film producers has to follow this rule before naming the movie, directors has id and can complaint to IMPPA फिल्म का नाम रखने के लिए प्रोड्यूसर को फॉलो करना होता है ये नियम, डायरेक्टर्स को मिलता है IFTDA कार्ड, Bollywood Hindi News - Hindustan
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फिल्म का नाम रखने के लिए प्रोड्यूसर को फॉलो करना होता है ये नियम, डायरेक्टर्स को मिलता है IFTDA कार्ड

किसी भी फिल्म का नाम सबसे खास होता है। इसी नाम को सुनने के बाद ऑडियंस फिल्म थिएटर तक देखने जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं फिल्मों के नाम रखने की प्रक्रिया क्या है और ये कैसे काम करती है। आइए जानते हैं-

Mon, 2 Feb 2026 11:01 PMUsha Shrivas लाइव हिन्दुस्तान
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फिल्म का नाम रखने के लिए प्रोड्यूसर को फॉलो करना होता है ये नियम, डायरेक्टर्स को मिलता है IFTDA कार्ड

बॉलीवुड एक्टर गोविंदा ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके लिए फिल्म का नाम बहुत जरूरी है। फिल्म के नाम की वजह से उन्होंने कई फिल्मों को रिजेक्ट कर दिया। हालांकि, इनमें से कुछ फिल्में सफल भी हुई। लेकिन फिल्म का नाम अच्छा होना जरूरी है। कई बार फिल्ममेकर्स फिल्म के नामों को लेकर लड़ते देखे गए हैं। तो आखिर इंडियन सिनेमा के लिए फिल्म के नाम रखने की प्रक्रिया क्या है।? कैसे किसी फिल्म का नाम तय होता है? कैसे होती है फिल्म के इन नामों की रजिस्ट्री? आइए जानते हैं।

किसी भी फिल्म के नाम रखने की प्रक्रिया क्या है?

1937 में इंडियन मोशन पिक्चर प्रोडक्शन एसोसिएशन (IMPPA) का गठन हुआ था। ये सबसे पुरानी संस्था है जो प्रोड्यूसर के लिए काम करती है। इसे आप फिल्मों का रजिस्ट्री ऑफिस समझ सकते हैं। अब समझिए कि किसी भी प्रोड्यूसर को इसकी जरूरत क्यों हैं? ये एक ऐसी संस्था है जो फिल्मों के नामों को सुरक्षित रखती है, उन नामों की रजिस्ट्री करती है। जैसे मान लीजिए किसी प्रोड्यूसर को अपनी फिल्म का नाम ‘धुरंधर’ रखना है। तो सबसे पहले उन्हें IMPPA यानि इंडियन मोशन पिक्चर प्रोडक्शन एसोसिएशन में चेक करना होगा कि इस नाम से पहले किसी दूसरे प्रोड्यूसर ने रजिस्ट्री तो नहीं करवाई हुई है। अगर नहीं तो आप ये नाम बुक कर सकते हैं। इसके अलावा अगर किसी प्रोड्यूसर को पहले ही किसी नाम को अपने पास सुरक्षित रखना है और वो नहीं चाहते कि इस नाम का इस्तेमाल कोई दूसरा फिल्ममेकर करे, तो वो इस नाम की भी रजिस्ट्री पहले से कर के अपने पास सुरक्षित रख सकते हैं। ऐसे में भविष्य में भी कोई भी उस नाम का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।

film name

IMPPA का काम

इसके अलावा एक बहुत ही जरूरी काम भी IMPPA करता है। फिल्म के नाम रजिस्ट्री के साथ प्रोड्यूसर को IMPPA एक सर्टिफिकेट इशु करता है। इस सर्टिफिकेट में फिल्म के नाम की रजिस्ट्री डिटेल होती है जो बाद में फिल्म सर्टिफिकेशन यानी CBFC को दिखाना होता है। CBFC से मिले सर्टिफिकेट के बाद ही कोई भी फिल्म थिएटर में रिलीज की जा सकती है।

अब प्रक्रिया समझिए-
1. किसी भी फिल्म प्रोड्यूसर को सबसे पहले अपना बैनर रजिस्टर करवाना होता है। उदाहरण के तौर पर किसी बैनर का नाम है सनशाइन फिल्म्स। बैनर रजिस्टर के लिए पैन कार्ड, GST और आधार नंबर लगता है।
2. एक एप्लीकेशन के साथ मेम्बरशिप फीस देनी होती है जो 5 से 20 हजार के बीच होती है। कैटेगरी के हिसाब से।
3. स्क्रुनिटी होती है जिसमें IMPPA कमीटी ये चेक करती है कि आपके बैनर के नाम पर कोई दूसरा बैनर तो नहीं है।

4. इसके बाद प्रोड्यूसर फिल्म का नाम रजिस्टर कर सकते हैं। एक साल तक किसी भी फिल्म का नाम सुरक्षित रखने के लिए 350 से 500 रुपए तक फीस दी जाती है ताकि एक साल तक फिल्म का टाइटल ब्लॉक किया जा सके। हर साल इसे रिन्यू किया जा सकता है।

5. इसके बाद इंडियन फिल्म्स एंड टीवी डायरेक्टर्स एसोसिएशन का काम आता है। ये डायरेक्टर्स और असिस्टेंट डायरेक्टर का समूह है। अगर कोई प्रोड्यूसर, डायरेक्टर को पैसे देने से मना करता है तो इस IFTDA की एंट्री होती है। ये समूह डायरेक्टर्स की मदद के लिए बनाया गया है। ये समूह इतनी ताकत रखता है कि अगर डायरेक्टर्स के पैसे नहीं दिए गए तो फिल्म रिलीज पर भी रोक लगाई जा सकती है।

6. खास बात ये है कि अधिकतर प्रोड्यूसर्स ऐसे ही डायरेक्टर्स को काम देते हैं जिनके पास IFTDA का कार्ड होता है। फिल्म सेट पर ये कार्ड किसी भी डायरेक्टर की पहचान होती है।

तो इस बड़ी प्रक्रिया के बाद ही किसी भी फिल्म का नाम फाइनल होता है। डायरेक्टर्स के लिए भी अपने अधिकार हैं।कोई भी फिल्म इस प्रक्रिया के बाद थिएटर तक पहुंचती हैं।

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