स्मार्टफोन में Aadhaar App प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं, सरकार ने रद्द किया प्रस्ताव Govt drop proposal to mandate pre installation of aadhaar app on smartphones, Gadgets Hindi News - Hindustan
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स्मार्टफोन में Aadhaar App प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं, सरकार ने रद्द किया प्रस्ताव

भारत सरकार ने उस प्रस्ताव पर आगे न बढ़ने का फैसला किया है, जिसके तहत Apple, Samsung और अन्य दूसरी स्मार्टफोन कंपनियों के लिए अपने फोन में आधार ऐप प्री-इंस्टॉल करना जरूरी होता; इस कदम का इन बड़ी स्मार्टफोन कंपनियों ने विरोध किया था।

Sat, 18 April 2026 09:39 AMArpit Soni लाइव हिन्दुस्तान
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स्मार्टफोन में Aadhaar App प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं, सरकार ने रद्द किया प्रस्ताव

स्मार्टफोन्स में Aadhaar App अनिवार्य करने के प्रस्ताव का लगातार विरोध झेलने के बाद सरकार में इस प्रस्ताव को अब वापस लेने का फैसला किया है। यानी अब स्मार्टफोन कंपनियों के फोन में आधार ऐप प्री-इंस्टल करना जरूरी नहीं होगा। दरअसल, एक सरकारी संस्था ने बताया कि भारत सरकार ने उस प्रस्ताव पर आगे न बढ़ने का फैसला किया है, जिसके तहत Apple, Samsung और अन्य दूसरी स्मार्टफोन कंपनियों के लिए अपने फोन में आधार ऐप प्री-इंस्टॉल करना जरूरी होता; इस कदम का इन बड़ी स्मार्टफोन कंपनियों ने विरोध किया था।

रॉयटर्स ने पिछले महीने बताया था कि UIDAI, जो आधार का संचालन करने वाली सरकारी संस्था है, ने जनवरी में IT मंत्रालय से Apple, Google और अन्य प्रमुख स्मार्टफोन निर्माताओं के साथ बातचीत करने को कहा था, ताकि आधार ऐप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य बनाने पर विचार किया जा सके। आधार एक 12-अंकों का यूनिक आइडेंटिटी नंबर है जो किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन से जुड़ा होता है और यह लगभग 1.34 अरब भारतीयों के पास है और इसका इस्तेमाल बड़े स्तर पर बैंकिंग समेत अन्य सुविधाओं में वेरिफिकेशन के लिए और हवाई अड्डों पर तेजी से प्रवेश पाने के लिए भी किया जाता है।

UIDAI ने शुक्रवार को रॉयटर्स को दिए एक बयान में कहा कि भारत के IT मंत्रालय ने इस प्रस्ताव की समीक्षा की है और वह "स्मार्टफोन पर आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य बनाने के पक्ष में नहीं है।" हालांकि, बयान में इस फैसले की कोई वजह नहीं बताई गई।

आधार ने दो साल में 6 बार प्रयास किया

UIDAI ने अपने बयान में कहा कि IT मंत्रालय ने आधार प्री-इंस्टॉलेशन प्रस्ताव को रद्द करने का फैसला लेने से पहले "इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के स्टेकहोल्डर्स के साथ परामर्श" किया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, आधार का यह अनुरोध पिछले दो सालों में छठी बार था जब सरकार ने फोन पर सरकारी ऐप्स को पहले से इंस्टॉल करने की मांग की थी। इन सभी छह प्रयासों का स्मार्टफोन कंपनियों ने विरोध किया था।

स्मार्टफोन कंपनियों ने दिया यह तर्क

रॉयटर्स द्वारा देखे गए दस्तावेजों के अनुसार, जब स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों को आधार प्रीलोड का प्रस्ताव मिला, तो उन्होंने डिवाइस की सुरक्षा और कम्पैटिबिलिटी को लेकर चिंता जताई। साथ ही, उन्होंने प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने की बात भी कही, क्योंकि उन्हें भारत और निर्यात बाजारों के लिए अलग-अलग मैन्युफैक्चरिंग लाइनें चलानी पड़तीं। मार्च में सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि सेफ्टी और सिक्योरिटी से जुड़े सवालों के कारण, विशेष रूप से Apple और Samsung दोनों को ही इस प्रस्ताव को लेकर चिंताएँ थीं।

सरकार का इस प्रस्ताव पर आगे न बढ़ने का फैसला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल अभियान पर मौजूद सीमाओं को दिखाता है। यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत, Apple जैसी कंपनियों को आकर्षित करके एक वैश्विक स्मार्टफोन हब के तौर पर अपनी भूमिका का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। दिसंबर में, भारत को एक ऐसे आदेश को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा था, जिसमें स्मार्टफोन कंपनियों के लिए एक टेलीकॉम सिक्योरिटी ऐप को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य किया गया था; इस आलोचना के चलते कुछ ही दिनों के भीतर सरकार को यह आदेश वापस लेना पड़ा।

एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने शुक्रवार को नाम न छापने की शर्त पर कहा कि IT मंत्रालय ऐप्स के किसी भी प्री-लोडिंग का समर्थन नहीं करता है, “जब तक कि इसे बहुत जरूरी न माना जाए।”

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