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यूक्रेन से लेकर खाड़ी देशों तक खौफ! कैसे 16 लाख के ईरानी ड्रोन ने पलट दिया युद्ध का पूरा गणित?

जानिए कैसे ईरान के सस्ते 'शाहेद-136' और कामिकेज ड्रोन्स यूक्रेन से लेकर लाल सागर तक आधुनिक युद्ध की तस्वीर बदल रहे हैं। महाशक्तियों के लिए ये 'सस्ते' हथियार क्यों बने बड़ा सिरदर्द? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Tue, 3 March 2026 09:35 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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यूक्रेन से लेकर खाड़ी देशों तक खौफ! कैसे 16 लाख के ईरानी ड्रोन ने पलट दिया युद्ध का पूरा गणित?

आधुनिक युद्ध के बारे में जब हम सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में अक्सर अरबों डॉलर के स्टील्थ फाइटर जेट जैसे F-35 या Su-57, परमाणु पनडुब्बियों और लेजर-गाइडेड मिसाइलों की तस्वीर उभरती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, युद्ध के मैदान की यह तस्वीर एक बहुत ही साधारण, सस्ते और धीमी गति से उड़ने वाले हथियार ने बदल दी है- ईरानी ड्रोन।

स्कूटर के इंजन जैसी आवाज करने वाले ये आत्मघाती (Kamikaze) ड्रोन आज यूक्रेन के बर्फीले मैदानों से लेकर मध्य पूर्व और लाल सागर के गर्म पानी तक, भू-राजनीति और सैन्य रणनीतियों को फिर से लिख रहे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि ईरान के ये सस्ते ड्रोन दुनिया के लिए इतनी बड़ी चुनौती क्यों बन गए हैं।

हथियार जिसने खींचा दुनिया का ध्यान: शाहेद-136

यूक्रेन में पिछले कुछ वर्षों से तबाही मचाने वाले ईरानी 'शाहेद' ड्रोन की विशिष्ट गूंज अब फारस की खाड़ी के आसमान में भी आम हो गई है। अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में तेहरान ने कई खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए इन ड्रोन्स से बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। शाहेद ड्रोन्स ने आधुनिक युद्ध की तस्वीर बदल कर रख दी है। यह निगरानी, सटीक हमले और AI-सक्षम टारगेटिंग का एक घातक संयोजन है।

ईरान का सबसे चर्चित ड्रोन 'शाहेद-136' है। यह एक डेल्टा-विंग (त्रिकोणीय) आकार का कामिकेज या सुसाइड ड्रोन है। यह मिसाइल की तरह काम करता है। इसमें जीपीएस (GPS) लगा होता है और यह अपने लक्ष्य पर जाकर सीधा टकरा जाता है (जिससे इसके अंदर रखा 30-50 किलो का विस्फोटक फट जाता है)।

लागत: इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी कीमत है। एक शाहेद ड्रोन की कीमत लगभग $20,000 से $50,000 (लगभग 16 से 40 लाख रुपये) के बीच होती है।

रेंज: यह लगभग 2,000 से 2,500 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है, जो इसे लंबी दूरी के हमलों के लिए घातक बनाता है।

यूक्रेन: दुनिया के लिए एक 'टेस्टिंग ग्राउंड'

फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, रूस के पास जब गाइडेड मिसाइलों की कमी होने लगी, तो उसने ईरान का रुख किया।

रूस का 'गेरान-2': रूस ने शाहेद ड्रोन्स को गेरान-2 का नाम देकर यूक्रेन पर इस्तेमाल करना शुरू किया।

रणनीति: रूस इनका इस्तेमाल स्वार्म टैक्टिक्स (एक साथ कई ड्रोन्स का झुंड भेजना) के जरिए करता है। भले ही यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे पैट्रियट) 10 में से 8 ड्रोन मार गिराएं, लेकिन बचे हुए 2 ड्रोन बिजली घरों या सैन्य ठिकानों को तबाह करने के लिए काफी होते हैं।

