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क्या है साउथ पार्स गैस फील्ड, जिसे खाक में मिलाने को तैयार ट्रंप; पूरी दुनिया पर मंडराया संकट

जानिए क्या है साउथ पार्स गैस फील्ड जिसे पूरी तरह नष्ट करने की चेतावनी ट्रंप ने दी है। इजरायल-ईरान युद्ध के बीच मिडिल ईस्ट में गहराए ऊर्जा संकट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और इसके वैश्विक प्रभाव की पूरी जानकारी।

Thu, 19 March 2026 09:54 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, दोहा
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क्या है साउथ पार्स गैस फील्ड, जिसे खाक में मिलाने को तैयार ट्रंप; पूरी दुनिया पर मंडराया संकट

मार्च के मध्य तक आते-आते अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध एक बेहद खतरनाक मोड़ ले चुका है। यह टकराव अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि 'वैश्विक ऊर्जा युद्ध' में तब्दील हो गया है। अब इस पूरे संकट के केंद्र में है- साउथ पार्स गैस फील्ड। हाल ही में इजरायल द्वारा इस गैस फील्ड पर किए गए हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बेहद कड़ी चेतावनी दी है। आइए इस गैस फील्ड की अहमियत और वैश्विक संकट के कारणों को विस्तार से समझते हैं।

क्या है साउथ पार्स गैस फील्ड?

साउथ पार्स गैस फील्ड कोई आम ऊर्जा भंडार नहीं है, बल्कि यह दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार है। यह फारस की खाड़ी में स्थित है और इसे ईरान और कतर आपस में साझा करते हैं। कतर में इसके हिस्से को 'नॉर्थ फील्ड' कहा जाता है। यहां अनुमानित 1800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट करीब 51 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर गैस का भंडार है, जो दुनिया के कुल गैस रिजर्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। यह फील्ड ईरान की घरेलू गैस आपूर्ति का लगभग 70% हिस्सा पूरा करता है और उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। वहीं, कतर का वैश्विक LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) निर्यात भी इसी पर टिका है।

ऊर्जा युद्ध की शुरुआत

मार्च के तीसरे हफ्ते में युद्ध ने तब भयानक रूप ले लिया जब ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाने लगा। 18 मार्च को इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड और अजलुयेह स्थित रिफाइनरियों पर हमला कर दिया। इस हमले से बौखलाए ईरान ने खाड़ी देशों (कतर, यूएई और सऊदी अरब) के ऊर्जा ठिकानों को 'वैध लक्ष्य' घोषित कर दिया। ईरान ने कतर के रास लफान LNG प्लांट और यूएई के शाह गैस फील्ड पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे वहां भीषण आग लग गई। ईरान ने वैश्विक तेल व्यापार के सबसे अहम रास्ते, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से होने वाले परिवहन को लगभग ठप कर दिया है।

डोनाल्ड ट्रंप की 'रेड लाइन' और चेतावनी

इस घटनाक्रम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर स्थिति स्पष्ट की और ईरान को अब तक की सबसे सख्त चेतावनी दी। ट्रंप ने साफ किया कि इजरायल द्वारा साउथ पार्स पर किए गए हमले की अमेरिका और कतर को पहले से कोई जानकारी नहीं थी और वे ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के खिलाफ हैं। ट्रंप ने एक स्पष्ट 'रेड लाइन' खींचते हुए कहा कि यदि ईरान ने 'निर्दोष कतर' के LNG संयंत्रों पर दोबारा हमला किया, तो अमेरिका "साउथ पार्स गैस फील्ड को पूरी तरह से खाक में मिला देगा। उन्होंने कहा कि यह हमला इतनी ताकतवर होगा जो ईरान ने पहले कभी नहीं देखा होगा। हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि वह इतने बड़े पैमाने पर विनाश नहीं चाहते क्योंकि इसके दीर्घकालिक परिणाम होंगे, लेकिन कतर पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

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पूरी दुनिया पर क्यों मंडरा रहा है संकट?

इस ऊर्जा युद्ध का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। पूरी दुनिया इसके आर्थिक झटके महसूस कर रही है। हमले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110-116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। यूरोप में गैस के दाम भी 7.5% तक उछल गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और LNG गुजरता है। इसके बाधित होने से वैश्विक सप्लाई चैन चरमरा गई है। यदि साउथ पार्स या कतर के LNG संयंत्रों को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो इसे सुधारने में सालों लग सकते हैं। न्यूजीलैंड जैसे देशों ने ईंधन संकट गहराने की चेतावनी दी है और अमेरिका में भी डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

सैन्य युद्ध अब एक आर्थिक और ऊर्जा युद्ध में बदल चुका है। साउथ पार्स गैस फील्ड सिर्फ ईरान की नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार की धुरी है। यदि ट्रंप की चेतावनी के अनुरूप इस फील्ड को नष्ट किया जाता है, तो दुनिया भर में ऊर्जा का अभूतपूर्व संकट और भयानक महंगाई देखने को मिल सकती है।

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