Rajpal Yadav had served 3 month jail sentence know about his property राजपाल यादव की जमीनें कहां गईं, साल 2018 में क्यों गए थे जेल?, Bollywood Hindi News - Hindustan
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राजपाल यादव की जमीनें कहां गईं, साल 2018 में क्यों गए थे जेल?

Rajpal Yadav Property: राजपाल यादव पहली बार जेल नहीं जा रहे हैं। इससे पहले भी वह जेल जा चुके हैं और तीन महीने जेल में रह भी चुके हैं। उन्होंने खुद इंटरव्यू में अपना जेल का एक्सपीरियंस शेयर किया था।

Tue, 10 Feb 2026 01:28 PMVartika Tolani लाइव हिन्दुस्तान
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राजपाल यादव की जमीनें कहां गईं, साल 2018 में क्यों गए थे जेल?

राजपाल यादव के तिहाड़ जेल जाने के बाद लोगों के मन में कई सारे सवाल आ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या राजपाल यादव के पास जमीनें नहीं हैं जिन्हें बेचकर वे अपना बयाज भर सकें? आइए हम आपको बताते हैं कि उनकी जमीनें कहां गईं। दरअसल, राजपाल यादव ने 'अता पता लापता' बनाने के लिए सिर्फ मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये नहीं, बल्कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बांद्रा (मुंबई) ब्रांच से भी 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था।

कहां गईं जमीनें?

फिल्म के फ्लॉप होने के बाद राजपाल यादव न मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के पैसे दे पाए और न सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बांद्रा (मुंबई) ब्रांच की किश्त पटा पाए थे। मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने कोर्ट में केस दायर किया था। वहीं बैंक को किश्त न पटा पाने के अपराध में उन्हें साल 2018 में तीन महीने के लिए जेल भेज दिया गया था। इतना ही नहीं, साल 2024 में बैंक अधिकारियों ने अपने पैसे रिकवर करने के लिए राजपाल यादव के होम टाउन शाहजहांपुर में उनकी करोड़ों की संपत्ति भी जब्त कर ली थी।

राजपाल यादव

जेल में क्या करते थे राजपाल यादव?

एक्टर ने जेल में अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए यूट्यूबर सिद्धार्थ कन्नन को बताया था, "मैं जब जेल में था तब मैं हर दिन सभी कैदियों को इकट्ठा करता था। मैंने स्पेशनल परमिशन ले रखी थी। मैं जेल में वर्कशॉप चलाता था। मेरी वर्कशॉप की वजह से जिन लोगों को जिंदगी में कुछ भी करने की कोई इच्छा नहीं थी, वे मुस्कुरा रहे थे। जिन लोगों की जिंदगी में कोई दिशा नहीं थी, उन्होंने एक्टिंग शुरू कर दी थी।"

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मिले थे दो सर्टिफिकेट

राजपाल यादव ने आगे कहा था, "तीन महीने बाद, जब मैं वहां से जा रहा था, तो जेल सुपरिटेंडेंट और स्टाफ ने मुझे एक के बजाय दो सर्टिफिकेट दिए थे। उन्होंने कहा था, 'यह जगह बहुत हिस्टोरिक है और मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में आप जैसा कोई नहीं देखा। हम आपसे इंस्पायर हुए। हमें लगा था कि हम हर दिन आपकी शिकायतें सुनेंगे, लेकिन इन तीन महीनों में आपने दीवारों में जान डाल दी है।'"

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