रूस में निर्माण: ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस अब ईरान की मदद से तातारस्तान के 'अलाबुगा' में खुद अपनी ड्रोन फैक्ट्री चला रहा है, जिससे इन ड्रोन्स का मास-प्रोडक्शन (बड़े पैमाने पर उत्पादन) हो रहा है।

खाड़ी देशों और इजराइल पर ईरान का पलटवार

वीकेंड में हुए अमेरिकी और इजराइली हमलों के बाद, ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कई देशों पर निशाना साधा। ईरान ने इजराइल, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को निशाना बनाया। इन हमलों में बंदरगाहों, तेल सुविधाओं, सैन्य ठिकानों, हवाई अड्डों और कुछ बहुमंजिला इमारतों पर वार किया गया।

दुबई के एयर डिफेंस सिस्टम ने मात्र दो दिनों के भीतर 165 बैलिस्टिक मिसाइलों, दो क्रूज मिसाइलों और 540 से अधिक ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर दिया। हालांकि, इनके मलबे गिरने से कई जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आईं। कुछ ड्रोन इतनी दूर तक गए कि वे साइप्रस के अक्रोटिरी स्थित यूके रॉयल एयर फोर्स बेस तक पहुंच गए। ईरानी ड्रोन्स के करीब आते ही वहां सायरन बजने लगे और लगातार कई दिनों तक उन्हें हवा में ही नष्ट किया गया।

मध्य पूर्व और खाड़ी: 'प्रॉक्सी वॉर' का नया हथियार

ईरान केवल खुद इन ड्रोन्स का इस्तेमाल नहीं कर रहा है, बल्कि उसने अपने समर्थित गुटों की पूरी एक एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस खड़ी कर दी है। गाजा युद्ध शुरू होने के बाद, हूतियों ने लाल सागर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर इन्हीं ईरानी तकनीकी वाले ड्रोन्स और मिसाइलों से हमले किए हैं। इसने वैश्विक सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

इजरायल के खिलाफ उत्तरी सीमा पर हिजबुल्लाह लगातार ईरानी 'अबाबेल' और 'शाहेद' ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहा है। ये ड्रोन इजरायल के मशहूर 'आयरन डोम' की राडार से कई बार बचने में सफल रहे हैं क्योंकि ये बहुत नीची उड़ान भरते हैं। इराक और सीरिया के मिलिशिया: इराक में ईरान समर्थित गुटों ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए इन ड्रोन्स का इस्तेमाल किया है (जैसे जॉर्डन में 'टावर 22' पर हुआ हमला)।

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आधुनिक युद्ध का बदलता गणित: लागत का असंतुलन

ईरानी ड्रोन्स ने युद्ध के अर्थशास्त्र को पूरी तरह पलट दिया है। यही पश्चिमी देशों और अमेरिका के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है। ईरान या उसके प्रॉक्सी 20,000 डॉलर का ड्रोन फायर करते हैं। उस 20,000 डॉलर के ड्रोन को हवा में मार गिराने के लिए अमेरिका या यूक्रेन को 2 मिलियन डॉलर (लगभग 16 करोड़ रुपये) की पैट्रियट मिसाइल या अन्य महंगी एयर-डिफेंस मिसाइल दागनी पड़ती है।

नतीजा: आप आर्थिक रूप से एक सस्ता ड्रोन गिराने के लिए करोड़ो रुपये की मिसाइलें कब तक खर्च कर सकते हैं? इसे सैन्य भाषा में असममित युद्ध कहा जाता है।

ईरान ने दिखा दिया है कि महाशक्ति बनने के लिए आपको महंगे फाइटर जेट्स की जरूरत नहीं है; सस्ती, सटीक और बड़े पैमाने पर बनाई जाने वाली तकनीक दुनिया के सबसे मजबूत एयर डिफेंस को भी चकमा दे सकती है। आज सूडान से लेकर वेनेजुएला तक ईरानी ड्रोन्स की मांग बढ़ रही है। इससे निपटने के लिए पश्चिमी देशों को अब लेजर वेपन और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी सस्ती एंटी-ड्रोन तकनीकों का विकास तेजी से करना पड़ रहा है।

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