतना आसान नहीं है। वैकल्पिक रूट्स जैसे- सिंगापुर या पैसिफिक के रास्ते पहले से ही भारी ट्रैफिक संभाल रहे हैं। उनपर अचानक ढेर सारा ट्रैफिक शिफ्ट करने से स्पीड कम हो सकती है और कॉस्ट बढ़ सकती है। इसके अलावा, पूरी तरह से स्मूद सर्विस बनाए रखना भी आसान नहीं होगा। फिर भी बैकअप सिस्टम यह तय करते हैं कि पूरी तरह इंटरनेट ब्लैकआउट की स्थिति ना बने।

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नई रणनीति पर काम करने की जरूरत

सरकार का फोकस अब सिर्फ क्विक सॉल्यूशन पर नहीं, बल्कि लंबी वक्त की स्ट्रेटजी पर भी है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी को मजबूत करने, नए केबल रूट्स विकसित करने और डेटा रिडंडेंसी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर नेटवर्क को ज्यादा फ्लेक्सिबल बनाने की कोशिश जरूरी है, जिससे भविष्य में किसी भी जियो-पॉलिटिकल संकट का असर कम से कम हो।

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