धर्मेंद्र ने आखिरी फिल्म में जताई गांव वापस जाने की इच्छा, इक्कीस की ये क्लिप देख रो पड़े फैन्स
Dharmendra Poem In Ikkis: धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म इक्कीस से उनकी कविता की वीडियो और ऑडियो क्लिप मेकर्स ने रिलीज कर दी है। इसे देखकर लोग इमोशनल हो रहे हैं। धर्मेंद्र इस क्लिप में अपने गांव लौट जाने की इच्छा जताते दिख रहे हैं।

वॉर फिल्म इक्कीस 25 दिसंबर को रिलीज हो रही है। यह धर्मेंद्र की आखिरी मूवी है। मेकर्स ने अब दिवंगत एक्टर पर फिल्माई एक पोएम रिलीज करके उन्हें श्रद्धांजली दी है। यह कविता धर्मेंद्र की आवाज में है। इसमें वह अपने गांव वापस जाने की इच्छा जता रहे हैं। लोग उनकी आवाज में यह कविता सुनकर इमोशनल हैं। यह कविता धर्मेंद्र ने ही लिखी थी।
धरती के सच्चे बेटे धर्मेंद्र
मैडॉक फिल्म्स ने क्लिप शेयर करके लिखा है, 'आज भी जी करदा है, पिंड अपने नू जावां।'धरमजी धरती के सच्चे बेटे थे और उनकी बातों में जमीन की खुशबू आती है। उनकी ये कविता एक तड़प है, एक लेजेंड से दूसरे लेजंड को श्रद्धांजली है। हमें यह शाश्वत कविता देने के लिए आपका शुक्रिया।
क्लिप में दिखता है गांव का सुंदर नजर
क्लिप में एक गांव दिखता है, कार दिखती है। धर्मेंद्र गांव के कमरे में घुसते हुए दिखाई देते हैं। उन्हें देखकर गांव के लोग खुश होते हैं। छोटे आशीर्वाद लेते हैं। वह अपने गांव की मिट्टी उठाते दिखते हैं। गांव की शाम और प्यारा नजारा दिखता है। फिर धर्मेंद्र कार में बैठे ये कविता पढ़ते दिखाई देते हैं। धर्मेंद्र जो कविता बोल रहे हैं उसका हिंदी में अर्थ है, आज भी दिल करता है कि मैं अपने गांव जाऊं। वह वहां गांव के तालाब में गाय-बछड़ों के साथ नहाने, दोस्तों के साथ बचपन की तरह कबड्डी खेलने की इच्छा जताते हैं और बोलते हैं कि गांव की जिंदगी जैसी कोई जिंदगी नहीं है। कविता की लाइनों में वह अपनी मां को भी याद करते हैं।
लोग हुए इमोशनल
इस क्लिप पर कई सारे कमेंट्स दिख रहे हैं। लोग ने RIP और मिस यू लेजंड भी लिखा है। एक ने लिखा है, धर्मेंद्र जी के लिए यह फिल्म देखने जरूर जाऊंगा। कई लोगों ने नोटिस किया कि क्लिप में असरानी भी दिख रहे हैं। बीते दिनों वह भी दुनिया से जा चुके हैं। कई लोग रोने वाले इमोजी शेयर कर रहे हैं।
जब सच में अपने गांव पहुंचे थे धर्मेंद्र
इंट्रेस्टिंग बात है कि फिल्म में दिखाया गया सीन धर्मेंद्र की असल जिंदगी से भी मिलता जुलता है। धर्मेंद्र एक्टर बनने के कई साल बाद जब अपने पुरखों के गांव गए थे तो वहां घर के बाहर मिट्टी की माथे से लगाया था। वह गांववालों से मिलकर रोए भी थे कि इतने साल बाद वहां पहुंच पाए।
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