अमेरिका और ईरान के बीच कैसे आया पाकिस्तान? भारत पर कितना असर; एक्सपर्ट्स से समझें
लाइव हिन्दुस्तान ने इस मसले पर असिस्टेंट प्रोफेसर विमल कश्यप की राय भी जानी। इस संबंध में कैप्टन आलोक बंसल ने साफ किया कि इस मामले को भारत से जोड़ना ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की भूमिका अलग है और उससे भारत की स्थिति किसी तरह से कमजोर नहीं होती।
पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने प्रस्ताव दिया है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। यही नहीं उनकी ओर से पाकिस्तान के ही किसी शहर में सुलह वार्ता कराने का प्रस्ताव तक रखा गया है। कहा यह भी जा रहा है कि उन्होंने अमेरिका की ओर से सुलह का प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया है। अब तक ईरान के तेवर गरम हैं, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि युद्ध को यहीं विराम देना अमेरिका की जरूरत है तो ईरान के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस बीच भारत में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत सरकार ने इस मामले में रिएक्शन में देरी की।
कांग्रेस ने तो पाकिस्तान के मध्यस्थ बन जाने और आसिम मुनीर को महत्व मिलने को लेकर मोदी सरकार को घेरा है। इसी मसले को लेकर हमने अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इंडिया फाउंडेशन के निदेशक कैप्टन आलोक बंसल से बात की। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर विमल कश्यप की राय भी जानी। इस संबंध में कैप्टन आलोक बंसल ने साफ किया कि इस मामले को भारत से जोड़ना ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की भूमिका अलग है और उससे भारत की स्थिति किसी तरह से कमजोर नहीं होती।
कैप्टन आलोक बंसल ने कहा, ‘पाकिस्तान के लिहाज से देखा जाए तो यह उनके लिए बड़ी सफलता है, लेकिन इसे भारत से जोड़ना ठीक नहीं है। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अमेरिका के गुड बुक्स में हैं। डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि यह जंग जल्दी ही खत्म हो। खाड़ी देशों के साथ भी पाकिस्तान का एक रिश्ता इस्लाम को लेकर है। इसलिए उस पर दबाव है कि वह मध्यस्थता करे। 1970 में पाकिस्तान भी ऐसा कर चुका है। उसकी ही मध्यस्थता में अमेरिका और चीन करीब आए थे। इसे क्या भारत के लिए झटका मानना चाहिए? इस पर कैप्टन आलोक बंसल ने कहा कि ऐसा कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। इतने शुरुआती स्तर पर भारत की भूमिका और प्रभाव के बारे में बात करना सही नहीं होगा।’
'भारत की भूमिका अहम, पर शीत युद्ध से ही पाकिस्तान की ऐसी स्थिति'
यही सवाल जब विमल कश्यप से किया गया तो उन्होंने भी पाकिस्तान के इतिहास का हवाला दिया और कहा कि शीत युद्ध में भी ऐसा होता रहा है। उन्होंने कहा, ‘शीत युद्ध के दौर से ही पाकिस्तान को थोड़ी बढ़त अमेरिका के मामले में रही है। इससे यह साबित होता है कि पाकिस्तान अब भी अमेरिका के लिए काम का है। ऐसा लग रहा है कि रणनीतिक महत्व पाकिस्तान का बना हुआ है। इसके अलावा सऊदी अरब और ईरान में सहयोग कराने की कोशिश चीन ने की थी। अब वह जब तस्वीर से बाहर है तो यह नहीं कहा जा सकता कि उसकी भूमिका समाप्त हो गई है। इसी तरह भारत के लिए भी यह कहना सही है कि उसकी भूमिका बनी हुई है। वहीं पाकिस्तान की यह ताकत के साथ ही मजबूरी भी है कि वह अमेरिका को इनकार नहीं कर सकता। इसके अलावा यह भी स्पष्ट होता है कि अब भी वह अमेरिका के लिए प्राथमिकता में है।’
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन